
दीपंकर राय। परिवार बढ़ाने की योजना बना रही महिलाओं के लिए गर्भधारण से पहले सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ दांतों और मसूड़ों का परीक्षण कराना भी उपयोगी कदम है। दंत चिकित्सक Dr. धवल खरे के अनुसार इस दौरान कैविटी, मसूड़ों की बीमारी, संक्रमण, अकल दाढ़ एवं रूट कैनाल की जरूरत जैसी समस्याओं का पता लगाकर समय रहते उपचार कराया जा सकता है।
इससे गर्भावस्था के दौरान अचानक दांत में तेज दर्द व संक्रमण होने पर उपचार की परेशानी कम हो सकती है। जरूरत पड़ने पर डेंटल एक्स-रे भी गर्भधारण से पहले कराया जा सकता है। पूर्व जांच और आवश्यक परामर्श से गर्भधारण के बाद एक्स-रे सहित अन्य जांच की आवश्यकता को न्यून किया जा सकता है। जोकि आने वाले समय के लिए सुरक्षित होता है।
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव से मसूड़े अधिक संवेदनशील होकर सूज या खून कर सकते हैं। उल्टी, खान-पान में बदलाव, बार-बार स्नैकिंग या मुंह की सफाई प्रभावित होने से कैविटी का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए गर्भधारण की योजना बनाते समय डेंटिस्ट से जांच कराकर आवश्यक सफाई और उपचार पूरा कराना बेहतर रहता है।
Dr. खरे बताते हैं कि कैविटी या संक्रमण को न टालें। यदि दांत में गहरी कैविटी, पस, लगातार दर्द या रूट कैनाल की जरूरत है तो डाक्टर से उपचार की योजना बनाएं। यह धारणा सही नहीं कि गर्भावस्था में कोई डेंटल उपचार एवं एंटीबायोटिक बिल्कुल नहीं लिया जा सकता। जरूरत पड़ने पर गर्भावस्था में भी कई उपचार और कुछ एंटीबायोटिक्स चिकित्सकीय सलाह से दिए जा सकते हैं। इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय डेंटिस्ट और स्त्रीरोग विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।
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- दांत और मसूड़ों की पूरी जांच।
- जरूरत के अनुसार एक्स-रे।
- कैविटी और संक्रमण का उपचार।
- स्केलिंग-प्रोफेशनल क्लीनिंग।
- रूट कैनाल या अकल दाढ़ की समस्या का मूल्यांकन।
- पुराने डेंटल संक्रमण को नजरअंदाज न करें।