भोपाल के स्टेट म्यूजियम में गणेश के रंगों में सजा है इतिहास, 19वीं शती की पेंटिंग में दिखता सिंधिया दरबार
संग्रहालय में गणेश जी के गौरी गणेश, सौम्य स्वरूप, बाल्यकाल के क्रीड़ारत रूप, उच्छिष्ट रूप में शक्ति के साथ, सिद्धि के साथ, देवप्रकोष्ठ में रत्नजड़ित म...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 12:17:43 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 12:30:08 PM (IST)
भोपाल के स्टेट म्यूजियम में प्राचीन गणेश प्रतिमाएं।HighLights
- गणेश उत्सव पर भोपाल राज्य संग्रहालय में देख सकते हैं विघ्नहर्ता के दुर्लभ रूप।
- राजदरबार से लेकर ऋद्धि-सिद्धि और मां सरस्वती के साथ नजर आते हैं गणेश।
- यहां पर उस दौर की कला, वेशभूषा और राजसी जीवन की झलक भी मिलती है।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। गणेश उत्सव में घर-घर विराजने वाले विघ्नहर्ता के स्वरूप को अगर कला और इतिहास की नजर से देखना हो तो राज्य संग्रहालय की गैलरियां खास हैं। यहां गणेश जी केवल पाषाण प्रतिमाओं में ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी पेंटिंग्स में भी अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं।
कहीं वे राजदरबार में विधिवत पूजे जा रहे हैं, तो कहीं ऋद्धि-सिद्धि के साथ राजसी ठाठ में विराजमान हैं। एक पेंटिंग में गणेश जी के साथ मां सरस्वती की मनमोहक छवि भी उकेरी गई है। इन कलाकृतियों के जरिए गणेश पूजा की परंपरा के साथ उस दौर की कला, वेशभूषा और राजसी जीवन की झलक भी मिलती है।
पुरातत्वविद् बी.के. लोखंडे ने बताया कि संग्रहालय में गणेश जी के गौरी गणेश, सौम्य स्वरूप, बाल्यकाल के क्रीड़ारत रूप, उच्छिष्ट रूप में शक्ति के साथ, सिद्धि के साथ, देवप्रकोष्ठ में रत्नजड़ित मुकुट धारण किए, एकदंत और अष्टभुजी नृत्यरत स्वरूप देखने को मिलते हैं।
कुछ प्रतिमाएं स्थानक तो कुछ आसनस्थ मुद्रा में हैं। इन पाषाण कलाकृतियों के साथ गणेश पूजा की प्राचीन परंपरा के प्रमाण भी मिलते हैं। संग्रहालय में मौजूद कई प्रतिमाएं देश में उपलब्ध प्राचीन गणेश प्रतिमाओं में शामिल हैं।
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19वीं शती की पेंटिंग में जीवाजीराव के साथ पूरा दरबार
- राज्य संग्रहालय की सबसे आकर्षक पेंटिंग्स में से एक 19वीं शती की यह कलाकृति है, जिसमें सिंधिया दरबार की गणेश पूजा का पूरा दृश्य उकेरा गया है। मराठा शैली में बनी इस पेंटिंग को एक अंग्रेज कलाकार ने तैयार किया था।
इसमें महाराजा जीवाजीराव सिंधिया अपने दरबारियों और कर्मचारियों के साथ गणेश जी की पूजा करते दिखाई देते हैं। पेंटिंग की खासियत इसका विस्तृत चित्रण है। इसमें करीब 120 चेहरे बेहद बारीकी से बनाए गए हैं। इनमें कई प्रमुख लोगों के नाम भी मोड़ी लिपि में लिखे गए हैं।
चित्र में गणेश जी की प्रतिमा पूजा स्थल पर स्थापित है। सामने पूजा की सामग्री सजी है और उसके आसपास दरबारी बैठे हैं। निचले हिस्से में भव्य आसन पर महाराजा जीवाजीराव सिंधिया विराजमान हैं।
उनके सामने और आसपास अलग-अलग समूहों में दरबारी, कर्मचारी, पुजारी और अन्य लोग दिखाई देते हैं। सजे हुए कक्ष, रंगीन पर्दे, छत से लटकती सजावटी वस्तुएं और राजसी साज-सज्जा उस समय के दरबार का वातावरण जीवंत कर देती हैं।
इस पेंटिंग को और खास बनाते हैं इसमें लिखे नाम। मोड़ी लिपि में दर्ज नामों के आधार पर चित्र में मौजूद प्रमुख व्यक्तियों की पहचान की जा सकती है।
महाराष्ट्र के शोध सहायक अमोल महाले के अनुसार, इसमें जीवाजीराव शिंदे आलिज्या बहादुर, कोठी सरकार, हुजूर के हुजूर रहीमान, आप्पा साहेब आंग्रे, बापू साहेब घोरपाड़े, बापू साहेब सिताळे के पुत्र, बापू भालदार और गोविंद बावा सहित दरबार से जुड़े लोगों को अंकित किया गया है।
इस लिहाज से यह पेंटिंग केवल गणेश पूजा का दृश्य नहीं, बल्कि सिंधिया दरबार की सामाजिक और राजकीय व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऋद्धि-सिद्धि के साथ राजसी अंदाज में गणेश
एक अन्य पेंटिंग में भगवान गणेश राजसी अंदाज में विराजमान हैं और उनके दोनों ओर ऋद्धि-सिद्धि खड़ी दिखाई देती हैं। गणेश जी स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित सिंहासन पर विराजमान हैं। आसपास का प्राकृतिक परिवेश, बारीक रेखांकन और रंगों का संतुलित प्रयोग चित्र को आकर्षक बनाता है। 19वीं शती की यह पेंटिंग राजपूत चित्रशैली की कलात्मक विशेषताओं को दर्शाती है।
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गणेश के साथ मां सरस्वती की मनमोहक छवि
एक पेंटिंग में भगवान गणेश और मां सरस्वती को प्राकृतिक परिवेश में दर्शाया गया है। कमल पर विराजमान गणेश जी के हाथों में उनके पारंपरिक आयुध हैं, जबकि मां सरस्वती वीणा बजाती हुई दिखाई देती हैं। पेड़-पौधों, हरियाली और खुले आकाश के बीच दोनों देवताओं को सहज रूप में उकेरा गया है। खास बात यह है कि कलाकार ने बहुत अधिक रंगों का इस्तेमाल किए बिना चित्र में गहराई और सौंदर्य पैदा किया है। सीमित रंगों का संतुलित प्रयोग इस पेंटिंग को विशिष्ट बनाता है। यह भी 19वीं शती की राजपूत चित्रशैली की कलात्मकता को दर्शाती है।