
मनोरंजन डेस्क। एक बार भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने कहा था कि वह दोबारा कभी लता मंगेशकर नहीं बनना चाहेंगी। आज उनकी 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। 28 सितंबर 1929 को इंदौर में जन्मीं लता जी ने भारतीय फिल्म संगीत को ऐसी आवाज दी, जो कई पीढ़ियों तक लोगों की यादों का हिस्सा बनी रही।
लता मंगेशकर ने बेहद कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों का असर उनके जीवन पर पड़ा और संगीत उनके आगे का रास्ता बना। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने फिल्मों के लिए गाना शुरू किया। लेकिन, अपने जीवन में स्ट्रगल के साथ उन्होंने कई बार जीत भी हासिल की। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानेंगे उनके जीवन के कुछ ऐसे खुशहाल पल जिन्होंने लता दीदी को सबसे लिए प्रेरणा बना दी।
शुरुआती दौर में उनकी आवाज को बहुत पतली बताकर कई बार पसंद नहीं किया गया। लेकिन संगीतकार गुलाम हैदर ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा किया और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिला। इसके बाद लता मंगेशकर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
लता मंगेशकर सिर्फ अपनी आवाज के लिए ही नहीं, बल्कि सिंगर्स के अधिकारों को लेकर अपनी बात रखने के लिए भी जानी जाती थीं। 1960 के दशक में उन्होंने सिंगर्स को भी रिकॉर्डिंग से रॉयल्टी देने की मांग की थी। लेकिन, यह सब कुछ इतनवा आसान नहीं था। मोहम्मद रफी इसके खिलाफ थे।
इसी मतभेद के कारण एक समय दोनों ने साथ में डुएट गाना बंद कर दिया था। हालांकि यह दूरी हमेशा नहीं रही। बाद में संगीतकार जयकिशन की पहल से दोनों के बीच सुलह हुई और लता-रफी की आवाज फिर कई गीतों में साथ सुनाई दी।
लता मंगेशकर का नाम 1974 की Guinness Book of World Records में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाले कलाकार के तौर पर दर्ज हुआ था।
हालांकि बाद में इस रिकॉर्ड को लेकर विवाद सामने आया। मोहम्मद रफी की ओर से भी अधिक गाने रिकॉर्ड करने का दावा किया गया था। Guinness के बाद के संस्करणों में इस रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी में बदलाव और दोनों सिंगर्स के नामों का उल्लेख देखने को मिला।
बता दें कि लता दीदी ने की भाषाओं में 1600 से ज्यादा गाने गाए हैं।

लता मंगेशकर के इंटरनेशनल म्यूजिक जर्नी की सबसे खास उपलब्धियों में लंदन का Royal Albert Hall भी शामिल है। उन्होंने यहां 1974 में पहली बार परफॉर्मेंस दी थी। यही वह साल है जिसे उनके Royal Albert Hall debut के तौर पर याद किया जाता है।
कई रिपोर्ट्स तका यह भी दावा है कि इस दौरान उन्हें सुनने के लिए इतने लोग आए थे कि हॉल में मौजूद लोगों को खड़े होकर तालियां बजाने के लिए जगह खाली करनी पड़ी।
लता मंगेशकर को भारतीय संगीत में उनके योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न सहित कई बड़े पुरस्कार मिले। दशकों तक उनकी आवाज हिंदी सिनेमा के संगीत की पहचान बनी रही। उन्होंने अलग-अलग दौर की एक्ट्रेसेज के लिए गाया और उनकी आवाज पर्दे पर नजर आने वाली कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों से जुड़ती चली गई।
6 फरवरी 2022 को लता मंगेशकर का निधन हुआ। उनके निधन के साथ भारतीय संगीत जगत की एक ऐसी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई, जिसे पहचानने के लिए नाम बताने की जरूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन उनकी आवाज आज भी फिल्मों, रेडियो, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म और लोगों की निजी यादों में सुनाई देती है।
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