
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दिवाली की रौनक घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों के बिना अधूरी है। बाजार में मिठाइयों और नमकीन के ढेरों विकल्प मौजूद हैं, लेकिन घर के बने चिवड़े, चकली, अनारसे और लड्डुओं का स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यही वजह है कि त्योहार नजदीक आते ही शहर की महिला उद्यमियों के गृह उद्योगों में कामकाज तेज हो गया है।

किसी के पास चकली और अनारसे के सबसे ज्यादा ऑर्डर हैं, तो कोई चिवड़ा, सेव, गुजिया और मीठे पारे तैयार करने में जुटी है। कोई 10 से 15 किलो सामग्री बना रही है, तो किसी ने 40 किलो अनारसे बनाने का लक्ष्य रखा है। परिवार के सदस्यों के साथ कुछ महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी काम दे रही हैं। इनके लिए दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत को कारोबार में बदलने का खास मौका भी है।

मुक्ता देवलालीकर बताती हैं कि वे बीते पांच-छह सालों से दिवाली के लिए पारंपरिक नाश्ते तैयार कर रही हैं। वैसे तो लोग सभी तरह के पकवानों के आर्डर देते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग चकली और अनारसे की रहती है। इसकी वजह बताते हुए वे कहती हैं कि लोगों को इन दोनों पकवानों का पारंपरिक स्वाद पसंद है।

दुकानों में मिलने वाले उत्पादों में वह स्वाद नहीं मिल पाता, इसलिए लोग खास तौर पर घर के बने चकली और अनारसे खरीदना पसंद करते हैं।
वे बताती हैं, इसके अलावा चिवड़ा, नमकीन, मीठे पारे, लड्डू, सेव और गुजिया की भी अच्छी मांग रहती है। मैं सभी पकवान 10 से 15 किलो तक तैयार कर रही हूं। इस काम में मेरे पति के साथ दीदी और भाभी भी हाथ बंटाती हैं।
दीवाली डेकोरेशन के लिए महिलाएं रील्स से सजावट के आइडिया लेकर फूलों और दीयों से सजा रहीं घर

अरेरा कालोनी निवासी प्रज्ञा औरंगाबादकर बताती हैं कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुई थीं। इसके बाद उन्होंने व्यवसाय श्री गृह उद्योग को शुरू किया।
नौकरी के दौरान जब मैं अपने हाथों से बनी चीजें सहकर्मियों को चखाती थीं, तो अक्सर लोग कहते थे कि मेरे हाथों में जादू है और मुझे इसका काम शुरू करना चाहिए।
सेवानिवृत्ति के बाद मैंने इसी सुझाव को अपने सपने में बदल लिया। वे कहती हैं, मेरा काम सालभर चलता है, लेकिन दिवाली के समय आर्डर काफी बढ़ जाते हैं। मेरे साथ छह महिलाएं काम करती हैं।
खास बात यह है कि ये महिलाएं घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए भी इस काम में सहयोग करती हैं। इस तरह त्योहार के समय उन्हें अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल जाता है।