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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। आज रेखा हिंदी सिनेमा की सबसे दिग्गज एक्ट्रएसेज में से एक हैं। उन्होंने अब तक 180 से ज्यादा फिल्मों में काम कर लिया है और कई लोगों की फेवरेट हैं। लेकिन, यहां तक पहुंचने का उनरका यह सफर आसान नहीं था। हम में से बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने फिल्मों में कदम शौक के लिए नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक मुश्किलों के चलते रखा था। तो आइए उनके स्ट्रगल स्टोरा को जानते हैं…
रेखा का जन्म एक्टर जेमिनी गणेशन और एक्ट्रेस पुष्पवल्ली के घर हुआ था। पहले उनका नाम भानुरेखा रखा गया। वह बचपन से ही काफी शर्मीली थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और भाई-बहनों की पढ़ाई में मदद करने के लिए उन्होंने स्कूल तक छोड़ दिया था। हालांकि, बचपन के बारे में पूछने पर रेखा ने अपने बचपन को ‘खूबसूरत’ बताया था।
रेखा ने बताया था- मेरे माता-पिता के बीच रिश्ता रोमांटिक जरूर था, लेकिन काफी जटिल भी था। पिता हमें बहुत छोटी उम्र में ही छोड़कर चले गए थे। इतना छोटा होने की वजह से मुझे कुछ खास याद नहीं है। मेरी मां अक्सर जेमिनी गणेशन के बारे में बातें करती थीं। उनके आकर्षक व्यक्तित्व और प्यार की कहानियां सुनाती थीं। इसलिए पिता की गैरमौजूदगी के बावजूद मेरे मन में उनकी एक अलग छवि बनी रही।
रेखा ने बताया था कि उनके पिता की शुरुआती यादें घर से नहीं, बल्कि स्कूल के बाहर की हैं। एक बार उन्होंने जेमिनी गणेशन को स्कूल में अपने दूसरे बच्चों को छोड़ने आते देखा था। रेखा उसी स्कूल में पढ़ती थीं, जहां उनके पिता के दूसरी शादियों से हुए कुछ बच्चे भी पढ़ते थे। लेकिन इन मुलाकातों के बावजूद उनके और पिता के बीच कोई बातचीत नहीं हुई। रेखा को लगता था कि शायद उनके पिता को यह तक पता नहीं था कि वह वहां मौजूद हैं।
जब रेखा से पूछा गया कि क्या उन्हें कभी इस बात का दुख हुआ कि उनके पिता ने उन्हें पहचानने या स्वीकार करने की कोशिश नहीं की, तो उन्होंने कहा था- शायद मैंने उस दर्द को दबा दिया था। बचपन में मेरी दुनिया होमवर्क, पढ़ाई और भाई-बहनों के बीच खुद की तुलना जैसी छोटी-छोटी चीजों तक सीमित थी। मुझे यह जरूर लगता था कि शायद पिता की कमी थी, लेकिन मैंने कभी पिता का प्यार करीब से महसूस ही नहीं किया था।
रेखा ने यह भी बताया था- बचपन का काफी समय मैंने अपनी दादी और मौसी के साथ बिताया। मां अक्सर फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त रहती थीं। उनके जीवन में कोई मजबूत पुरुष रोल मॉडल भी नहीं था। उस दौर में मैं जिसे सबसे ज्यादा मानती थीं, वह भगवान थे। बाद में फिल्ममेकर मोहन सहगल मेरे जीवन में एक पिता जैसी शख्सियत बनकर आए। फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने मेरी बहुत मदद की है।
रेखा ने यह भी बताया था कि उनका फिल्मी सफर कुछ परिस्थितियों की वजह से ही शुरू हुआ था। परिवार की आर्थिक परेशानियों और भाई-बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारी के चलते उन्होंने मां के कहने पर फिल्मों में काम करना शुरू किया। शुरुआत में यह सिर्फ एक फिल्म तक सीमित रहने वाला काम था। लेकिन ‘अंजाना सफर’ से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे लंबे और यादगार करियर में बदल गया।