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छठ का 36 घंटे का निर्जला व्रत शरीर पर क्या असर डालता है? जानिए कब बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन और कमजोरी का खतरा

लोक आस्था के महापर्व छठ में रखा जाने वाला लगभग 36 घंटे का निर्जला उपवास धार्मिक अनुशासन के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है। खरना के प्रसाद के बाद से उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक पानी और भोजन से पूरी तरह दूर रहने पर शरीर ऊर्जा के लिए पहले से संचित ग्लाइकोजन पर निर्भर हो जाता है।

By Digital DeskEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 07:57:23 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 07:57:23 PM (IST)
छठ का 36 घंटे का निर्जला व्रत शरीर पर क्या असर डालता है? जानिए कब बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन और कमजोरी का खतरा

लाइफस्टाइल डेस्क। छठ पूजा को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस पर्व में व्रती करीब 36 घंटे तक निर्जला उपवास रखते हैं। यानी इस दौरान न कुछ खाया जाता है और न ही पानी पिया जाता है। व्रत की शुरुआत खरना के बाद होती है और इसका समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। धार्मिक आस्था के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से शरीर के लिए यह चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। खासकर तब, जब मौसम में ठंडक बढ़ रही हो, दिनचर्या व्यस्त हो और व्रती को लगातार काम भी करना पड़ रहा हो। ऐसे में सवाल उठता है कि 36 घंटे तक पानी और भोजन न लेने से शरीर में क्या बदलाव होते हैं? क्या इससे डिहाइड्रेशन हो सकता है और किन लोगों को यह व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए?

36 घंटे तक पानी न मिलने पर शरीर में क्या होता है?

हमारा शरीर सामान्य रूप से पानी के जरिए तापमान नियंत्रित करता है, पाचन में मदद लेता है और खून के संचार सहित कई जरूरी काम करता है। जब लंबे समय तक पानी नहीं मिलता, तो शरीर में पानी की कमी होने लगती है। इसे डिहाइड्रेशन कहा जाता है।


शुरुआत में प्यास लगना, मुंह सूखना और पेशाब कम आना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। धीरे-धीरे सिरदर्द, थकान, चक्कर आना और कमजोरी भी महसूस हो सकती है। शरीर में पानी की कमी बढ़ने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता है। ऐसे में अचानक खड़े होने पर आंखों के सामने अंधेरा छाना या बेहोशी जैसी स्थिति भी बन सकती है।

निर्जला व्रत के दौरान शरीर को भोजन से मिलने वाली ऊर्जा भी नहीं मिलती। सामान्य परिस्थितियों में शरीर भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज का इस्तेमाल करता है। जब लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो शरीर ऊर्जा के लिए पहले से जमा ग्लाइकोजन का उपयोग करने लगता है। इसके बाद ऊर्जा हासिल करने के लिए शरीर में दूसरे चयापचय बदलाव होते हैं। इस दौरान कुछ लोगों को थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और काम करने की क्षमता में कमी महसूस हो सकती है।

हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, पहले से मौजूद बीमारियों, मौसम, शारीरिक गतिविधि और व्रत से पहले की खानपान संबंधी आदतों पर निर्भर करता है।

ठंड के मौसम में भी डिहाइड्रेशन का खतरा क्यों?

अक्सर लोगों को लगता है कि डिहाइड्रेशन सिर्फ गर्मियों में होता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सर्दियों या ठंडे मौसम में भी शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसकी एक वजह यह है कि ठंड में प्यास कम महसूस होती है। ऐसे में लोग सामान्य दिनों में भी जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पीते।

छठ के दौरान व्रती कई बार पूजा की तैयारी, प्रसाद बनाने, घर की सफाई और घाट तक आने-जाने में व्यस्त रहते हैं। इस दौरान शारीरिक मेहनत बढ़ सकती है। अगर शरीर को पानी नहीं मिल रहा है, तो कमजोरी और चक्कर आने का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसके अलावा, ठंड में बार-बार पेशाब आने की प्रवृत्ति कुछ लोगों में बढ़ सकती है। ऐसे में शरीर से पानी निकलता रहता है, जबकि प्यास कम लगने के कारण उसकी भरपाई नहीं हो पाती। इसलिए यह मानना गलत है कि ठंड में निर्जला व्रत रखने से डिहाइड्रेशन नहीं होगा।

किन लोगों को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

छठ का व्रत आस्था से जुड़ा है, लेकिन हर व्यक्ति का स्वास्थ्य एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों के लिए लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना जोखिम बढ़ा सकता है।

  • डायबिटीज के मरीज: लंबे समय तक भोजन न लेने से ब्लड शुगर बहुत कम या कुछ परिस्थितियों में ज्यादा हो सकती है। इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वालों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है।
  • किडनी के मरीज: किडनी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। पहले से किडनी की बीमारी होने पर पानी न पीना परेशानी बढ़ा सकता है।
  • हृदय रोग और ब्लड प्रेशर के मरीज: कुछ दवाएं और स्वास्थ्य स्थितियां शरीर में पानी तथा नमक के संतुलन को प्रभावित करती हैं। ऐसे लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
  • गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं: इस दौरान शरीर को पानी और पोषण की जरूरत अधिक होती है। निर्जला उपवास रखने से मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
  • बुजुर्ग और कमजोर लोग: उम्र बढ़ने के साथ प्यास महसूस करने की क्षमता कम हो सकती है। ऐसे में शरीर में पानी की कमी का पता देर से चलता है।
  • बुखार, उल्टी-दस्त या किसी संक्रमण से जूझ रहे लोग: बीमारी के दौरान शरीर को पानी और इलेक्ट्रोलाइट की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे में निर्जला व्रत रखना जोखिम भरा हो सकता है।

अगर कोई व्यक्ति नियमित दवाएं लेता है या पहले से किसी बीमारी से पीड़ित है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। दवाओं का समय या खुराक खुद से बदलना भी सही नहीं है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

व्रत के दौरान हल्की थकान महसूस होना और गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षणों में अंतर समझना जरूरी है। अगर बहुत ज्यादा प्यास, मुंह का अत्यधिक सूखना, पेशाब का बहुत कम होना, गहरे पीले रंग का पेशाब, तेज चक्कर या लगातार सिरदर्द हो रहा है, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें।

वहीं, बेहोशी, भ्रम की स्थिति, असामान्य रूप से तेज धड़कन, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। स्वास्थ्य को खतरा होने पर व्रत जारी रखने के बजाय उसे रोकना जरूरी है।

व्रत से पहले और बाद में किन बातों का रखें ध्यान?

व्रत शुरू होने से पहले पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन करना मददगार हो सकता है। खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू होने पर शरीर को पानी नहीं मिलता, इसलिए उससे पहले की तैयारी महत्वपूर्ण है। बहुत ज्यादा नमकीन, तला-भुना या अत्यधिक मीठा भोजन करने से बचें। पूजा की तैयारी के दौरान जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत न करें और जहां संभव हो, आराम करें।

व्रत पूरा होने के बाद भी एकदम से बहुत ज्यादा खाना या पानी पीना ठीक नहीं है। धीरे-धीरे पानी पिएं और हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन लें। यदि कमजोरी, उल्टी या चक्कर जैसे लक्षण बने रहते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

छठ का पर्व सूर्य उपासना, अनुशासन और आस्था का प्रतीक है। लेकिन व्रत की परंपरा निभाने के साथ अपने शरीर के संकेतों को समझना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य को नजरअंदाज करके व्रत पूरा करना आस्था की अनिवार्य शर्त नहीं होनी चाहिए।

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