
मनोरंजन डेस्क। बॉलीवुड में फिल्मों के बनने और रिलीज होने में देरी होना कोई नई बात नहीं है। कभी बजट कम पड़ जाता है, कभी एक्टर्स की डेट्स नहीं मिलतीं, तो कभी कहानी या प्रोडक्शन से जुड़ी परेशानियां सामने आ जाती हैं। लेकिन सोचिए, किसी फिल्म की शूटिंग शुरू हो और उसे पर्दे पर आने में 23 साल लग जाएं! इस दौरान उसके दो हीरो और निर्देशक ही दुनिया छोड़ दें, तो उस फिल्म की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं लगेगी।
यह कहानी है ‘मुगल-ए-आजम’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म बनाने वाले निर्देशक के. आसिफ की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘लव एंड गॉड’ की। लैला-मजनू की मशहूर प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म को उन्होंने बड़े पैमाने पर बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन यह प्रोजेक्ट उनकी जिंदगी का ऐसा अधूरा सपना बन गया, जिसे वह खुद पूरा होते नहीं देख सके।
साल 1960 में ‘मुगल-ए-आजम’ की सफलता के बाद के. आसिफ ने अपनी अगली फिल्म के लिए लैला-मजनू की प्रेम कहानी चुनी। फिल्म में मजनू यानी कैस का किरदार निभाने के लिए गुरु दत्त को चुना गया, जबकि निम्मी लैला के रोल में नजर आने वाली थीं।
साल 1963 में फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ रही थी। के. आसिफ इस प्रेम कहानी को भव्य अंदाज में पर्दे पर उतारना चाहते थे। फिल्म के क्लाइमैक्स में जन्नत का दृश्य दिखाने की योजना थी और इसके लिए सेट तैयार करने की बात भी सामने आई थी।
लेकिन 10 अक्टूबर 1964 को गुरु दत्त के निधन ने फिल्म के सफर को रोक दिया। उनके जाने के बाद फिल्म को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। आखिरकार के. आसिफ ने मजनू के किरदार के लिए नए एक्टर की तलाश शुरू की।
गुरु दत्त के बाद फिल्म में मजनू का किरदार निभाने के लिए संजीव कुमार को चुना गया। उनके साथ फिल्म की शूटिंग दोबारा आगे बढ़ी। कुछ समय के लिए लगा कि अब के. आसिफ का सपना पूरा हो सकेगा।
लेकिन मार्च 1971 में के. आसिफ का निधन हो गया। निर्देशक के जाने के बाद फिल्म एक बार फिर अधूरी रह गई। उनके पास कहानी को जिस तरह पूरा करने की योजना थी, वह पूरी नहीं हो सकी।
फिल्म का प्रोजेक्ट लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रहा। फिर इसे पूरा करने की जिम्मेदारी के. आसिफ की पत्नी अख्तर आसिफ ने उठाई। निर्माता के.सी. बोकाडिया की मदद से पुरानी शूटिंग के फुटेज जुटाए गए और उपलब्ध दृश्यों को जोड़कर फिल्म को रिलीज करने की कोशिश शुरू हुई।
फिल्म के दोबारा तैयार होने की कोशिशों के बीच नवंबर 1985 में संजीव कुमार का निधन हो गया। वह भी फिल्म को पूरी तरह तैयार होकर पर्दे पर नहीं देख सके।
इसके बाद उपलब्ध फुटेज के आधार पर फिल्म को पूरा करने की कोशिश की गई। कुछ दृश्यों को बॉडी डबल की मदद से आगे बढ़ाया गया और संजीव कुमार के संवादों के लिए डबिंग का सहारा लिया गया। इस वजह से फिल्म अपने मूल रूप में पूरी नहीं हो पाई।
आखिरकार 27 मई 1986 को ‘लव एंड गॉड’ रिलीज हुई, यानी प्रोजेक्ट शुरू होने के करीब 23 साल बाद। फिल्म में निम्मी और संजीव कुमार के अलावा प्राण, सिमी ग्रेवाल और अमजद खान जैसे कलाकार भी नजर आए। हालांकि, अधूरे रूप में रिलीज हुई इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली।
फिल्म के साथ लगातार हुई त्रासदियों ने इसके आसपास रहस्य और दुर्भाग्य की चर्चा को जन्म दिया। गुरु दत्त का निधन, के. आसिफ की मौत और फिर संजीव कुमार का दुनिया से चले जाना—इन घटनाओं ने फिल्म की कहानी को और असाधारण बना दिया।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने ‘लव एंड गॉड’ को बॉलीवुड की सबसे लंबी मेकिंग वाली फिल्मों में दर्ज किया है। यह फिल्म आज भी याद दिलाती है कि कभी-कभी किसी फिल्म की असली कहानी उसके पर्दे पर दिखने वाले दृश्यों से कहीं ज्यादा बड़ी होती है।