
मनोरंजन डेस्क। बॉलीवुड में गाने बनाने के लिए बड़े-बड़े स्टूडियो, घंटों की रिकॉर्डिंग और कई दिनों की तैयारी होती है। लेकिन कभी-कभी किसी गाने के पीछे की कहानी इतनी दिलचस्प होती है कि वह फिल्म के सीन पर भी भारी पड़ जाती है। शाहरुख खान की फिल्म ‘स्वदेस’ का गाना ‘पल पल है भारी’ भी कुछ ऐसा ही है।
साल 2004 में रिलीज हुई इस फिल्म में गाना रामलीला के एक दृश्य का हिस्सा था। इसमें सीता बनीं गायत्री जोशी और रावण के बीच संवाद के जरिए राम के प्रति सीता की आस्था दिखाई गई थी। लेकिन इस गाने को तैयार करने के लिए गानेकार जावेद अख्तर, संगानेकार एआर रहमान और गायिका मधुश्री को जिस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, उसकी कहानी कम ही लोगों को पता है।
इस गाने की कहानी शुरू होती है डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर के एक जरूरी फोन से। जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि गोवारिकर ने उन्हें महाराष्ट्र के वाई में फिल्म के सेट पर बुलाया था। एआर रहमान को दो दिन बाद विदेश जाना था और गाने की रिकॉर्डिंग उससे पहले करनी थी।
जावेद अख्तर ने कहा था- समस्या यह थी कि गाने का सब्जेक्ट साधारण नहीं था। दृश्य में रावण सीता से सवाल करता है कि वह राम से इतना प्रेम क्यों करती हैं, जबकि राम उस समय उनकी मदद के लिए वहां मौजूद नहीं हैं। सीता को अपने जवाबों से राम के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करनी थी।
जावेद अख्तर ने बताया कि वह इस जिम्मेदारी को लेकर परेशान हो गए थे। उन्होंने रात में जल्दी सोने की कोशिश की और सुबह करीब पांच बजे उठकर लिखना शुरू किया। इसके बाद महज दो घंटे में गाने के बोल तैयार हो गए। हैरानी की बात यह थी कि खुद अख्तर को समझ नहीं आया कि इतनी जल्दी यह गाने कैसे लिख गया।
अब बारी थी गाने को आवाज देने की। लेकिन इसके लिए कोई बड़ा रिकॉर्डिंग स्टूडियो नहीं, बल्कि होटल के कमरे का इस्तेमाल किया गया।
सिंगर मधुश्री ने एक इंटरव्यू में बताया कि एआर रहमान ने उन्हें अचानक रिकॉर्डिंग के लिए बुलाया था। शूटिंग अगले दिन होनी थी, इसलिए गाने को तुरंत रिकॉर्ड करना जरूरी था। करीब सात से आठ मिनट लंबे इस गाने में तीन रागों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे इसे गाना आसान नहीं था।
रिकॉर्डिंग के दौरान कमरे में करीब 20 से 25 लोग मौजूद थे। सामने शाहरुख खान बैठे थे, वहीं जावेद अख्तर और आशुतोष गोवारिकर भी वहां मौजूद थे। इतने लोगों के सामने गाते हुए मधुश्री घबरा गईं। खासकर ‘विपदा’ शब्द का उच्चारण करने में उन्हें परेशानी हो रही थी। जावेद अख्तर के चेहरे के भाव देखकर उनकी घबराहट और बढ़ जाती थी। यह देखकर एआर रहमान ने ब्रेक लिया और मधुश्री की कुर्सी दूसरी तरफ घुमा दी, ताकि उन्हें सामने बैठे लोगों को देखकर दबाव महसूस न हो। इसके बाद उन्होंने गाना पूरा किया।
इस गाने से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा है। गाने में रावण के हिस्से को आवाज देने के लिए एक कलाकार आने वाला था, लेकिन वह नहीं पहुंच सका। ऐसे में डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने खुद रावण के संवादों को आवाज दी।
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