
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। उम्र बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन आज के दौर में बहुत से लोग इसके असर को कम दिखाने के लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट और सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। व्यक्तिगत जिंदगी के साथ-साथ प्रोफेशनल लाइफ में भी लुक को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण फेस लिफ्टिंग, ब्लेफेरोप्लास्टी, राइनोप्लास्टी, हेयर ट्रांसप्लांट और बोटॉक्स-फिलर्स जैसी प्रक्रियाओं में लोगों की रुचि बढ़ रही है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, अब कॉस्मेटिक सर्जरी सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं रही। पुरुष भी चेहरे, बाल और शरीर से जुड़ी अपनी पसंद के अनुसार इन प्रक्रियाओं के बारे में सलाह ले रहे हैं।
उम्र बढ़ने के साथ आंखों के आसपास की स्किन ढीली पड़ सकती है और पलकों के नीचे अतिरिक्त चर्बी जमा होने से आई बैग्स दिखाई देने लगते हैं। इसे ठीक करने के लिए ब्लेफेरोप्लास्टी की जाती है। इसमें ऊपरी या निचली पलकों के आसपास मौजूद अतिरिक्त स्किन और चर्बी को जरूरत के अनुसार हटाया या व्यवस्थित किया जाता है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, यह बदलाव आमतौर पर 40 की उम्र के बाद ज्यादा नजर आ सकता है। पुरुष भी इस प्रक्रिया के लिए डॉक्टर्स से सलाह ले रहे हैं।
उम्र बढ़ने के साथ चेहरे की स्किन में ढीलापन आना भी सामान्य है। इसे कम करने के लिए फेस लिफ्टिंग जैसी सर्जिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें चेहरे की ढीली स्किन और नीचे के ऊतकों को सर्जिकल तरीके से व्यवस्थित कर चेहरे में कसाव लाने की कोशिश की जाती है।
चेहरे की बनावट में नाक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसके आकार या संरचना में बदलाव के लिए राइनोप्लास्टी की जाती है। यह प्रक्रिया सिर्फ खूबसूरती से जुड़ी वजहों से ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में नाक की संरचना या सांस लेने से जुड़ी समस्या को ठीक करने के लिए भी की जा सकती है।
कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं का दायरा सिर्फ चेहरे तक नहीं है। बालों की कमी वाले हिस्सों में हेयर ट्रांसप्लांट भी कराया जा रहा है। इसके अलावा PRP यानी Platelet-Rich Plasma Therapy का इस्तेमाल भी बालों से जुड़ी कुछ समस्याओं में किया जाता है। इसमें व्यक्ति के अपने खून से प्लेटलेट्स से भरपूर प्लाज्मा तैयार कर उसे सिर की स्किन में बालों की जड़ों के आसपास इंजेक्ट किया जाता है।
हालांकि PRP हर व्यक्ति में समान परिणाम दे, यह जरूरी नहीं है। इसका इस्तेमाल समस्या के कारण और व्यक्ति की स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ तय करते हैं।
चेहरे पर उम्र के साथ दिखाई देने वाली कुछ झुर्रियों और लाइनों को कम करने के लिए बोटॉक्स और डर्मल फिलर्स जैसी नॉन-सर्जिकल प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इन दोनों को एक जैसा समझना सही नहीं है। बोटॉक्स खास मांसपेशियों की गतिविधि को अस्थायी रूप से कम करता है, जबकि फिलर्स का इस्तेमाल चेहरे के कुछ हिस्सों में वॉल्यूम बढ़ाने या आकार में बदलाव के लिए किया जाता है।
शरीर के कुछ हिस्सों में जमा अतिरिक्त फैट को हटाने के लिए लाइपोसक्शन की जाती है। इसमें सर्जिकल तरीके से शरीर के चुनिंदा हिस्सों से फैट हटाया जाता है। हालांकि इसे वजन घटाने का सामान्य तरीका नहीं माना जाना चाहिए। यह शरीर की बनावट में बदलाव के लिए की जाने वाली कॉस्मेटिक प्रक्रिया है।
गर्भावस्था, स्तनपान या उम्र बढ़ने के बाद कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट की स्किन में ढीलापन या आकार में बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह के बाद ब्रेस्ट लिफ्ट, ऑग्मेंटेशन या अन्य ब्रेस्ट सर्जरी पर विचार किया जा सकता है। कौन-सी प्रक्रिया जरूरी है, यह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और उसकी जरूरत पर निर्भर करता है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की मांग सिर्फ बड़ी सर्जरी तक सीमित नहीं है। कुछ लोग चेहरे पर मौजूद मस्से, तिल और छोटे निशान हटाने के लिए लेजर जैसी प्रक्रियाओं की मदद ले रहे हैं।
एम्स भोपाल के बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल दुबेपुरिया के मुताबिक, सरकारी अस्पताल में सामान्य मरीज ज्यादा आते हैं, जबकि शहर में निजी स्तर पर कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं कराने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।
उनके अनुसार, लोगों में अपने लुक को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसका असर कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं की मांग पर भी दिखाई दे रहा है।
प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुनील के मुताबिक, आज लोग अपने रूप-रंग को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा सजग हैं। व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर लुक को लेकर बढ़ती जागरूकता इसका एक कारण हो सकती है। हालांकि, कॉस्मेटिक सर्जरी या किसी भी प्रक्रिया का फैसला सिर्फ ट्रेंड देखकर नहीं करना चाहिए। व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, स्वास्थ्य स्थिति, अपेक्षाओं और प्रक्रिया से जुड़े संभावित जोखिमों को समझना जरूरी है।
कॉस्मेटिक सर्जरी का मतलब सिर्फ युवा दिखना नहीं, बल्कि सुरक्षित और वास्तविक परिणाम हासिल करना भी है। इसलिए किसी भी सर्जरी या कॉस्मेटिक प्रक्रिया से पहले योग्य प्लास्टिक सर्जन या संबंधित विशेषज्ञ से उचित जांच और सलाह लेना जरूरी है।