
लाइफस्टाइल डेस्क। मौसम में बदलाव के साथ गले में संक्रमण की समस्या बढ़ने लगती है। इस दौरान वातावरण में मौजूद विभिन्न प्रकार के वायरस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर गले को संक्रमित कर सकते हैं। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें संक्रमण होने की आशंका अधिक रहती है।
गले में दर्द, खराश, सूजन, बुखार और निगलने में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई बार आवाज में भारीपन और खांसी की समस्या भी होने लगती है।
गले में संक्रमण होने पर सबसे पहले उसकी साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है। दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं और गुनगुने पानी से गरारे करें। इससे गले को आराम मिल सकता है। रात में सोने से पहले मीठा खाने या दूध पीने के बाद ब्रश करना चाहिए।

इस दौरान बहुत ज्यादा तली-भुनी और मसालेदार चीजों से परहेज करें। भोजन में मौसमी फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक आहार शामिल करें। पर्याप्त नींद लें और धूम्रपान या धुएं के संपर्क से बचें। संक्रमण के दौरान दूसरों के साथ खाने-पीने की चीजें साझा न करें और खांसते-छींकते समय मुंह ढकें।
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डाॅ. यामिनी गुप्ता, नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ का कहना है कि अधिकांश वायरल संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, निगलने में अत्यधिक दिक्कत या गले में लगातार दर्द होने पर ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
बिना चिकित्सकीय सलाह एंटीबायोटिक दवाएं न लें, क्योंकि वायरल संक्रमण में इनका लाभ नहीं होता। समय पर जांच और सही देखभाल से गले की परेशानी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।