
लाइफस्टाइल डेस्क। दांतों का दर्द बंद होते ही कई लोग डेंटिस्ट के पास दोबारा जाना जरूरी नहीं समझते। जबकि रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी), दांतों की सर्जरी, फिलिंग या कैप लगवाने के बाद फालो-अप भी इलाज का अहम हिस्सा है। दर्द से राहत मिलना पूरी तरह ठीक होने की गारंटी नहीं है।
फालो-अप के दौरान डाॅक्टर यह जांचते हैं कि उपचार का असर कैसा है, घाव की हीलिंग सही तरीके से हो रही है या नहीं और संक्रमण दोबारा होने की आशंका तो नहीं है।
समय पर जांच से मुंह और दांतों से जुड़ी दूसरी समस्याओं की पहचान भी हो सकती है। इससे जरूरत पड़ने पर समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है और आगे होने वाली जटिलताओं से बचाव में मदद मिलती है।
फिलिंग, कैप और सर्जरी के बाद नियमित जांच उपचार के परिणाम लंबे समय तक बनाए रखने में भी सहायक होती है। दांतों के इलाज में क्लीनिकल प्रोसीजर के साथ फालो-अप भी महत्वपूर्ण है।

डाॅ. महक गुप्ता, दंत रोग विशेषज्ञ का कहना है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई तारीख पर दोबारा जांच कराने से उपचार की सफलता और हीलिंग का आकलन किया जा सकता है।
इसलिए दर्द बंद होने पर इलाज को पूरी तरह सफल मानकर फालो-अप छोड़ने की गलती न करें। स्वस्थ दांतों और सुरक्षित मुस्कान के लिए डेंटिस्ट की सलाह का पालन करें।
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