Garba Dance: गरबा के हर कदम में छिपा सेहत का फायदा, 200 से 500 तक कैलोरी होती है बर्न
लगातार एक घंटे तक गरबा करने से दिल की धड़कन बढ़ती है, सांस लेने की गति तेज होती है और शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं। यही वजह है कि गरबा क...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 15 Oct 2026 06:22:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 15 Oct 2026 06:47:18 PM (IST)
गरबा करने से बर्न होती है कैलोरी।HighLights
- यदि 60 किलो वजन वाला व्यक्ति मध्यम गति से गरबा करता है।
- तो एक घंटे में लगभग 250 से 350 कैलोरी खर्च कर सकता है।
- कैलोरी बर्न होने का आंकड़ा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नवरात्र में गरबा की धुन बजते ही कदम अपने आप थिरकने लगते हैं। कोई गोल घेरे में घूमते हुए ताल मिलाता है तो कोई ताली और चुटकी के साथ मां दुर्गा की आराधना करता है।
गरबा को आमतौर पर आस्था, परंपरा और उत्सव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके साथ शरीर की अच्छी खासी कसरत भी हो जाती है।
लगातार एक घंटे तक गरबा करने से दिल की धड़कन बढ़ती है, सांस लेने की गति तेज होती है और शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ काम करती हैं। यही वजह है कि गरबा को डांस के साथ-साथ शारीरिक गतिविधि का एक अच्छा तरीका भी माना जाता है।
गरबा की खास बात यह है कि इसमें जिम की तरह मशीनों या अलग से कसरत करने की जरूरत नहीं होती। संगीत की ताल पर लगातार चलना, घूमना, ताली बजाना और पैरों की चाल बदलना शरीर को सक्रिय रखता है। हालांकि, इससे मिलने वाला लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि कोई कितनी तेजी से नाच रहा है, कितनी देर तक नाचता है और उसकी उम्र, वजन व सेहत कैसी है।
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200 से 500 कैलोरी तक होती है बर्न
- फिटनेस ट्रेनर सौरभ सिंह के अनुसार, गरबा में कैलोरी बर्न होने का आंकड़ा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है।
- शरीर का वजन, डांस की रफ्तार, बीच-बीच में लिया जाने वाला आराम और कदमों की तेजी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
- सामान्य तौर पर मध्यम से तेज गति से गरबा करने पर एक घंटे में करीब 200 से 500 कैलोरी तक बर्न हो सकती हैं। कुछ लोगों में यह आंकड़ा इससे कम या ज्यादा भी हो सकता है।
- यदि करीब 60 किलो वजन वाला व्यक्ति मध्यम गति से गरबा करता है तो एक घंटे में लगभग 250 से 350 कैलोरी खर्च कर सकता है।
- वहीं, 70 से 80 किलो वजन वाला व्यक्ति तेज गति से लगातार गरबा खेलता है तो कैलोरी बर्न 350 से 500 या इससे अधिक तक पहुंच सकता है।
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हृदय और फेफड़ों को मिलता है फायदा
- गरबा करते समय लगातार पैरों को चलाने और शरीर को घुमाने से हृदय की धड़कन तेज होती है। शरीर की मांसपेशियों तक खून पहुंचाने के लिए हृदय को ज्यादा काम करना पड़ता है।
- नियमित रूप से ऐसी गतिविधि करने से दिल और सांस से जुड़ी क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
- नयन शुक्ला के अनुसार, गरबा के दौरान सांस लेने की गति भी बढ़ती है। शरीर को ज्यादा आक्सीजन की जरूरत होती है, इसलिए फेफड़े सक्रिय होकर काम करते हैं।
- नियमित गरबा से सांस लेने की क्षमता और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि जारी रखने की सहनशक्ति बेहतर हो सकती है।
- हालांकि, केवल गरबा करने से दिल या फेफड़ों की बीमारी ठीक नहीं होती। जिन लोगों को पहले से दिल या सांस की परेशानी है, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार ही नाचना चाहिए।
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पैरों से लेकर कमर तक की होती है कसरत
- फिजियोथेरेपिस्ट पंकज राठौर के अनुसार, गरबा में सबसे ज्यादा काम पैरों का होता है।
- आगे-पीछे कदम रखना, गोल घूमना, शरीर का भार एक पैर से दूसरे पैर पर डालना और बार-बार दिशा बदलना जांघों, पिंडलियों और कूल्हों की मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
- इससे पैरों की ताकत और लंबे समय तक चलने की क्षमता बेहतर हो सकती है। घुटनों और टखनों का भी लगातार उपयोग होता है।
- सही तरीके से कदम रखने और संतुलन बनाने से शरीर का तालमेल बेहतर हो सकता है, लेकिन गलत तरीके से पैर रखने, बहुत तेजी से घूमने या जरूरत से ज्यादा देर तक नाचने पर घुटनों और टखनों में दर्द या चोट का खतरा भी रहता है।
- कमर और पेट की मांसपेशियां शरीर को सीधा रखने, घूमते समय संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
- गरबा के दौरान शरीर को बार-बार मोड़ने और दिशा बदलने से इन मांसपेशियों पर काम पड़ता है।
- इससे शरीर के बीच वाले हिस्से की ताकत और संतुलन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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