• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • लाइफस्टाइल

3,000 लड़ाकों के साथ हिला दी थी ब्रिटिश सत्ता की नींव! जानिए 1857 के आदिवासी योद्धा जिनकी गाथा अब आई सामने

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपने अदम्य साहस से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिलाने वाले अमर जनजातीय क्रांतिवीर सीताराम कंवर की अनसुनी गाथा मध्य प्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार में संरक्षित 168 वर्ष पुराने दुर्लभ दस्तावेज से उजागर हुई है।

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 08:59:49 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 08:59:49 PM (IST)
3,000 लड़ाकों के साथ हिला दी थी ब्रिटिश सत्ता की नींव! जानिए 1857 के आदिवासी योद्धा जिनकी गाथा अब आई सामने

लाइफस्टाइल डेस्क। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857 की क्रांति) में अपने प्राणों की आहुति देने वाले कई ऐसे जनजातीय योद्धा रहे हैं, जिनका बलिदान इतिहास के पन्नों में कहीं ओझल हो गया। ऐसे ही एक महान आदिवासी क्रांतिवीर सीताराम कंवर की अदम्य वीरता का प्रमाण मध्य प्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय में संरक्षित 168 वर्ष पुराने दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज (विज्ञप्ति) से उजागर हुआ है।

कंवर जनजाति से आने वाले क्रांतिकारी सीताराम कंवर ने निमाड़ अंचल में अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दी थीं। उन्हें पकड़ने के लिए तत्कालीन ब्रिटिश प्रभाव वाले होलकर दरबार ने 200 रुपये का नकद इनाम घोषित किया था। 3,000 लड़ाकों की सेना के साथ अंग्रेजों से लोहा लेते हुए यह वीर योद्धा 9 अक्टूबर 1858 को रणभूमि में बलिदान हुआ था।


होलकर रियासत की ऐतिहासिक विज्ञप्ति में क्या था दर्ज?

वर्ष 1858 में होलकर रियासत द्वारा ब्रिटिश हुकूमत के फरमान पर जारी इस विज्ञप्ति में सीताराम कंवर की गतिविधियों और उनके बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। विज्ञप्ति के अनुसार:

  • अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध मोर्चा: पत्र में लिखा गया था कि सीताराम कंवर ने सरकार के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है और वे महान क्रांतिकारी भीमा नायक तथा ख्वाजा नायक के साथ मिल गए हैं।
  • जनजातीय लामबंदी: सीताराम कंवर ने वीरमन गांव और ताठाबरूड़ अंचल में भील समुदाय और अपनी कंवर जाति के लोगों को संगठित किया।
  • 3,000 लड़ाकों के साथ युद्ध: उन्होंने लगभग 3,000 लड़ाकों की एक मजबूत क्रांतिकारी सेना तैयार कर निमाड़ क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध सीधा मोर्चा खोल दिया था।
  • होलकर सेना में विद्रोह की चिंगारी: सीताराम कंवर ने न केवल जनजातीय समाज को क्रांति से जोड़ा, बल्कि होलकर दरबार के सिपाहियों को भी ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध बगावत के लिए प्रेरित किया था।

कैसे सामने आया यह ऐतिहासिक दस्तावेज?

इस विस्मृत स्वतंत्रता सेनानी के इतिहास को पुनर्जीवित करने का श्रेय आदिवासी समाज के निरंतर प्रयासों को जाता है:

अखिल भारतीय कंवर आदिवासी विकास समिति (शहडोल) के सदस्य अशोक कंवर ने बड़वानी के करंजा चौक स्थित बलिदानी स्मारक में सीताराम कंवर का नाम अंकित कराने के लिए जिला प्रशासन से मांग की थी।

प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक साक्ष्य मांगे जाने पर उन्होंने 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' को पत्र लिखा, जहां से मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग को खोजबीन के निर्देश जारी हुए।

पुरातत्व अभिलेखागार में गहन शोध के बाद होलकर रियासतकालीन हस्तलिखित दस्तावेज खोज निकाले गए।

यह मूल विज्ञप्ति मराठी भाषा और मोड़ी लिपि में दर्ज थी। पुरातत्व संचालनालय के भाषा विशेषज्ञ सैयद नईमुद्दीन ने इसका हिंदी में प्रामाणिक अनुवाद किया। इसके उपरांत पुरालेख अधिकारी पदम सिंह मीणा द्वारा सत्यापित प्रति समाज को उपलब्ध कराई गई।

आधिकारिक पुष्टि

पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि अभिलेखागार में संरक्षित तत्कालीन होलकर रियासत के मोड़ी/मराठी लिपि के मूल अभिलेखों में सीताराम कंवर के क्रांतिकारी संघर्ष, उनकी गिरफ्तारी के लिए घोषित इनाम और उनकी वीरता का संपूर्ण व प्रामाणिक ब्योरा दर्ज है।

9 अक्टूबर 1858 को मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी सीताराम कंवर का यह आधिकारिक साक्ष्य न केवल जनजातीय इतिहास का गौरव बढ़ाता है, बल्कि 1857 के जनक्रांति आंदोलन में आदिवासी समाज के सर्वोच्च योगदान को भी ऐतिहासिक रूप से रेखांकित करता है।

यह भी पढ़ें- महुआ, जंगल की पत्तियां और मशरूम… बस्तर के आदिवासी खानपान में क्यों खास हैं जंगल के ये स्वाद?

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।