शादी के बाद खर्चों और सेविंग्स को मैनेज करने का बनाएं प्लान, टेंशन होगी दूर
शादी के बाद मजबूत रिश्ते के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग बेहद जरूरी है। पैसों को लेकर पारदर्शिता, साझा लक्ष्य, संतुलित बजट, सही बैंक अकाउंट मैनेजमेंट और इम ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Jan 2026 02:18:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Jan 2026 02:18:15 PM (IST)
शादी के बाद आर्थिक संतुलन बनाए रखना जरूरी। (फाइल फोटो)HighLights
- पैसों में पारदर्शिता रिश्ते की नींव मजबूत बनाती है।
- साझा और व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्य पहले से तय करें।
- ‘हमारा बजट’ बनाकर खर्च और बचत संतुलित रखें।
लाइफस्टाइल डेस्क। शादी केवल भावनात्मक रिश्ता नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सोच, आदतों और जिम्मेदारियों का संगम भी होती है। शादी के बाद सबसे बड़ी चुनौती आपसी तालमेल के साथ-साथ आर्थिक संतुलन बनाए रखने की होती है।
कई कपल्स प्यार और भरोसे के सहारे सब कुछ अपने आप ठीक होने की उम्मीद करते हैं, लेकिन पैसों को लेकर स्पष्टता न हो तो यही विषय आगे चलकर तनाव और विवाद की वजह बन सकता है। इसलिए शादी के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग पर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। सही रणनीति अपनाकर न सिर्फ आर्थिक मजबूती लाई जा सकती है, बल्कि रिश्ते में भी पारदर्शिता और विश्वास बढ़ता है।
फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी है रिश्ते की नींव
पैसों को लेकर ईमानदारी किसी भी रिश्ते को मजबूत बनाती है। शादी के बाद अपने पार्टनर के साथ आय, खर्च, कर्ज, सेविंग्स और निवेश की पूरी जानकारी साझा करें। क्रेडिट कार्ड बिल, लोन या अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां छिपाने से बचें। जब दोनों को वास्तविक स्थिति का पता होगा, तभी सही फैसले लिए जा सकेंगे।
साझा और व्यक्तिगत लक्ष्य करें तय
कपल्स को मिलकर अपने शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म गोल्स तय करने चाहिए। घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट प्लान या ट्रैवल जैसे लक्ष्य साझा हो सकते हैं। वहीं व्यक्तिगत लक्ष्य भी जरूरी हैं, जैसे माता-पिता की मदद या कोई व्यक्तिगत शौक। इन लक्ष्यों की प्राथमिकता तय करने से बचत और निवेश आसान हो जाता है।
‘हमारा’ बजट बनाना है जरूरी
‘तुम्हारा-मेरा’ सोच छोड़कर ‘हमारा बजट’ बनाएं। खर्चों को फिक्स खर्च, सेविंग्स और अन्य खर्चों में बांटें। इससे यह सुनिश्चित होगा कि खर्च नियंत्रित रहें और भविष्य के लिए बचत बनी रहे।
बैंक अकाउंट का संतुलित इस्तेमाल
जॉइंट अकाउंट घर के खर्च और साझा निवेश के लिए उपयोगी होता है, जबकि पर्सनल अकाउंट व्यक्तिगत जरूरतों और आत्मनिर्भरता बनाए रखने में मदद करता है। दोनों का संतुलन रिश्ते को सहज बनाता है।
इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस की तैयारी
अचानक आने वाली परिस्थितियों से निपटने के लिए कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाएं। साथ ही हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस लेकर आर्थिक सुरक्षा और मानसिक शांति सुनिश्चित करें।