
हेल्थ डेस्क। नवरात्रि में गरबा और डांडिया की धूम रहती है। रंग-बिरंगे कपड़े, संगीत और घंटों तक घूमते हुए डांस करना लोगों के लिए उत्सव का खास हिस्सा है। गरबा एक अच्छी फिजिकल एक्टिविटी भी है, लेकिन लगातार घूमना, अचानक मुड़ना और बिना तैयारी के तेज डांस करना कभी-कभी कमर और गर्दन पर दबाव बढ़ा सकता है।
लंबे समय तक डांस करने के बाद मांसपेशियों में थकान या हल्का दर्द होना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहे, हाथ-पैरों में झनझनाहट होने लगे या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मामलों में ये लक्षण रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या या स्लिप डिस्क का संकेत हो सकते हैं।
हालांकि, डांस के बाद होने वाला हर कमर दर्द स्लिप डिस्क नहीं होता। मांसपेशियों में खिंचाव और दूसरी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए लक्षणों की अवधि और गंभीरता को समझना जरूरी है।
रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देती है और हमें झुकने, घूमने और मुड़ने में मदद करती है। इसके अलग-अलग हिस्सों के बीच इंटरवर्टिब्रल डिस्क होती हैं, जो कुशन की तरह काम करती हैं और गतिविधियों के दौरान पड़ने वाले दबाव को सहने में मदद करती हैं।
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तेज गति से डांस करता है, बार-बार शरीर को घुमाता है या अचानक झटके के साथ मुड़ता है, तो कमर और गर्दन की मांसपेशियों तथा लिगामेंट पर दबाव पड़ सकता है। थकान के कारण शरीर का संतुलन बिगड़ने पर चोट का जोखिम भी बढ़ सकता है।
स्लिप डिस्क ऐसी स्थिति है, जिसमें रीढ़ की दो हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क का अंदरूनी हिस्सा उसकी बाहरी परत के कमजोर या क्षतिग्रस्त हिस्से से बाहर की ओर निकलने लगता है। इससे आसपास की नस पर दबाव या जलन हो सकती है। ऐसे में कमर दर्द के साथ पैर तक दर्द पहुंच सकता है। गर्दन की डिस्क प्रभावित होने पर दर्द कंधे या हाथ तक जा सकता है।
1. कमर या गर्दन में लगातार दर्द
लंबे समय तक डांस करने के बाद हल्का मांसपेशियों का दर्द आराम करने पर धीरे-धीरे कम हो सकता है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या बार-बार लौटे, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
अगर दर्द के कारण झुकने, खड़े होने, चलने या रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल डांस की थकान मानकर न टालें।
2. कमर से पैर या गर्दन से हाथ तक दर्द पहुंचना
अगर कमर से शुरू होकर दर्द कूल्हे, जांघ या पैर तक पहुंच रहा है, तो इसकी वजह नस में जलन या दबाव हो सकती है। इसी तरह गर्दन की समस्या के कारण दर्द कंधे और हाथ तक फैल सकता है।
ऐसा दर्द स्लिप डिस्क समेत कई स्थितियों में हो सकता है। सही कारण जानने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है।
3. हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
हाथ, उंगलियों, पैरों या तलवों में सुई चुभने जैसा एहसास, झनझनाहट या संवेदना कम होना नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।
अगर डांस के बाद ऐसे लक्षण बने रहते हैं या बार-बार होते हैं, तो डांस जारी रखने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
4. मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना
अगर पैर उठाने में परेशानी होने लगे, चलते समय पंजा जमीन पर घिसटने लगे या हाथ से चीजें पकड़ने की ताकत कम महसूस हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
नई या बढ़ती हुई कमजोरी नसों पर दबाव का संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में जल्द मेडिकल जांच कराना जरूरी है।
5. घूमने या झुकने पर तेज दर्द होना
गरबा में बार-बार घूमना और शरीर को मोड़ना पड़ता है। अगर किसी खास दिशा में घूमने, झुकने या उठने-बैठने पर तेज या झटके जैसा दर्द होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
इसका कारण मांसपेशियों में खिंचाव भी हो सकता है, लेकिन दर्द लगातार बना रहे या बढ़े तो जांच जरूरी है। दर्द होने पर उसी मूवमेंट को बार-बार करके खुद को परखने की कोशिश न करें।
6. दर्द के कारण नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित होना
अगर कमर या गर्दन के दर्द के कारण रात में सोना मुश्किल हो रहा है, लंबे समय तक बैठ नहीं पा रहे हैं या सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।
खासकर तब, जब आराम करने के बाद भी दर्द कम न हो या उसके साथ दूसरे लक्षण दिखाई दें।
7. पेशाब या मल पर नियंत्रण में बदलाव और जांघों के बीच सुन्नपन
यह सबसे गंभीर चेतावनी है। कमर दर्द के साथ अगर अचानक पेशाब करने में परेशानी हो, पेशाब या मल पर नियंत्रण खोने लगे, जांघों के बीच या गुप्तांगों के आसपास सुन्नपन हो अथवा पैरों की कमजोरी तेजी से बढ़े, तो यह रीढ़ के निचले हिस्से की नसों पर गंभीर दबाव का संकेत हो सकता है।
ऐसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें। अगले दिन तक इंतजार न करें और न ही इसे सामान्य मांसपेशियों का दर्द समझें।
यह भी पढ़ें- लड़कियों में बढ़ रहे हैं पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम PCOS के मामले, कारण अनुवांशिक भी और जीवनशैली भी