
मनोरंजन डेस्क। रामायण की कहानी सदियों पुरानी है, लेकिन जब भी पर्दे पर भगवान राम को दिखाया जाता है, दर्शकों के मन में सबसे पहले एक ही चेहरा उभरता है और वह है अरुण गोविल का। साल 1987 में रामानंद सागर की रामायण में भगवान राम का किरदार निभाकर अरुण गोविल ने ऐसी छाप छोड़ी थी, जिसे करीब चार दशक बाद भी मिटाना आसान नहीं है। अब नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रणबीर कपूर अपनी अदाकारी से दर्शकों के दिल में वही जगह बना पाएंगे, जो अरुण गोविल ने बनाई थी?
इस फिल्म की सबसे खास बात इसकी कहानी के साथ-साथ इसकी स्टारकास्ट भी है। फिल्म में अरुण गोविल भगवान राम के पिता राजा दशरथ का किरदार निभा रहे हैं। यानी जिस एक्टर ने कभी पर्दे पर राम बनकर करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई थी, वह अब उसी कहानी में उनके पिता की भूमिका में नजर आएंगे। यह अपने आप में एक दिलचस्प और भावुक करने वाला संयोग है।

साल 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुई रामानंद सागर की रामायण ने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अलग पहचान बनाई थी। इस सीरियल में अरुण गोविल ने भगवान राम का किरदार निभाया। उनकी सादगी, चेहरे पर हमेशा रहने वाली हल्की मुस्कान, शांत स्वभाव और संवाद बोलने का तरीका दर्शकों को इतना पसंद आया कि लोग उन्हें एक्टर की जगह भगवान राम के रूप में देखने लगे।
कई जगहों पर लोग उन्हें सचमुच भगवान राम की तरह सम्मान देने लगे थे। उत्तर और मध्य भारत में आज भी मेलों और धार्मिक आयोजनों में अरुण गोविल की राम वाली तस्वीरें देखने को मिल जाती हैं। उस दौर में सोशल मीडिया जैसी कोई चीज नहीं थी, इसके बावजूद उनका प्रभाव देश के कोने-कोने तक पहुंचा।
यही वजह है कि इसके बाद जब भी किसी एक्टर ने पर्दे पर राम का किरदार निभाया, उसकी तुलना अरुण गोविल से जरूर हुई। चाहे साल 1992 की भारत-जापान की एनिमेटेड फिल्म हो या 2008 और 2015 में आए टीवी सीरियल, हर बार दर्शकों ने नए कलाकारों में अरुण गोविल की झलक तलाशने की कोशिश की।
साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान जब देश में लॉकडाउन लगा, तब दूरदर्शन ने एक बार फिर रामायण का प्रसारण शुरू किया। इस बार नई पीढ़ी यानी जेनरेशन Z को भी अरुण गोविल के राम को देखने का मौका मिला। सीरियल को जबरदस्त दर्शक मिले और एक दिन में करीब 7.7 करोड़ लोगों ने इसे देखा। इससे यह साबित हुआ कि अरुण गोविल की लोकप्रियता सिर्फ एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है।
अरुण गोविल के राम की सबसे बड़ी खासियत उनका शांत और सौम्य व्यक्तित्व था। उनके चेहरे पर मासूमियत, आंखों में करुणा और बोलने के अंदाज में एक अलग ठहराव नजर आता था। दर्शकों के लिए उनका एक्टिंग सिर्फ एक किरदार निभाना नहीं था, बल्कि भगवान राम की छवि को जीवंत होते देखने जैसा अनुभव था।
साल 2008 में गुरमीत चौधरी ने राम का किरदार निभाया। इसके बाद 2015 में आशीष शर्मा इस भूमिका में नजर आए। वहीं बड़े पर्दे पर प्रभास ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ में राम का किरदार निभाया। हालांकि, इन सभी कलाकारों को दर्शकों की तुलना का सामना करना पड़ा। खासकर ‘आदिपुरुष’ में राम के आक्रामक अंदाज को लेकर काफी आलोचना हुई। दर्शकों का मानना था कि भगवान राम के व्यक्तित्व में जिस शांति और विनम्रता की उम्मीद की जाती है, वह पर्दे पर दिखाई नहीं दी।
अब यही सवाल रणबीर कपूर को लेकर भी उठ रहा है। कुछ दर्शकों को उनके चेहरे और व्यक्तित्व में राम के किरदार के लिए जरूरी शांति दिखाई देती है, जबकि कुछ का मानना है कि अरुण गोविल जैसी छाप दोबारा बनाना किसी भी एक्टर के लिए आसान नहीं होगा।
अरुण गोविल के लिए भगवान राम का किरदार जितना बड़ा सम्मान बना, उतनी ही बड़ी चुनौती भी साबित हुआ। रामायण की सफलता के बाद दर्शकों ने उन्हें भगवान राम की छवि से जोड़ दिया। इसका असर उनके फिल्मी करियर पर भी पड़ा।
कई निर्माता उन्हें दूसरे तरह के किरदारों में देखने के लिए तैयार नहीं थे। उन्हें लगता था कि दर्शक अरुण गोविल को रोमांटिक हीरो या किसी व्यावसायिक फिल्म के किरदार में स्वीकार नहीं करेंगे। इस तरह राम का किरदार उनकी पहचान तो बन गया, लेकिन उनके लिए दूसरी भूमिकाओं के रास्ते भी मुश्किल हो गए।
नितेश तिवारी की रामायणम् को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसके बड़े बजट और शानदार विजुअल इफेक्ट्स की हो रही है। करीब 4,000 करोड़ रुपये के बजट वाली इस फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है। वहीं रामानंद सागर की 1980 के दशक की रामायण सीमित संसाधनों और सामान्य टेलीविजन तकनीक के सहारे बनाई गई थी। इसके बावजूद उसने दर्शकों के दिलों में ऐसी जगह बनाई, जिसे आज भी याद किया जाता है।

रणबीर कपूर का राम वाला किरदार अरुण गोविल से अलग नजर आ सकता है। दोनों कलाकारों के बीच उम्र का अंतर भी इस तुलना को दिलचस्प बनाता है। अरुण गोविल ने महज 29 साल की उम्र में भगवान राम का किरदार निभाया था, जबकि रणबीर कपूर इस भूमिका को निभाते समय 44 साल के हैं।
वाल्मीकि रामायण की जानकार अमी गणात्रा सहित कई विद्वान बताते रहे हैं कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान राम का वर्णन चौड़े कंधों और एक योद्धा जैसे व्यक्तित्व वाले राजकुमार के रूप में मिलता है। ऐसे में फिल्म में रणबीर का लुक और उनका योद्धा वाला अंदाज इस किरदार को एक अलग रूप दे सकता है। अरुण गोविल के राम में जहां शांति और सौम्यता अधिक दिखाई देती थी, वहीं रणबीर का किरदार एक भव्य सिनेमाई प्रस्तुति के रूप में सामने आ सकता है।
फिल्म के लॉस एंजिलिस प्रीमियर से सामने आई प्रतिक्रियाओं में भी रणबीर की तारीफ की चर्चा रही है। वहीं खास बात यह है कि खुद अरुण गोविल रणबीर कपूर की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने रणबीर को अपनी कल्पना के राम के व्यक्तित्व के काफी करीब बताया है।
ऐसे में यह जरूरी नहीं कि रणबीर कपूर अरुण गोविल की नकल करें। उनकी चुनौती एक नई पीढ़ी के सामने भगवान राम के चरित्र को अपने अंदाज में पेश करने की है। वहीं अरुण गोविल का राजा दशरथ बनकर इस कहानी का हिस्सा बनना रामायण की दुनिया में एक खूबसूरत वापसी जैसा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या रणबीर कपूर अपनी अदाकारी से राम के किरदार को एक नई पहचान दे पाते हैं या फिर चार दशक पहले बनी अरुण गोविल की छवि ही दर्शकों के दिलों पर राज करती रहेगी।
यह भी पढ़ें- रिलीज से पहले ही रामायणम् ने कमाए 75 करोड़; भारत के हिंदी बेल्ट में सबसे ज्यादा कलेक्शन, बिके 11 लाख से ज्यादा टिकट