
लाइफस्टाइल डेस्क। मधुमेह को नियंत्रित रखने और एक सेहतमंद जीवन जीने में आयुर्वेद बेहद कारगर साबित हो सकता है। आयुर्वेद में मधुमेह को प्रमेह या मधुमेह कहा जाता है, जिसे मुख्य रूप से दोषों (विशेषकर कफ दोष) के असंतुलन और कमजोर पाचन (अग्नि) से जोड़कर देखा जाता है।
खानपान में बदलाव, सही अनाज का चुनाव व ताजा व हल्का भोजन उपयोगी होता है। प्राचीन आयुर्वेद परंपरा के अनुसार गेहूं और चावल की जगह जौ, बाजरा, रागी और चने के आटे की रोटियां हितकर मानी जाती हैं।
हमेशा सुपाच्य, गर्म और ताजा भोजन करें। पैक्ड, प्रोसेस्ड और बहुत ज्यादा मीठे या तैलीय भोजन से पूरी तरह दूरी बना लें। प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को रोज कम से कम 30-45 मिनट टहलना चाहिए।
कपालभाति, अनुलोम-विलोम, मंडूकासन और पश्चिमोत्तानासन जैसे प्राणायाम और योग आसन इंसुलिन बनाने वाले पैंक्रियाज (अग्न्याशय) को सक्रिय करते हैं। मानसिक तनाव शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है। तनाव कम करने के लिए ध्यान का सहारा लें और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें।
Health Tips: नींद पर नया शोध, पर्याप्त रूप से ना सोने पर इस बड़ी बीमारी का खतरा

आयुर्वेद के अनुसार, मधुमेह के रोगियों को दिन में सोने (दिवास्वप्न) से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में कफ दोष बढ़ता है। यह भी जरूरी है कि आयुर्वेदिक उपाय आपकी एलोपैथिक दवाओं का विकल्प नहीं हैं।
आयुर्वेद कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर Dr. राकेश सारस्वत का कहना है कि कोई भी नया घरेलू उपाय शुरू करने से पहले अपने डाॅक्टर या किसी प्रमाणित आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें और समय-समय पर अपना ब्लड शुगर लेवल चेक करते रहें। अत: मधुमेह से बचाव संभव है बस छोटे छोटे उपाय सेहतमंद शरीर के लिए जरूरी होते हैं।