
मनोरंजन डेस्क। वेटरन एक्टर नाना पाटेकर एक नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर थें। लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि एक्टर के साथ नाना एक प्रोफेशनल अवॉर्ड विनर शूटर भी रह चुके हैं। वह दशकों तक स्टेट और नेशनल लेवल राइफल शूटिंग कंपटीशन में हिस्सा लेते रहे। शूटिंग में उनके हुनर की वजह से उन्हें 'मशहूर शूटर' का खिताब भी मिल चुका था।
नाना ने 40 साल की उम्र के बाद ही राइफल से प्रैक्टिस करना शुरू किया था। शूटिंग प्रैक्टिस को याद करते हुए वह कई बार बात कर चुके हैं। 2011 में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए इंटरव्यू में द्वंगत एक्टर ने बताया था- मैं शूटिंग कंपटीशन के इनाम बांटने के सभी इवेंट्स में मुख्य अतिथि हुआ करता था। मैंने कई तरह की बंदूकों से हाथ आजमाया और मेरा निशाना बेहतर होता गया। मैंने मिनरल वॉटर की बोतल के ढक्कन जैसे छोटे निशानों पर भी निशाना लगाना शुरू कर दिया।
साल 2001 के आस-पास, जब वे 49 साल के थे, तब उन्होंने कंपटीशन में हिस्सा लेना शुरू किया। नाना ने 50 मीटर राइफल प्रोन और 300 मीटर बिग-बोर इवेंट्स में हिस्सा लिया और पुणे के बालेवाड़ी और महू जैसी जगहों पर ट्रेनिंग की। 1991 में आई अपनी फिल्म 'प्रहार' के लिए भारतीय सेना के साथ ट्रेनिंग करने से वह इस चीज में माहिर हो गए थे।
2004 में, इंदौर में BSF की रेओटी रेंज में हुई 48वीं नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में नाना ने 300 मीटर बिग-बोर इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। तीन साल बाद, उसी कंपटीशन में उन्होंने महाराष्ट्र के साथ टीम ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने 600 में से 549 पॉइंट हासिल किए और 49 पार्टीसिपेंट्स में 13वें स्थान पर रहे। 2007 में उनके शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें 'रिनोन्ड शॉट' (जाने-माने निशानेबाज) का दर्जा मिला। इस दर्जे का मतलब था कि एक्टर बिना किसी टैक्स के राइफल इम्पोर्ट कर सकते थे। नाना ने तब पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा था- मुझे बस यह नई राइफल मिल जाए, तो मैं यकीन दिलाता हूं कि मैं 600 में से 590 पॉइंट स्कोर कर लूंगा।
नाना 60 साल की उम्र के बाद भी नेशनल और स्टेट-लेवल की शूटिंग कंपटीशन में हिस्सा लेते रहे। उसके बाद भी, वे शौक के तौर पर शूटिंग करते रहे और देश भर की अलग-अलग रेंज में प्रैक्टिस करते रहे। एक्टर के बारे में यह बात मशहूर थी कि जब भी उन्हें आउटडोर शूटिंग के दौरान आस-पास कोई शूटिंग रेंज मिलती, तो वे अपना शूटिंग का सामान साथ ले जाते थे।
वेटरन एक्टर नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को सुबह 5:20 पर निधन हो गया। वह 75 साल के थे। ANI की रिपोर्ट कि मानें तो उन्हें सीवियर हार्ट अटैक आया था।
मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, डॉक्टर्स ने CPR जरिए 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की थी। लेकिन, एक्टर 'एसिस्टोल' की स्थिति में ही रहे। डॉ. सालकर ने कहा- 45 मिनट तक लगातार CPR देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। एक मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम किया जाएगा।
हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए, उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।