
लाइफस्टाइल डेस्क। 28 सितंबर को विश्व रैबीज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य, इस जानलेवा लेकिन 100 फीसदी रोकी जा सकने वाली बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। शहर में आवारा कुत्तों, बंदरों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। रैबीज एक बार हो जाए तो मौत निश्चित है, लेकिन समय पर टीका लग जाए तो जान बच जाती है।
रैबीज एक वायरल बीमारी है जो रैबडो वायरस से होती है। जब रैबीज से संक्रमित जानवर किसी व्यक्ति को काटता है या उसके घाव पर चाटता है तो उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। यह वायरस नसों के रास्ते दिमाग तक पहुंचता है और दिमाग में सूजन पैदा करता है। लक्षण आने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है।
सबसे ज्यादा खतरा कुत्तों से होता है। देश में 95 फीसदी रैबीज के मामले कुत्तों के काटने से होते हैं। इसके अलावा बिल्ली, बंदर, लोमड़ी, सियार, नेवला, चमगादड़ और खरगोश के काटने से भी रैबीज हो सकता है। गाय, भैंस जैसे पालतू पशु भी अगर संक्रमित जानवर के संपर्क में आएं तो उनसे भी इंसान में संक्रमण फैल सकता है। यह ध्यान रहे कि चूहे, गिलहरी या पक्षियों के काटने से रैबीज नहीं होता।
काटने के 1 से 3 महीने में लक्षण दिख सकते हैं। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, घाव वाली जगह पर झुनझुनाहट और बेचैनी होती है। बाद में पानी से डर लगना, हवा से डर लगना, निगलने में तकलीफ, घबराहट और दौरा पड़ना जैसे लक्षण आते हैं।
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1. तुरंत करें: घाव को तुरंत 15 मिनट तक बहते साफ पानी और साबुन से धोएं। यह सबसे जरूरी कदम है, इससे 70 फीसदी वायरस निकल जाता है। इसके बाद बीटाडीन लगाएं।
2. यह बिल्कुल न करें: घाव पर मिर्च, हल्दी, चूना, टूथपेस्ट या कोई जड़ी-बूटी न लगाएं। घाव को बांधें नहीं और टांके तुरंत न लगवाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद न करें।
3. डॉक्टर के पास जाएं: घाव धोने के बाद तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचें।
अब पहले की तरह पेट में 14 इंजेक्शन नहीं लगते। अब बांह में 4 से 5 इंजेक्शन का कोर्स होता है। भारत सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार इंट्राडर्मल रैबीज वैक्सीन 0, 3, 7 और 28वें दिन लगाई जाती है। अगर काटा गहरा है, खून निकला है या चेहरे, गर्दन पर काटा है तो एंटी रैबीज सीरम भी घाव में ही लगाया जाता है। यह सुविधा मेडिकल कालेज में उपलब्ध है। टीका सभी सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह मुफ्त है। निजी में इसका एक डोज 350 से 500 रुपये का पड़ता है और पूरा कोर्स 2000 रुपये तक महंगा हो सकता है।
नगर में 24 घंटे की व्यवस्था है। अक्सर लोग रविवार या अवकाश के दिन काटने पर घबरा जाते हैं कि कहां जाएं। नगर में एंटी रैबीज टीकाकरण 365 दिन चलता है।
1. नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कालेज अस्पताल : यहां एंटी रैबीज क्लिनिक 24 घंटे इमरजेंसी में काम करता है। रात में भी इमरजेंसी ओपीडी में टीका लग जाएगा।
2. जिला अस्पताल : यहां भी रोजाना सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और इमरजेंसी में रात में भी टीका उपलब्ध है।
3. सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : गोसलपुर, पनागर, सिहोरा, बरगी सहित सभी सीएचसी में टीका उपलब्ध है।
जिले में एंटी रैबीज वैक्सीन का पर्याप्त स्टाक है। किसी भी जानवर के काटने को हल्के में न लें। घाव धोकर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। एक सही कदम आपकी जान बचा सकता है।
नवीन कोठारी, सीएमएचओ