
लाइफस्टाइल डेस्क। टाइप-2 डायबिटीज में खाने के बाद बढ़ने वाले शुगर को कंट्रोल करने का सबसे असरदार तरीका आपकी मांसपेशियों में ही छिपा है। शरीर की स्केलेटल मसल्स खून में मौजूद 70 से 80% शुगर को खुद सोखने की क्षमता रखती हैं।
दरअसल, डायबिटीज में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण कोशिकाएं इंसुलिन का संकेत नहीं सुनतीं। लेकिन जब आप चलते हैं, व्यायाम करते हैं तो मांसपेशियों का संकुचन इंसुलिन के बिना ही जीएलयूटी4 को सक्रिय कर देता है। इसे इंसुलिन-इंडिपेंडेंट पाथवे कहते हैं।
यानी मांसपेशियां स्पंज की तरह शुगर सोखकर ऊर्जा में बदल देती हैं। इसके लिए योग में वीरभद्रासन, सूर्य नमस्कार, जिम में स्क्वैट्स, तैराकी या बैडमिंटन-फुटबाल जैसे खेल मददगार हैं।
Dr. तनुश्री खंडईत, जनरल फिजिशियन के अनुसार इनका असर 24 से 48 घंटे तक इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाए रखता है। वजन में 5 से 10% कमी से लिवर की चर्बी घटती है और इंसुलिन फिर सक्रिय हो जाता है। नियम बनाएं, खाने के 20 से 30 मिनट बाद 15 मिनट वॉक, स्ट्रेचिंग या सीढ़ियां चढ़ें।
फिटनेस का मतलब सिर्फ वजन नियंत्रित होना नहीं है। असली फिटनेस तब मानी जाएगी, जब-
उम्र के अनुसार रोजमर्रा के काम आसानी से कर सकें।
40-60 वर्ष की उम्र में कई दवाओं पर निर्भर न हों।
दिन में खुलकर हंसें और रात में सुकून की नींद लें।
तनाव, शिकायत और नकारात्मक सोच को खुद पर हावी न होने दें।
35 मिनट में करीब तीन किमी पैदल चलें।
चलते समय सीने में दर्द, भारीपन या सांस फूलने के कारण रुकना न पड़े।
चलने के बाद अत्यधिक थकान महसूस न हो।
यदि ऐसा हो रहा है तो हृदय की कार्यक्षमता सामान्य हो सकती है। हालांकि किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।