
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कुछ देर तक खुद को तरोताजा और ऊर्जावान महसूस कराने वाले एनर्जी ड्रिंक्स अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में छह प्रमुख ब्रांड्स के एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री, भंडारण और प्रचार पर रोक लगाने तथा पांच लाख से अधिक कैन और बोतलें जब्त करने के बाद इन पेयों के स्वास्थ्य प्रभावों पर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियामकीय सवालों से अलग, इन ड्रिंक्स का सबसे बड़ा असर लोगों की नींद पर पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन और चीनी की मात्रा सामान्य कोल्ड ड्रिंक की तुलना में अधिक होती है। कैफीन मस्तिष्क में एडेनोसिन नामक रसायन की गतिविधि को कुछ समय के लिए दबा देती है। यही रसायन शरीर को थकान का संकेत देता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति कुछ घंटों तक अधिक सतर्क और सक्रिय महसूस करता है, लेकिन यह वास्तविक ऊर्जा नहीं होती। शरीर की थकान और आराम की आवश्यकता बनी रहती है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि समस्या तब शुरू होती है, जब लोग देर शाम, रात में पढ़ाई, गेमिंग, ऑफिस वर्क या लंबी ड्राइव के दौरान बार-बार एनर्जी ड्रिंक का सेवन करने लगते हैं। इससे नींद आने में देर होती है और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी (बॉडी क्लाक) प्रभावित होने लगती है। लगातार ऐसा होने पर व्यक्ति रोजाना एक-दो घंटे कम सोता है और धीरे-धीरे 'स्लीप डेट' यानी नींद का कर्ज बढ़ने लगता है।
इंदौर के फिजिशियन और स्लीप विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताहांत में ज्यादा देर तक सो लेने से भी इस नींद की पूरी भरपाई नहीं हो पाती। लगातार नींद की कमी से एकाग्रता, स्मरण शक्ति, कार्य क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर उच्च रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शाम के बाद एनर्जी ड्रिंक का सेवन टालना चाहिए। यदि लगातार थकान महसूस हो रही है तो उसका समाधान पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह है, न कि कैफीनयुक्त पेयों पर निर्भरता। खासकर किशोरों, कॉलेज विद्यार्थियों और देर रात तक काम करने वाले युवाओं को इन पेयों का नियमित सेवन करने से बचना चाहिए।
स्लीप डेट का अर्थ है रोजाना शरीर को जितनी नींद चाहिए, उससे लगातार कम सोना। यह कमी धीरे-धीरे जमा होती जाती है और शरीर की कार्यक्षमता पर असर डालती है।
एनर्जी ड्रिंक कुछ समय के लिए सतर्कता बढ़ा सकती है, लेकिन यह शरीर की प्राकृतिक नींद का विकल्प नहीं है। यदि इसका नियमित सेवन कर नींद कम की जाती है तो धीरे-धीरे स्लिप डेट बढ़ती है और इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है।