
लाइफस्टाइल डेस्क। नवरात्र में व्रत रखने के साथ यह सवाल भी आता है कि पूरे दिन एनर्जी बनी रहे, पेट भरा रहे और सेहत पर भी बुरा असर न पड़े, इसके लिए क्या खाना चाहिए? व्रत की थाली में समा के चावल, साबूदाना और कुट्टू के आटे से बनी चीजें खूब खाई जाती हैं। तीनों ग्लूटेन-फ्री हैं, लेकिन इनके पोषक तत्व और शरीर पर पड़ने वाले असर अलग-अलग हैं।
साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देता है, समा के चावल हल्के और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जबकि कुट्टू का आटा प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है। ऐसे में सवाल है कि व्रत के दौरान इन तीनों में से कौन-सा विकल्प सेहत के लिए सबसे बेहतर है?
समा के चावल को व्रत का चावल भी कहा जाता है। हालांकि, यह सामान्य चावल नहीं, बल्कि बार्नयार्ड मिलेट नाम का एक प्रकार का मोटा अनाज है। इसे व्रत में खिचड़ी, पुलाव और खीर जैसी कई डिश बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
समा के चावल में कार्बोहाइड्रेट के साथ फाइबर और आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ये शरीर को ऊर्जा देने और सामान्य शारीरिक कार्यों को बनाए रखने में मदद करते हैं।
समा के चावल को हमेशा कम कैलोरी वाला मानना सही नहीं है। इसकी कैलोरी इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कितनी मात्रा में खाया जा रहा है और इसमें कितना घी, तेल या आलू मिलाया गया है। इसे कम तेल में पकाकर दही या पनीर के साथ खाना ज्यादा संतुलित विकल्प हो सकता है।
व्रत में साबूदाने की खिचड़ी, खीर और वड़े काफी पसंद किए जाते हैं। साबूदाना टैपिओका की जड़ से मिलने वाले स्टार्च से तैयार किया जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह शरीर को जल्दी ऊर्जा दे सकता है।
हालांकि, साबूदाने में प्रोटीन और फाइबर बहुत कम होते हैं। इसमें दूसरे पोषक तत्व भी सीमित मात्रा में मिलते हैं। यही वजह है कि सिर्फ साबूदाने पर निर्भर रहने से व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।
साबूदाने में फाइबर और प्रोटीन कम होने के कारण इसे खाने के कुछ समय बाद दोबारा भूख लग सकती है। इसका असर खाने की मात्रा और साथ में खाए गए दूसरे खाद्य पदार्थों पर भी निर्भर करता है।
साबूदाने के वड़े को डीप फ्राई करने या खिचड़ी में ज्यादा घी, तेल और आलू डालने से इसकी कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए इसे रोजाना बड़ी मात्रा में खाने के बजाय सीमित मात्रा में खाना बेहतर है।
कुट्टू का आटा यानी बकव्हीट फ्लोर नवरात्र के व्रत में पूरी, रोटी और पकौड़े बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। नाम में गेहूं होने के बावजूद कुट्टू सामान्य गेहूं नहीं है। यह एक ऐसा बीज है जिसे अनाज की तरह इस्तेमाल किया जाता है और यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है।
समा के चावल और साबूदाने की तुलना में कुट्टू का आटा प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसमें फाइबर, मैग्नीशियम, जिंक और कॉपर जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
कुट्टू के आटे से बनी हर डिश अपने आप हेल्दी नहीं हो जाती। ज्यादा तेल में तली पूरी और पकौड़े खाने से कैलोरी और फैट की मात्रा बढ़ सकती है। बेहतर होगा कि इसे कम तेल में तैयार करें और दही या पनीर जैसे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाएं।

ध्यान दें: पोषक तत्वों की वास्तविक मात्रा उत्पाद, उसकी प्रोसेसिंग, पकाने के तरीके और इस्तेमाल की गई मात्रा के अनुसार बदलती है।
तीनों की तुलना करें तो प्रोटीन और फाइबर के लिहाज से कुट्टू का आटा बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहने में मदद मिल सकती है। वहीं, समा के चावल उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हैं जो व्रत में चावल जैसी डिश खाना चाहते हैं और अपने भोजन में अलग-अलग पोषक तत्व शामिल करना चाहते हैं।
वहीं, साबूदाना भी व्रत में खाया जा सकता है, लेकिन इसे संपूर्ण पोषण का मुख्य स्रोत नहीं मानना चाहिए। इसमें प्रोटीन और फाइबर कम होते हैं, इसलिए इसे दही, मूंगफली या अन्य उपयुक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाना बेहतर है।
यह भी जरूरी है कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स यानी जीआई को लेकर किसी खाद्य पदार्थ को अच्छा या खराब मानने से पहले उसकी मात्रा, पकाने का तरीका और पूरे भोजन की संरचना को ध्यान में रखा जाए। साबूदाना रक्त शर्करा तेजी से बढ़ा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। डायबिटीज वाले लोगों को विशेष रूप से मात्रा और भोजन के संयोजन पर ध्यान देना चाहिए।
1. सिर्फ कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर न रहें: व्रत के भोजन में दही, दूध, पनीर या मूंगफली जैसे उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करें।
2. तली हुई चीजें कम खाएं: साबूदाने के वड़े, कुट्टू की पूरी और पकौड़े ज्यादा तेल में बनाने से बचें।
3. पानी पर्याप्त पिएं: व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें।
4. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें: व्रत में एक साथ बहुत ज्यादा खाने के बजाय अपनी भूख और जरूरत के अनुसार भोजन करें।
5. बीमारियों के अनुसार भोजन चुनें: डायबिटीज या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह के अनुसार व्रत का भोजन तय करें।