
हेल्थ डेस्क। नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा और व्रत के दौरान खानपान के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। इन नौ दिनों में कई लोग अनाज, प्याज और लहसुन से परहेज करते हैं। वहीं, व्रत में साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूरी और व्रत वाले आलू जैसे व्यंजन बनाने के लिए साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि व्रत में सेंधा नमक ही क्यों खाया जाता है? क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता है या इसके कुछ खास स्वास्थ्य लाभ भी हैं?
नवरात्र में सेंधा नमक खाने की मुख्य वजह धार्मिक परंपराएं और व्रत के नियम हैं। कई परिवारों में उपवास के दौरान सामान्य टेबल सॉल्ट की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। इसे व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
हालांकि, व्रत के नियम हर क्षेत्र और परिवार में अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सेंधा नमक का इस्तेमाल भी व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपराओं पर निर्भर करता है।
सेंधा नमक को रॉक सॉल्ट या सैंधव लवण भी कहा जाता है। यह प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले नमक के भंडारों से प्राप्त होता है। बाजार में यह सफेद और गुलाबी रंग के क्रिस्टल के रूप में मिल सकता है।
साधारण टेबल सॉल्ट को आमतौर पर रिफाइन किया जाता है और उसमें आयोडीन मिलाया जाता है। इसके विपरीत, सेंधा नमक अक्सर बिना आयोडीन मिलाए बेचा जाता है। हालांकि, यह मानना सही नहीं है कि सेंधा नमक हमेशा पूरी तरह प्राकृतिक या अशोधित होता है, क्योंकि इसकी प्रोसेसिंग अलग-अलग हो सकती है।
दोनों तरह के नमक में मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है। इसलिए सिर्फ सेंधा नमक इस्तेमाल करने से इसे साधारण नमक की तुलना में ज्यादा सेहतमंद नहीं माना जा सकता।
सेंधा नमक को लेकर पाचन बेहतर करने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और शरीर से टॉक्सिन निकालने जैसे कई दावे किए जाते हैं। आयुर्वेद में भी इसका पारंपरिक इस्तेमाल मिलता है। हालांकि, इन सभी दावों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम मुख्य रूप से लिवर और किडनी जैसे अंग करते हैं। केवल सेंधा नमक खाने से शरीर डिटॉक्स नहीं होता और न ही मेटाबॉलिज्म बेहतर होने की गारंटी मिलती है।
यह एक आम धारणा है कि सेंधा नमक हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों के लिए ज्यादा सुरक्षित होता है। लेकिन सेंधा नमक भी सोडियम का स्रोत है। इसका ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम बढ़ा सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को सेंधा नमक को कम सोडियम वाला विकल्प मानने के बजाय कुल नमक का सेवन सीमित रखना चाहिए और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
सेंधा नमक को स्किन और बालों के लिए फायदेमंद बताने वाले कई घरेलू नुस्खे प्रचलित हैं। कुछ लोग इसका इस्तेमाल स्क्रब या हेयर ट्रीटमेंट में भी करते हैं। हालांकि, इसे खाने से बालों की ग्रोथ बढ़ने या स्किन स्वस्थ होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।
मोटे नमक के क्रिस्टल स्किन और स्कैल्प पर रगड़ने से जलन या इरिटेशन भी हो सकता है। इसलिए इसे स्किन या बालों पर इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
साधारण आयोडीन युक्त नमक शरीर को आयोडीन उपलब्ध कराने का एक प्रमुख स्रोत है। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी होता है। सेंधा नमक में आयोडीन की मात्रा आमतौर पर भरोसेमंद स्तर पर नहीं होती, जब तक उसमें अलग से आयोडीन न मिलाया गया हो।
अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक केवल बिना आयोडीन वाला नमक इस्तेमाल करता है, तो उसे अपने भोजन से पर्याप्त आयोडीन मिलने का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है।
नवरात्र में सेंधा नमक का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्रत की परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। इसे साबूदाना खिचड़ी, उबले आलू और दूसरे व्रत के व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है। लेकिन याद रखें कि सेंधा नमक भी नमक ही है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर है। व्रत के दौरान संतुलित भोजन और पर्याप्त पानी का सेवन भी उतना ही जरूरी है।