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सुबह बीमारी का पता चलेगा और दोपहर में इलाज होगा, कैंसर रिसर्च में रेडियोथेरेपी में आ सकता है क्रांतिकारी बदलाव

कैंसर के इलाज की यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति और उसकी हलचल पर लगातार नजर रखी जाती है। इससे रेडिएशन को ट्यूमर के सही स्था...और पढ़ें

By Navodit SaktawatEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 01:37:46 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 01:41:13 PM (IST)
सुबह बीमारी का पता चलेगा और दोपहर में इलाज होगा, कैंसर रिसर्च में रेडियोथेरेपी में आ सकता है क्रांतिकारी बदलाव
कैंसर रिसर्च में रेडियोथेरेपी

HighLights

  1. ट्यूमर की स्थिति और उसकी हलचल पर लगातार नजर रखी जाती है।
  2. रेडिएशन को ट्यूमर के सही स्थान पर केंद्रित करने में मदद मिलती है
  3. स्वस्थ अंगों को नुकसान पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कैंसर की बीमारी के बेहतर इलाज के लिए दुनियाभर में बड़े पैमाने पर रिसर्च की जा रही हैं। रेडियोथेरेपी तकनीकों को लेकर भी अनुसंधान कार्य तेज गति से चल रहा है। आने वाले दिनों में आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीकें ट्यूमर को ज्यादा सटीकता से टारगेट करने और उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम करने में मददगार होंगी।

जिस तेजी से शोध कार्य हो रहे हैं तो वो समय दूर नहीं है जब सुबह बीमारी का पता चलेगा, दोपहर में इलाज होगा और कुछ वक्त बाद ही मरीज को घर ले जाया सकेगा।

यह कहना था ज्वाइंट डिपार्टमेंट आफ फिजिक्स एट इंस्टीट्यूट आफ कैंसर रिसर्च के हेड प्रोफेसर उवे ओएल्फके का। लगभग दो दशकों से रेडियोथेरेपी, मेडिकल फिजिक्स और कैंसर की उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में ओएल्फके शोध कार्य कर रहे हैं।

रियल टाइम ट्यूमर थेरेपी को लेकर अपने विचार रखते हुए प्रो. ओएल्फके ने कहा कि कैंसर के इलाज की यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें उपचार के दौरान ट्यूमर की स्थिति और उसकी हलचल पर लगातार नजर रखी जाती है।


इससे रेडिएशन को ट्यूमर के सही स्थान पर केंद्रित करने में मदद मिलती है और आसपास के स्वस्थ अंगों को नुकसान पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

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बता दें कि प्रो. उवे ओएल्फके इंटरनेशनल सांटिफिक एक्सचेंज प्रोग्राम ''''मीट द प्रोफेसर'''' के तहत इंदौर पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑन्कोलॉजी के जटिल और अस्पष्ट पहलुओं में काम करना: रेडिएशन थेरेपी अनुसंधान की चुनौतियां और अवसर विषय पर अपने विचार रखे।

भारत में रेडियोथेरेपी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों के स्तर पर उन्होंने प्रसन्नता जताई और मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर हास्पिटल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां कि सुविधाएं यूरोप के कैंसर सेंटरों में दी जाने वाली सुविधाओं से किसी भी लिहाज से कम नहीं हैं।

बता दें कि प्रो. ओएल्फके वर्तमान में इंग्लैंड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एक न्यूक्लियर फिजिस्ट बनकर काम करना और अचानक से मेडिकल फिजिस्ट बनकर करियर बदलने को लेकर वे कहते हैं कि उन्हें लगा कि ऐसा करने से वे अपने शोध के माध्यम से समाज का ज्यादा अच्छी तरीके से भला कर सकते हैं।

उनके शोध कार्य में इमेज गाइडेड रेडियोथेरेपी, एमआरआइ गाइडेड उपचार और जरूरत के अनुसार कैंसर उपचार विकसित करने की संभावनाएं शामिल हैं।

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