
हेल्थ डेस्सक, जबलपुर। हमारे कान शरीर के सबसे जरूरी अंग हैं। यह सिर्फ सुनने में ही नहीं, बल्कि शरीर का संतुलन (Balance) बनाए रखने में भी मदद करते हैं। ईयरफोन या ईयरबड्स को तेज आवाज में लगातार इस्तेमाल करने से कानों की सुनने की क्षमता हमेशा के लिए प्रभावित हो सकती है। इससे बहरेपन का खतरा बढ़ जाता है। यह बाचत कई एक्सपर्ट्स कह चुके हैं।
कई एक्सपर्ट्स ने बताया- तेज आवाज कानों के अंदर मौजूद बेहद सेंसिटिव सेल्स को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचाती है। इससे कानों में लगातार घंटी बजने, सीटी या सन-सन जैसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं। इसके अलावा बारिश के मौसम में नमी और उमस के कारण कानों में फंगल-बैक्टीरियल इन्फेक्शन (ऑटोमाइकोसिस) का खतरा काफी बढ़ जाता है। कान साफ करने के लिए इयरबड्स, चाबी या पिन डालने से अंदर की नाजुक त्वचा छिल जाती है, जिससे इंफेक्शन तेजी से फैलता है।
इस समसमया को लेकर नईदुनिया ने एक कार्यक्रेम रखा, जिसेहम हेलो डॉक्टर के नाम से जानते हैं। इसमें कई एक्सपर्ट्स मौजूद थे। उन्होंने वहां मौजूद सभी लोगों को उनकी परेशानी का इलाज बताया।
सवाल: मेरी उम्र 55 साल है, काफी समय से सुनने में दिक्कत आ रही है। सामने वाले को तेज बोलना पड़ता है?
जवाब: बढ़ती उम्र के साथ कानों की सुनने की क्षमता कम होना स्वाभाविक है। आप किसी ENT स्पेशलिस्ट से परामर्श लें और कानों की जांच (ऑडियोमेट्री) कराएं। जरूरत पड़ने पर हीयरिंग एड (कान की मशीन) का उपयोग किया जा सकता है। कानों में किसी भी तरह के ईयरफोन या गैजेट्स का उपयोग न करें।
सवाल: मेरी उम्र 40 साल है, मेरी नाक गंध (Smell) महसूस नहीं कर पा रही है। क्या यह चिंता की बात है?
जवाब: अत्यधिक चिंता की बात नहीं है। अक्सर वायरल इंफेक्शन या एलर्जी के कारण सूंघने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। जिस चीज से एलर्जी हो उससे बचें और परफ्यूम या अन्य तीखी गंध को महसूस करने का प्रयास करें। यदि समस्या लंबी बनी रहे, तो नाक की जांच कराएं।
सवाल: मेरी उम्र 72 साल है, कानों से लगातार 'सन-सन' की आवाज आती है?
जवाब: कानों में सीटी या सन-सन की आवाज आने की इस समस्या को मेडिकल भाषा में 'टिनिटस' (Tinnitus) कहा जाता है। इसमें दवाइयों की भूमिका सीमित होती है। पूरी तरह शांत माहौल में रहने पर यह आवाज और ज्यादा परेशान करती है, इसलिए ऐसे माहौल में रहें जहां हल्का और मधुर बैकग्राउंड साउंड (जैसे हल्का संगीत) चल रहा हो। लाइफस्टाइल में सुधार करें और स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
सवाल: अत्यधिक शोर कानों के लिए कितना नुकसानदेह है? (प्रशांत, जबलपुर)
जवाब: हमारे कान की आंतरिक संरचना और कोशिकाएं बेहद सूक्ष्म होती हैं। एक निश्चित सीमा से अधिक तेज शोर इन कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। यही कारण है कि लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से धीरे-धीरे बहरापन आ सकता है।
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