
लाइफस्टाइल डेस्क। रेट्रो ने युवाओं को अतीत की तस्वीरों में पहुंचाया था, अब गणेशोत्सव का एआई ट्रेंड उसी तकनीक को भक्ति के रंग में रंग रहा है- यानी टाइम मशीन वही है, बस इस बार मंजिल बप्पा का दरबार है। गत कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर 80 के दशक की यादें ताजा कर रहा एआई रेट्रो ट्रेंड अब पीछे छूटता नजर आ रहा है।
बड़े बाल, विंटेज चश्मा, पुराने जमाने का बैकग्राउंड और 1980 के दशक के फिल्मी अंदाज वाली तस्वीरों के बाद गणेशोत्सव ने एआई ट्रेंड को नया रंग दे दिया है।
जबलपुर में भी युवा और स्टूडेंट्स अब अपनी तस्वीरों के बजाय बप्पा के साथ डिजिटल पोर्ट्रेट तैयार कराने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। गणेशोत्सव के दौरान सोशल मीडिया पर एआई से तैयार गणेशजी की तस्वीरों की बाढ़ सी आ गई है।
साधारण फोटो को एआई टूल में अपलोड कर उसमें गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा, फूलों से सजा पंडाल, आरती की थाली, दीपों की रोशनी और सिनेमैटिक लाइटिंग जोड़ने के लिए अलग-अलग प्राम्प्ट दिए जा रहे हैं। नतीजा ऐसी तस्वीरों के रूप में सामने आ रहा है, जो पारंपरिक भक्ति और आधुनिक डिजिटल क्रिएटिविटी का मेल हैं।

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शहर के गणेश पंडालों और घरों में सजाए गए बप्पा की झलक अब डिजिटल क्रिएशन में भी दिखाई दे रही है। युवा एआई की मदद से खुद को कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता या साड़ी जैसे पारंपरिक परिधानों में दिखा रहे हैं। बैकग्राउंड में भव्य गणेश प्रतिमा और रोशनी से सजा पंडाल जोड़ा जा रहा है। कुछ क्रिएशन में ऐसा प्रभाव दिया जा रहा है, मानो तस्वीर किसी फिल्म के भक्ति गीत का सीन हो।
एआई टूल्स ने युवाओं के लिए फोटो क्रिएशन को प्रयोग का नया मैदान बना दिया है। एक ही तस्वीर से बप्पा से आशीर्वाद लेते हुए पोर्ट्रेट, बप्पा के आगमन से जगमगाते आंगन का दृश्य, गणेशजी के दिव्य तेज के साथ क्लोजअप और पंडाल में आरती करते हुए सिनेमैटिक फ्रेम तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इसके लिए फोटोग्राफी स्टूडियो या लंबी एडिटिंग की जरूरत नहीं पड़ रही, बल्कि सही निर्देश यानी प्राम्प्ट से कुछ ही समय में अलग-अलग विजुअल तैयार हो रहे हैं।
एआई से बनी तस्वीरें मनोरंजन और क्रिएटिविटी का माध्यम हैं, लेकिन इन्हें वास्तविक फोटो समझकर साझा करने से बचना चाहिए। खासकर किसी धार्मिक आयोजन, व्यक्ति व स्थान की एआई-निर्मित तस्वीर पोस्ट करते समय उसे यह स्पष्ट करना बेहतर है कि वह एआई निर्मित है। वहीं किसी व्यक्ति की तस्वीर को उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करना या भ्रामक दृश्य तैयार करना डिजिटल जिम्मेदारी के खिलाफ हो सकता है।