
लाइफस्टाइल डेस्क। किशोरावस्था में पहुंचते ही लड़कियों में पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के मामले बढ़ रहे हैं। इसके कारण अनियमित महावारी, अचानक वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। पीसीओएस के पीछे आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं।
लेकिन जीवनशैली का इसमें महत्वपूर्ण योगदान है। करीब 30 से 40 प्रतिशत किशोरियों में सामने आने वाली इस समस्या को नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और स्वस्थ दिनचर्या के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
किशोरियों को जंक फूड, अत्यधिक तला-भुना और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है।
मासिक चक्र में लगातार अनियमितता या तेजी से वजन बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना चाहिए। इस उम्र में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
पीसीओडी हार्मोन से जुड़ी समस्या है, जीवनशैली पर ध्यान ना दिया तो यह शुगर भी बन सकता है

तनाव, चिंता और अवसाद के पीछे पढ़ाई का दबाव, पियर प्रेशर और सामाजिक अपेक्षाएं बड़ी वजह बन रही हैं। Dr. अनुपमा दवे, स्त्री रोग विशेषज्ञ देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना और लंबे समय तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है।
इससे नींद की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। किशोरियों के लिए नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, व्यायाम, संतुलित भोजन और परिवार के साथ खुलकर बातचीत बेहद जरूरी है।