
लाइफस्टाइल डेस्क। सोचिए, अगर आपको गुलाब जामुन बेहद पसंद है, लेकिन सुबह, दोपहर और शाम आपको सिर्फ वही खिलाया जाए, तो क्या होगा? कुछ ही दिनों में उसका नाम सुनकर भी मन ऊब जाएगा। रिश्तों का गणित भी कुछ ऐसा ही है। शुरुआत में प्यार में डूबे लोग घंटों फोन पर बातें करते हैं, हर पल की खबर साझा करते हैं और इसे रिश्ते की मजबूती मानते हैं। लेकिन समय के साथ यही आदत रिश्ते में बोरियत, चिड़चिड़ापन और तनाव का कारण बन सकती है।
अक्सर लोग मानते हैं कि अगर रोज चार-पांच घंटे बात नहीं हुई, तो रिश्ता कमजोर पड़ जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि जरूरत से ज्यादा जुड़े रहना कई बार भावनात्मक दूरी की वजह बन जाता है। जब बातचीत खत्म होकर सिर्फ “और बताओ?” या “तुम बताओ?” जैसे सवाल रह जाएं, तो समझ लेना चाहिए कि अब रिश्ते में रोमांच नहीं, बल्कि आदत रह गई है। ऐसे में जरूरी है कि रिश्ते को सांस लेने की जगह दी जाए, ताकि वह ताजा और मजबूत बना रहे।
जब रिश्ता नया होता है, तो सुबह की ‘गुड मॉर्निंग’ से लेकर रात की ‘गुड नाइट’ तक हर पल साझा करना अच्छा लगता है। घंटों फोन पर बातें करना रोमांचक होता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत मजबूरी और फिर बोझ बन जाती है। जब आप 24 घंटे संपर्क में रहते हैं, तो एक समय ऐसा आता है जब कहने-सुनने के लिए कुछ नया बचता ही नहीं।
लगातार बातचीत कई समस्याओं को जन्म देती है। दिनभर की हर छोटी बात बताने से शाम को मिलने पर कुछ खास नहीं बचता, जिससे बोरियत बढ़ती है। हर वक्त रिप्लाई देने का दबाव मानसिक थकान और झुंझलाहट पैदा करता है। साथ ही, पार्टनर में इतना खो जाना कि अपने शौक, दोस्त और परिवार पीछे छूट जाएं, यह स्वस्थ रिश्ते का संकेत नहीं है।
रिश्ते में स्पेस का मतलब यह नहीं कि प्यार कम है, बल्कि इसका अर्थ है कि दोनों को अपने लिए थोड़ा समय चाहिए। अपनी हॉबी, दोस्तों और रुचियों के लिए वक्त निकालने से आप बेहतर इंसान बनकर रिश्ते में लौटते हैं।
कहावत है, “दूरी से चाहत बढ़ती है।” थोड़ी दूरी पार्टनर की कमी का एहसास कराती है और बातचीत को फिर से खास बनाती है। यही दूरी रिश्ते में ताजगी और गहराई बनाए रखती है।