
हेल्थ डेस्क। जब ब्लड शुगर की बात आती है तो अक्सर सबसे पहले मिठाई और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले खाने को जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आप कितने घंटे सोते हैं, इसका असर भी ब्लड शुगर पर पड़ सकता है?
रिसर्च में लगातार कम या खराब नींद और शरीर की इंसुलिन के प्रति रेजिस्टेंस में कमी के बीच संबंध पाया गया है। यानी समस्या सिर्फ यह नहीं है कि आपने रात में मिठाई खाई या नहीं, बल्कि यह भी है कि आप रोजाना कितनी और कैसी नींद ले रहे हैं।
हालांकि, एक जरूरी अंतर समझना होगा। एक मिठाई खाने से ब्लड ग्लूकोज आमतौर पर कुछ समय के लिए बढ़ता है, जबकि लगातार खराब नींद शरीर के ग्लूकोज रेगुलेशन को लंबे समय तक प्रभावित कर सकती है।
नींद के दौरान शरीर कई ऐसे हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़े काम करता है, जो ग्लूकोज कंट्रोल में भूमिका निभाते हैं।
जब नींद लगातार कम होती है, तो शरीर की इंसुलिन रेजिस्टेंस कम हो सकती है। इसका मतलब है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति उतनी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं देतीं। ऐसे में सामान्य ब्लड शुगर बनाए रखने के लिए शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है।
कुछ रिसर्च में कुछ ही रातों की नींद सीमित होने के बाद इंसुलिन रेजिस्टेंस में बदलाव देखे गए हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़ सकती है।
नींद की कमी शरीर के तनाव से जुड़े सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है। खराब नींद के दौरान कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। कॉर्टिसोल शरीर को ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए लिवर से ज्यादा ग्लूकोज रक्त में छोड़ने को प्रेरित करता है। इसके साथ इंसुलिन की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि कुछ लोगों में खराब नींद के बाद सुबह का फास्टिंग ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा दिखाई दे सकता है।
खराब नींद का असर केवल हार्मोन और ब्लड शुगर तक सीमित नहीं रहता। इसका असर भूख और खाने की इच्छा पर भी पड़ सकता है। नींद पूरी न होने पर भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन में बदलाव हो सकते हैं। इसके कारण अगले दिन ज्यादा भूख लग सकती है और हाई-कैलोरी या मीठे-तले खाने की इच्छा बढ़ सकती है।
यानी खराब नींद का असर दो स्तर पर हो सकता है- शरीर के ग्लूकोज रेगुलेशन पर सीधा असर और ज्यादा खाने के जरिए अप्रत्यक्ष असर।
लगातार बहुत कम नींद लेना टाइप-2 डायबिटीज के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। वहीं, ज्यादातर वयस्कों के लिए आमतौर पर 7 से 9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है। सिर्फ घंटे ही जरूरी नहीं हैं। अगर कोई व्यक्ति 8 घंटे बिस्तर पर रहता है लेकिन बार-बार जागता है, उसकी नींद बहुत टूटती है या उसकी नींद की गुणवत्ता खराब है, तो इसका असर भी पड़ सकता है।
ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया इसका एक उदाहरण है। इसमें सोते समय सांस बार-बार रुक सकती है और फिर शुरू हो सकती है। यह स्थिति इंसुलिन रेजिस्टेंस और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी से जुड़ी हुई है।
मान लीजिए आपने खाना खाने के बाद एक छोटा dessert खाया। इससे ब्लड ग्लूकोज कुछ समय के लिए बढ़ सकता है। यह बढ़ोतरी कितनी होगी, यह मिठाई की मात्रा, उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और आपने उसके साथ क्या खाया है, इन चीजों पर निर्भर करता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति रोजाना सिर्फ 5-6 घंटे सोता है, तो मामला अलग है।
लगातार नींद की कमी इंसुलिन रेजिस्टेंस, तनाव हार्मोन, भूख और शरीर के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय में यह मेटाबॉलिक हेल्थ पर ज्यादा जरूरी असर डाल सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि मिठाई का ब्लड शुगर पर कोई असर नहीं होता। बल्कि दोनों का असर अलग तरीके से होता है। एक मिठाई से होने वाली ग्लूकोज बढ़ोतरी को लगातार खराब नींद के प्रभाव के बराबर नहीं माना जा सकता।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज या प्रीडायबिटीज है, तो खराब नींद ब्लड शुगर मैनेजमेंट को और मुश्किल बना सकती है। कुछ लोगों में नींद खराब होने के बाद फास्टिंग ग्लूकोज बढ़ सकता है या दिनभर ब्लड शुगर में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
ऐसे में सिर्फ दवा या डाइट पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं हो सकता। नींद, शारीरिक गतिविधि, खान-पान और डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार- सभी मिलकर डायबिटीज मैनेजमेंट का हिस्सा हैं।
नींद सुधारने के लिए कुछ आसान आदतों पर ध्यान दिया जा सकता है-
अगर कोई व्यक्ति बहुत तेज खर्राटे लेता है, सोते समय सांस रुकने की बात परिवार के लोग बताते हैं, सुबह सिरदर्द रहता है, रात में बार-बार नींद खुलती है या दिनभर बहुत ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इन लक्षणों के पीछे स्लीप एपनिया जैसी नींद की समस्या हो सकती है, जिसका सही समय पर आकलन और उपचार जरूरी है।
एक दिन कम सो लेने से यह मान लेना सही नहीं है कि आपकी ब्लड शुगर निश्चित रूप से बढ़ जाएगी। इसी तरह एक मिठाई खाने को भी मेटाबॉलिक हेल्थ की पूरी तस्वीर नहीं माना जा सकता। लेकिन अगर खराब नींद आपकी रोज की आदत बन गई है, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर की ग्लूकोज कंट्रोल करने की क्षमता, भूख और हार्मोनल संतुलन के लिए जरूरी है।
इसलिए ब्लड शुगर को स्वस्थ रखने की कोशिश में प्लेट में क्या है, इसके साथ यह भी देखिए कि रात में बिस्तर पर कितने घंटे और कितनी अच्छी नींद मिल रही है।
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