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दीवाली पर पारंपरिक स्वाद की मांग, चिवड़ा, चकली और अनारसे के सबसे ज्यादा आर्डर

दुकानों में मिलने वाले उत्पादों में वह स्वाद नहीं मिल पाता, इसलिए लोग खास तौर पर घर के बने चकली और अनारसे खरीदना पसंद करते हैं। चिवड़ा, नमकीन, मीठे पारे, लड्डू, सेव और गुजिया की भी अच्छी मांग रहती है।

By Daksha VaidkarEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Thu, 05 Nov 2026 01:41:31 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Nov 2026 02:12:30 PM (IST)
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दीवाली पर पारंपरिक स्वाद की मांग, चिवड़ा, चकली और अनारसे के सबसे ज्यादा आर्डर
भोपाल की अरेरा कॉलोनी स्थित श्री गृह उद्योग में दिवाली का नाश्ता बनातीं महिलाएं।

HighLights

  1. 40 किलो अनारसे, 20 किलो चकली और चिवड़ा बनाने का जिम्‍मा।
  2. त्योहार के सीजन में बढ़े आर्डर से कई महिलाओं को मिला रोजगार।
  3. नमकीन, मीठे पारे, लड्डू, सेव और गुजिया की अच्छी मांग रहती है।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। दिवाली की रौनक घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों के बिना अधूरी है। बाजार में मिठाइयों और नमकीन के ढेरों विकल्प मौजूद हैं, लेकिन घर के बने चिवड़े, चकली, अनारसे और लड्डुओं का स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यही वजह है कि त्योहार नजदीक आते ही शहर की महिला उद्यमियों के गृह उद्योगों में कामकाज तेज हो गया है।

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किसी के पास चकली और अनारसे के सबसे ज्यादा ऑर्डर हैं, तो कोई चिवड़ा, सेव, गुजिया और मीठे पारे तैयार करने में जुटी है। कोई 10 से 15 किलो सामग्री बना रही है, तो किसी ने 40 किलो अनारसे बनाने का लक्ष्य रखा है। परिवार के सदस्यों के साथ कुछ महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी काम दे रही हैं। इनके लिए दिवाली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत को कारोबार में बदलने का खास मौका भी है।


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पारंपरिक स्वाद की मांग, चकली और अनारसे के सबसे ज्यादा आर्डर

मुक्ता देवलालीकर बताती हैं कि वे बीते पांच-छह सालों से दिवाली के लिए पारंपरिक नाश्ते तैयार कर रही हैं। वैसे तो लोग सभी तरह के पकवानों के आर्डर देते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग चकली और अनारसे की रहती है। इसकी वजह बताते हुए वे कहती हैं कि लोगों को इन दोनों पकवानों का पारंपरिक स्वाद पसंद है।

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दुकानों में मिलने वाले उत्पादों में वह स्वाद नहीं मिल पाता, इसलिए लोग खास तौर पर घर के बने चकली और अनारसे खरीदना पसंद करते हैं।

वे बताती हैं, इसके अलावा चिवड़ा, नमकीन, मीठे पारे, लड्डू, सेव और गुजिया की भी अच्छी मांग रहती है। मैं सभी पकवान 10 से 15 किलो तक तैयार कर रही हूं। इस काम में मेरे पति के साथ दीदी और भाभी भी हाथ बंटाती हैं।

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सेवानिवृत्ति के बाद शुरू किया काम, छह महिलाओं को मिला रोजगार

अरेरा कालोनी निवासी प्रज्ञा औरंगाबादकर बताती हैं कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग से वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हुई थीं। इसके बाद उन्होंने व्यवसाय श्री गृह उद्योग को शुरू किया।

नौकरी के दौरान जब मैं अपने हाथों से बनी चीजें सहकर्मियों को चखाती थीं, तो अक्सर लोग कहते थे कि मेरे हाथों में जादू है और मुझे इसका काम शुरू करना चाहिए।

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सेवानिवृत्ति के बाद मैंने इसी सुझाव को अपने सपने में बदल लिया। वे कहती हैं, मेरा काम सालभर चलता है, लेकिन दिवाली के समय आर्डर काफी बढ़ जाते हैं। मेरे साथ छह महिलाएं काम करती हैं।

खास बात यह है कि ये महिलाएं घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए भी इस काम में सहयोग करती हैं। इस तरह त्योहार के समय उन्हें अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल जाता है।

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मां और सास से सीखे पकवान, 40 किलो अनारसे के आर्डर

  • अवधपुरी निवासी रागिनी मुळे बताती हैं कि उन्हें दिवाली का नाश्ता तैयार करते हुए 24 साल हो गए हैं। कुछ पकवान उन्होंने अपनी मां से बनाना सीखे, तो कुछ सास से।
  • इस बार सबसे ज्यादा आर्डर अनारसे के मिले हैं, इसलिए मैं करीब 40 किलो अनारसे तैयार कर रही हूं।
  • इसके अलावा चकली, बेसन की बर्फी और चिवड़ा भी 20-20 किलो बना रही हूं।
  • वे बताती हैं कि अनारसे बनाना आसान नहीं है। कई लोगों का इसका मिश्रण सही नहीं बन पाता।
  • कभी तलते समय अनारसे फैल जाते हैं, तो कभी इतने कठोर हो जाते हैं कि खाने में अच्छे नहीं लगते।
  • यही वजह है कि लोग घर के बने अनारसे के ऑर्डर देना पसंद करते हैं।
  • रागिनी बताती हैं कि इस साल घर बन रहा है, इसलिए मैंने अपेक्षाकृत कम आर्डर लिए हैं।

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  • हर साल मैं 15 तरह के पकवान तैयार करती हैं, लेकिन इस बार केवल आठ ही रखे हैं।
  • इस बार उन्हीं लोगों के आर्डर लिए, जो खुद उनके पास आए।
  • बुधवार से ही नाश्ता बनाने का काम शुरू कर दिया है।
  • हर साल घर के सभी सदस्य मिलकर इस काम को पूरा करते हैं।
  • कभी काम करते-करते रात के एक बज जाते हैं, तो कभी सुबह पांच बजे से ही तैयारी शुरू करनी पड़ती है।
  • त्योहार के दिनों में काम का दबाव जरूर बढ़ जाता है, लेकिन सालभर के इंतजार के बाद मिलने वाले इन ऑर्डर से खुशी भी उतनी ही होती है।

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