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रात के समय 2 से 4 बार बिस्‍तर से उठना पड़ता है, 50 की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्याएं

बीपीएच और प्रोस्टेट कैंसर दोनों के शुरुआती संकेत काफी हद तक एक जैसे प्रतीत होते हैं, जिसके कारण समय पर सटीक जांच कराना अनिवार्य हो जाता है।

By Rajneesh soniEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sun, 27 Sep 2026 10:17:31 AM (IST)Updated Date: Sun, 27 Sep 2026 10:21:19 AM (IST)
रात के समय 2 से 4 बार बिस्‍तर से उठना पड़ता है, 50 की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्याएं
पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्याएं।

HighLights

  1. '''टर्प'''' ऑपरेशन सबसे पुराना और प्रचलित तरीका है।
  2. यूरोलिफ्ट और रेजुम जैसी आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं।
  3. रक्त का रिसाव बहुत कम होता है। रिकवरी तेज होती है।

लाइफ स्‍टाइल डेस्‍क। उम्र बढ़ने के साथ 50 वर्ष की आयु के पश्चात पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बेहद आम हो जाती हैं। प्रोस्टेट मूत्राशय के ठीक नीचे स्थित अखरोट के आकार की एक महत्वपूर्ण ग्रंथि है। आमतौर पर इसकी दो मुख्य बीमारियां होती हैं—बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) यानी प्रोस्टेट का गैर-कैंसरयुक्त बढ़ना और प्रोस्टेट कैंसर। लोगों में यह एक बड़ा भ्रम फैला हुआ है कि बीपीएच ही आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है, जबकि चिकित्सीय रूप से यह पूरी तरह असत्य है।

बीपीएच और प्रोस्टेट कैंसर दोनों के शुरुआती संकेत काफी हद तक एक जैसे प्रतीत होते हैं, जिसके कारण समय पर सटीक जांच कराना अनिवार्य हो जाता है। इसके प्रमुख लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, विशेष तौर पर रात के समय 2 से 4 बार बिस्तर से उठना, पेशाब की धार का कमजोर होना, पेशाब शुरू करने में अधिक जोर लगाना और मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का अहसास होना शामिल है।


बीपीएच के मामले में ये सभी लक्षण कई वर्षों में धीरे-धीरे गंभीर होते हैं। इसके विपरीत, प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता है। अधिकांश मामलों में यह पीएसए नामक रक्त जांच के दौरान स्तर बढ़ने पर ही पकड़ में आता है। हालांकि, कैंसर के एडवांस या गंभीर चरण में पहुंचने पर पेशाब में खून आना, कमर और कूल्हे की हड्डियों में लगातार तेज दर्द रहना और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन तेजी से कम होना जैसे गंभीर संकेत नजर आने लगते हैं।

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बीपीएच के शुरुआती चरण में अल्फा-ब्लॉकर और प्रोस्टेट का आकार घटाने वाली दवाएं दी जाती हैं। इस दौरान जीवनशैली में बदलाव करते हुए शाम के वक्त पानी का सेवन सीमित करना, एवं चाय, कॉफी और शराब के सेवन से बचना बेहद फायदेमंद साबित होता है।

बीपीएच के लिए दूरबीन पद्धति से किया जाने वाला ''''टर्प'''' ऑपरेशन सबसे पुराना और प्रचलित तरीका है। वर्तमान समय में होलेप लेजर , यूरोलिफ्ट और रेजुम जैसी आधुनिक तकनीकें भी उपलब्ध हैं, जिनमें रक्त का रिसाव बहुत कम होता है और मरीज की रिकवरी बेहद तेज होती है।

डाॅ. विशाल कीर्ति जैन, यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि प्रत्येक पुरुष को 50 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद वर्ष में कम से कम एक बार पीएसए टेस्ट और यूरोलॉजिस्ट से नियमित स्वास्थ्य जांच जरूर करवानी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान होने से प्रोस्टेट कैंसर का संपूर्ण और सफल इलाज पूरी तरह संभव है।