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अगले 15 सालों में दो डिग्री बढ़ सकता है धरती का तापमान, तीन साल में अधिकतम नुकसान की आशंका

संभावना है कि अगले 15 साल में दो डिग्री तक धरती का तापमान बढ़ जाए। यह एक प्रकार से बहुत गंभीर स्थिति है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को...और पढ़ें

By bharat mandhanyaEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 02:41:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 02:46:21 PM (IST)
अगले 15 सालों में दो डिग्री बढ़ सकता है धरती का तापमान, तीन साल में अधिकतम नुकसान की आशंका
ग्‍लोबल वार्मिंग के चलते बढ़ेगा तापमान।

HighLights

  1. इंदौर हार्ट क्लब के कार्यक्रम में बोले प्रोफेसर चेतन सोलंकी।
  2. पुस्तक ‘क्लाइमेट चेंज 2100 : सर्वाइव आर थ्राइव?’ पर चर्चा।
  3. अनुमान है कि तीन साल में ही डेढ़ डिग्री तापमान बढ़ जाएगा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि वर्तमान की गंभीर चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, वायु प्रदूषण और प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। पिछले 11 वर्ष विश्व के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्लोबल वार्मिंग बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह बातें IIT इंदौर के प्रोफेसर चेतन सोलंकी ने इंदौर हार्ट क्लब द्वारा आयोजित पुस्तक चर्चा में कही। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन विषय पर लिखी गई उनकी किताब ‘क्लाइमेट चेंज 2100 : सर्वाइव आर थ्राइव?’ पर चर्चा की गई। कार्डियोलाजिस्ट डा. भारत रावत ने उनसे चर्चा की।


प्रो. चेतन सोलंकी ने चर्चा में बताया कि पहले यह माना जा रहा था कि वैश्विक तापमान में डेढ़ डिग्री बढ़ोतरी को रोका जा सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखकर अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले तीन साल में ही डेढ़ डिग्री तापमान बढ़ जाएगा।

संभावना है कि अगले 15 साल में दो डिग्री तक धरती का तापमान बढ़ जाए। यह एक प्रकार से बहुत गंभीर स्थिति है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

यह पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अच्छा कदम है, लेकिन इसे पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी मानना ठीक नहीं है। पूरा साल्यूशन यह है कि लोग अपने कार्बन फूटप्रिंट को कम करने पर ध्यान दें। व्यक्ति यह खुद देखें कि वह रोजाना कितना कार्बन उत्सर्जन कर रहा है और इसे कम करने का प्रयास करें।

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बच्चों में बढ़ानी होगी जागरूकता

  • चर्चा से पूर्व भारत रावत ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
  • उन्होंने कहा कि हमें यह भी देखना है कि हमारी मेंटेनेंस कास्ट कितनी है।
  • इसे कम करने के लिए हम उन वस्तुओं का लंबे समय तक उपयोग करें।
  • जितना हो सके बिजली की खपत कम करें और यात्राएं भी कम करने पर ध्यान दें।
  • उन्होंने कहा ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से निपटने के लिए हमें बच्चों को स्कूल स्तर से ही जागरूक करना होगा।
  • उन्हें बताया जाए कि हम कैसे पर्यावरण संरक्षण कर सकते हैं।
  • कौन सी आदतें हैं, जिनमें बदलाव से पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में योगदान दिया जा सकता है।
  • इसके लिए बच्चों को लोकल चीजें खाने के लिए प्रेरित करें और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करने के लिए कहें।
  • दूर-दराज से खाद्य पदार्थों को लाने में परिवहन का उपयोग होता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
  • स्थानीय उत्पादों को अपनाकर इसे कम करने में मदद मिल सकती है।