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Pregnancy प्‍लान कर रहे हैं तो पहले दांतों और मसूड़ों की भी करा लें जांच, क्‍या है इसकी वजह?

यदि दांत में गहरी कैविटी, पस, लगातार दर्द या रूट कैनाल की जरूरत है तो डाक्टर से उपचार की योजना बनाएं। यह धारणा सही नहीं कि गर्भावस्था में कोई डेंटल उप...और पढ़ें

By Deepankar RoyEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 03:20:13 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 03:30:31 PM (IST)
Pregnancy प्‍लान कर रहे हैं तो पहले दांतों और मसूड़ों की भी करा लें जांच, क्‍या है इसकी वजह?
दांतों की जांच कराएं।

HighLights

  1. गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव से मसूड़े अधिक संवेदनशील होकर सूज या खून कर सकते हैं।
  2. उल्टी, खान-पान में बदलाव, मुंह की सफाई प्रभावित होने से कैविटी का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  3. गर्भधारण की योजना बनाते समय डेंटिस्ट से जांच कराकर आवश्यक सफाई कराना बेहतर रहता है।

दीपंकर राय। परिवार बढ़ाने की योजना बना रही महिलाओं के लिए गर्भधारण से पहले सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ दांतों और मसूड़ों का परीक्षण कराना भी उपयोगी कदम है। दंत चिकित्सक Dr. धवल खरे के अनुसार इस दौरान कैविटी, मसूड़ों की बीमारी, संक्रमण, अकल दाढ़ एवं रूट कैनाल की जरूरत जैसी समस्याओं का पता लगाकर समय रहते उपचार कराया जा सकता है।

इससे गर्भावस्था के दौरान अचानक दांत में तेज दर्द व संक्रमण होने पर उपचार की परेशानी कम हो सकती है। जरूरत पड़ने पर डेंटल एक्स-रे भी गर्भधारण से पहले कराया जा सकता है। पूर्व जांच और आवश्यक परामर्श से गर्भधारण के बाद एक्स-रे सहित अन्य जांच की आवश्यकता को न्यून किया जा सकता है। जोकि आने वाले समय के लिए सुरक्षित होता है।


गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव से मसूड़े अधिक संवेदनशील होकर सूज या खून कर सकते हैं। उल्टी, खान-पान में बदलाव, बार-बार स्नैकिंग या मुंह की सफाई प्रभावित होने से कैविटी का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय डेंटिस्ट से जांच कराकर आवश्यक सफाई और उपचार पूरा कराना बेहतर रहता है।

खुद से दवा लेने से बचें

Dr. खरे बताते हैं कि कैविटी या संक्रमण को न टालें। यदि दांत में गहरी कैविटी, पस, लगातार दर्द या रूट कैनाल की जरूरत है तो डाक्टर से उपचार की योजना बनाएं। यह धारणा सही नहीं कि गर्भावस्था में कोई डेंटल उपचार एवं एंटीबायोटिक बिल्कुल नहीं लिया जा सकता। जरूरत पड़ने पर गर्भावस्था में भी कई उपचार और कुछ एंटीबायोटिक्स चिकित्सकीय सलाह से दिए जा सकते हैं। इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय डेंटिस्ट और स्त्रीरोग विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

यह भी पढ़ें : ओरल हेल्थ का असर सिर्फ दांतों तक सीमित नहीं, दो बार ब्रश करने का क्‍यों है महत्‍व

गर्भावस्था से पहले ये जांचें कराएं

- दांत और मसूड़ों की पूरी जांच।

- जरूरत के अनुसार एक्स-रे।

- कैविटी और संक्रमण का उपचार।

- स्केलिंग-प्रोफेशनल क्लीनिंग।

- रूट कैनाल या अकल दाढ़ की समस्या का मूल्यांकन।

- पुराने डेंटल संक्रमण को नजरअंदाज न करें।

गर्भ ठहरने के बाद भी दांतों की देखभाल जारी रखें

  • गर्भवती होने के बाद दांतों की देखभाल को लेकर भी सजग रहना चाहिए।
  • दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें और रोज फ्लास करें।
  • उल्टी होने के बाद तुरंत ब्रश न करें ; पहले पानी से कुल्ला करें।
  • पेट का एसिड अस्थायी रूप से इनेमल को कमजोर कर सकता है।
  • कुछ लोगों में यह भ्रांति होती है कि गर्भधारण के दंत उपचार करना सुरक्षित नहीं है।
  • ऐसा नहीं है आवश्यक होने पर दंत उपचार गर्भावस्था के दौरान भी किया जा सकता है।
  • गंभीर दर्द या संक्रमण को सिर्फ गर्भावस्था के कारण टालना उचित नहीं, क्योंकि देरी से समस्या बढ़ सकती है।