
मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली। फिल्म लगान (2001) की शूटिग के दौरान किरण राव सूबह 4:30 बजे सेट पर पहुंच जाती थी। वहां उनका सबसे पहला काम रेचल शैली (लगान की एलिजाबेथ) के लिए टोस्ट बनाना था। इस बात का खुलासा खुद किरण राव ने एक पुराने इंटरव्यू में किया था। किरण ने यह भी बताया कि यह सब करना उनके लिए एक बुरा सपना जैसा था।
दरअसल, किरण राव आमिर खान की दूसरी पत्नी थी। वह लगान में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम भी कर रही थी। खास बात यह है कि इस फिल्म की प्रोड्यूसर आमिर की पहली पत्नी रीना दत्ता थीं। फिल्म के डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर थे। आमिर-किरण की मुलाकात फिल्म के सेट पर ही हुई थी। हालांकि, किरण ने एक इंटरव्यू में बताया था कि दोनों सेट पर ज्यादा बात नहीं करते थे।
एक पुराने इंटरव्यू में किरण ने बताया था- जब मुझे एक्टर्स को मेकअप रूम से सेट तक ले जाने की जिम्मेदारी दी गई, तो मुझे कभी-कभी उन्हें निराशा होती थी। मेरा काम था कि सभी एक्टर्स को मेकअप, हेयर और वॉर्डरोब से सेट तक किसी तरह पहुंचाया जाए। 'लगान' में हमारे पास दो क्रिकेट टीमें थीं, साथ ही सभी की दाढ़ी थी और महिलाओं ने ड्रेसेस पहनी हुई थीं। यह बहुत मुश्किल काम था। सुबह 4-4:30 बजे सेट पर पहुंचने से पहले ही, मैं वॉकी-टॉकी पर उन्हें टोस्टर चालू करने के लिए कह देता था। एलिजाबेथ का रोल करने वाली एक्ट्रेस को सुबह सबसे पहले टोस्ट चाहिए होता था। सिर्फ प्रोड्यूसर के पास ही सेल फोन था। उन्हें सिग्नल भी सिर्फ एक ही जगह पर मिलता था, मंदिर के पास पहाड़ी पर। वहां, कुछ सीन शूट किए गए थे।
जब किरम से पूछा गया कि क्या स्कूल में अपनी पढ़ाई और उस समय किए जा रहे काम को देखते हुए उन्हें कभी सेट पर "निराशा" महसूस हुई, तो किरण ने कहा- मैं मेकअप रूम में बैठी सोचती रहती थी कि जामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स करने के बाद मैं यहां क्या कर रही हूं। लेकिन आखिरकार, हर किसी को इन जगहों पर अपना समय देना ही पड़ता है। पर आप उम्मीद करते हैं कि एक दिन आप मेकअप रूम से निकलकर मॉनिटर के पास जगह पा लेंगे। मुझे शूट देखने का मौका ही नहीं मिला। मैंने अपना समय मेकअप रूम में ही बिताया।
किरण के आगे कहा- मुझे लगा नहीं था कि लगान इतनी बड़ी फिल्म बन जाएगी। दरअसल, फिल्म की लंबाई मुझे बहुत परेशान कर रही थी। 224 मिनट की यह फिल्म पहले से ही काफी लंबी थी। लेकिन आमिर ने एक शुरुआती कट तैयार किया जिससे सबको लगा कि यह छह घंटे की फिल्म बन जाएगी। आमिर ने हमें एक कट दिखाया जो चार घंटे का था। उसमें क्रिकेट वाला हिस्सा भी नहीं था। चार घंटे! बिना क्रिकेट के! हमें समझ नहीं आ रहा था कि इसे छोटा कैसे किया जाएगा। हमें लगा कि यह आसानी से छह घंटे की फिल्म बन जाएगी।
लगान साल 2001 में रिलीज हुई थी। इसे आशुतोष गोवारिकर ने डायरेकिट किया था। यह अब तक की पहली और आखिरी इंडियन फिल्म है, जिसे बेस्ट फॉरेन लैंगवेज फीचर के लिए नॉमिनेट किया गया। आमिर के अलावा फिल्म में ग्रेसी सिंह, पॉल ब्लैकथॉर्न, रैचेल शैली, रघुवीर यादव, राजेश विवेक, राज जुत्शी, प्रदीप रावत, अखिलेंद्र मिश्रा, दया शंकर पांडे, यशपाल शर्मा, अमीन हाजी, आदित्य लाखिया, श्री वल्लभ व्यास, कुलभूषण खरबंदा, सुहासिनी मुले, राजेंद्र गुप्ता, जावेद खान अमरोही और ए. के. हंगल थे।
यह भी पढ़ें- Friday OTT Releases: 21 अगस्त को देखें जन नायकन -वेलकम टू द जंगल, वीकेंड पर घर बैठे मिलेगा एंटरटेनमेंट का फुल डोज