
लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय थाली में रोटी सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि सेहत की मजबूत नींव भी मानी जाती है। आमतौर पर लोग गेहूं की रोटी तक ही सीमित रहते हैं, जबकि अलग-अलग अनाजों से बनी रोटियां शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व देती हैं।
अगर इन रोटियों को सही तरीके से डाइट में शामिल किया जाए तो हड्डियों के दर्द, खून की कमी, वजन बढ़ना या पाचन से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
गेहूं की रोटी फाइबर और विटामिन-बी का अच्छा स्रोत है, जो शरीर को ऊर्जा देती है। हालांकि अधिक मात्रा में सेवन करने से वजन और ब्लड शुगर बढ़ सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि गेहूं को सीमित मात्रा में या अन्य अनाजों के साथ मिलाकर खाया जाए।
सर्दियों में बाजरे की रोटी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो शरीर को गर्म रखते हैं। यह खून की कमी दूर करने, आंखों की रोशनी बढ़ाने और अस्थमा के मरीजों को राहत देने में मदद करती है। साथ ही यह ब्लड शुगर को संतुलित रखने में भी सहायक है।
वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ज्वार की रोटी अच्छा विकल्प है। यह कम कैलोरी वाली और ग्लूटेन-फ्री होती है। इसे खाने से पाचन बेहतर रहता है और दिल की सेहत को भी फायदा मिलता है।
रागी को कैल्शियम का पावरहाउस कहा जाता है। रागी की रोटी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसमें मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।
सर्दियों में मक्के की रोटी और सरसों का साग स्वाद के साथ सेहत भी देता है। मक्के की रोटी विटामिन-ए से भरपूर होती है, जो शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देती है। हालांकि यह थोड़ी भारी होती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में खाना बेहतर रहता है।
एक ही तरह की रोटी खाने के बजाय अगर इन 5 तरह की रोटियों को डाइट में शामिल किया जाए, तो शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनाजों में विविधता से न सिर्फ बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि ओवरऑल हेल्थ भी बेहतर रहती है।