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'गर्भ' शब्द से यूनेस्को धरोहर तक! जानिए कैसे मिट्टी के मटके के गोल घेरे से Gen Z का ग्लोबल ट्रेंड बन गया गरबा

मां अंबा की आराधना से शुरू हुआ गुजरात का पारंपरिक गरबा नृत्य आज Gen Z के बीच आस्था, संगीत, फैशन और सोशल मीडिया का एक अनूठा संगम बन चुका है। 'गर्भ' शब्...और पढ़ें

By Akriti kumariEdited By: Akriti kumari
Publish Date: Tue, 13 Oct 2026 01:52:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2026 01:52:34 PM (IST)
'गर्भ' शब्द से यूनेस्को धरोहर तक! जानिए कैसे मिट्टी के मटके के गोल घेरे से Gen Z का ग्लोबल ट्रेंड बन गया गरबा
'गर्भ' और 'गरबी' से हुई गरबा की शुरुआत

HighLights

  1. 'गर्भ' और 'गरबी' से हुई गरबा की शुरुआत
  2. यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में शामिल
  3. Gen Z के लिए आस्था और फैशन अनोखा मेल

लाइफस्टाइल डेस्क। नवरात्रि आते ही रंग-बिरंगे कपड़े, ढोल की थाप, घूमते हुए कदम और गरबा की धुन हर तरफ सुनाई देने लगती है। गुजरात की संस्कृति से जुड़ा गरबा आज देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय हो चुका है। खास बात यह है कि अब यह सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। Gen Z के लिए गरबा दोस्तों के साथ वक्त बिताने, अपनी संस्कृति से जुड़ने और सोशल मीडिया पर यादगार पल साझा करने का भी जरिया बन गया है। लेकिन जिस गरबा पर आज युवा झूमते हैं, उसकी शुरुआत आखिर कैसे हुई और समय के साथ इसका अंदाज कैसे बदला?

मां अंबा की आराधना से हुई गरबा की शुरुआत

गरबा की जड़ें गुजरात की लोकसंस्कृति और मां अंबा की आराधना से जुड़ी हैं। पारंपरिक रूप से नवरात्रि के दौरान महिलाएं मिट्टी के छिद्रदार घड़े के चारों ओर गोल घेरा बनाकर नृत्य करती थीं। इस घड़े को ‘गरबी’ या ‘गरबो’ कहा जाता है। इसके भीतर दीपक जलाया जाता था, जो जीवन, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।


गरबा शब्द को संस्कृत के ‘गर्भ’ शब्द से भी जोड़ा जाता है। पारंपरिक नृत्य में गोल घेरे को जीवन के चक्र और दीपक को उसके भीतर मौजूद ऊर्जा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। समय के साथ इस लोकनृत्य में तालियां, लयबद्ध कदम और पारंपरिक गीत शामिल होते गए। गुजरात के गांवों से निकलकर गरबा बड़े शहरों और सार्वजनिक आयोजनों तक पहुंच गया।

गांव के आंगन से बड़े इवेंट तक पहुंचा गरबा

पहले गरबा मुख्य रूप से घरों, मंदिरों और गांवों के खुले आंगनों में सामूहिक रूप से किया जाता था। समय के साथ शहरों में बड़े गरबा आयोजन शुरू हुए। लाइव म्यूजिक, बड़े मंच, लाइटिंग और मशहूर गायकों की प्रस्तुतियों ने इसे एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन का रूप दे दिया। अब गुजरात के साथ-साथ देश के दूसरे शहरों में भी गरबा नाइट्स आयोजित होती हैं।

गरबा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिसंबर 2023 में यूनेस्को ने गुजरात के गरबा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया। इस मान्यता ने दुनिया भर में इस पारंपरिक नृत्य की सांस्कृतिक अहमियत को पहचान दिलाई।

Gen Z के लिए गरबा बना संस्कृति और स्टाइल का मेल

आज Gen Z के बीच गरबा का आकर्षण सिर्फ डांस तक सीमित नहीं है। युवाओं के लिए यह दोस्तों के साथ समय बिताने, नए लोगों से मिलने और अपनी संस्कृति को करीब से जानने का मौका भी है। पारंपरिक चनिया-चोली, केडियू, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी और रंग-बिरंगे आउटफिट्स ने गरबा को फैशन से भी जोड़ दिया है।

सोशल मीडिया ने इस बदलाव को और तेज किया है। गरबा के स्टेप्स, रील्स, ग्रुप डांस और तैयार होने के वीडियो युवाओं के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ाते हैं। कई युवा पहले से डांस की प्रैक्टिस करते हैं और नवरात्रि के लिए खास आउटफिट तैयार करवाते हैं। हालांकि, सभी युवाओं के लिए इसकी वजह एक जैसी नहीं है- कुछ इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हैं, तो कुछ संगीत, डांस और दोस्तों के साथ जश्न मनाने के लिए इसमें हिस्सा लेते हैं।

बदलते समय में गरबा भी बदला

गरबा के बदलते रूप में कारोबार की भूमिका भी बढ़ी है। बड़े आयोजनों से डांस ट्रेनर्स, संगीतकारों, कपड़ा कारोबारियों, कारीगरों और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े लोगों को काम मिलता है। इस तरह गरबा अब परंपरा के साथ मनोरंजन और रोजगार का भी हिस्सा बन गया है।

गरबा की खासियत यही है कि इसके कदम बदलते समय के साथ नए अंदाज अपनाते रहे हैं, लेकिन गोल घेरे में साथ नाचने की परंपरा आज भी कायम है। Gen Z के लिए यह अपनी जड़ों से जुड़ने का एक ऐसा तरीका बन रहा है, जिसमें भक्ति, संगीत, फैशन और दोस्ती एक साथ नजर आते हैं।

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