धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ ही मनाया जा रहा है।
इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला (बिना अन्न और जल के) व्रत रखती हैं तथा भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज सम्पूर्ण पूजन सामग्री लिस्ट (Checklist)
पूजा को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए नीचे दी गई सामग्रियों को पहले से ही एकत्रित कर लें:
1. मुख्य प्रतिमाएं व मंडप सामग्री-
- बालू (रेत) या शुद्ध मिट्टी से बनी भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश जी की प्रतिमाएं
- पूजा की चौकी या लकड़ी का आसन
- मंडप सजाने के लिए केले के पत्ते
- कच्चा सूत
2. सुहाग (श्रृंगार) सामग्री-
लाल चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, कांच की चूड़ियां, आलता, मेहंदी, काजल, कंघी, बिछिया, पायल और अन्य सुहाग की वस्तुएं
3. पूजन एवं अभिषेक सामग्री-
- रोली, अक्षत (चावल), हल्दी, चंदन (सफेद व लाल)
- पंचामृत बनाने हेतु: शुद्ध दूध, दही, शहद, शक्कर और देशी घी
- जल और पवित्र गंगाजल, पूजा का कलश
- 1 पानी वाला नारियल
- दूर्वा घास, बेलपत्र, शमी पत्र, कच्ची हल्दी की गांठें
- मौली (रक्षासूत्र), गेहूं या चावल (अनाज)
- पान के पत्ते और सुपारी
- ताजा फूलों की माला और विविध फूल
4. आरती व दीपक सामग्री-
- देशी घी का दीपक, अगरबत्ती या धूपबत्ती
- कपूर, रुई की बत्तियां, माचिस
5. भोग व प्रसाद सामग्री-
- ऋतु फल (केला, सेब आदि) और पारंपरिक मिठाइयां
- घर में बनी खीर और हलवा
- भिगोए हुए चने
हरतालिका तीज व्रत के 8 प्रमुख एवं अनिवार्य नियम
- निर्जला उपवास: यह व्रत पूरी तरह से निर्जला रखा जाता है। व्रत के दौरान महिलाएं दिनभर अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं।
- शिव-पार्वती व गणेश पूजन: व्रत वाले दिन मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की हस्तनिर्मित प्रतिमाएं बनाकर ही पूजन करने का विधान है।
- व्रत का संकल्प व निरंतरता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत यदि एक बार शुरू कर दिया जाए, तो इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता। इसे प्रतिवर्ष नियमपूर्वक किया जाता है।
- रात्रि जागरण का महत्व: इस व्रत में रात भर जागकर भगवान शिव और माता पार्वती के भजनों का कीर्तन करने (रात्रि जागरण) का विशेष महत्व है।
- कथा का श्रवण: हरतालिका तीज की पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना जाता है। इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।
- प्रतिमा विसर्जन: पूजा समाप्त होने के बाद अगले दिन सुबह मिट्टी की बनाई गई प्रतिमाओं का विधिवत विसर्जन किया जाता है।
- व्रत का पारण: यह व्रत अगले दिन (चतुर्थी तिथि को) सूर्योदय के बाद और पूजा-अर्चना संपन्न करने के उपरांत ही जल ग्रहण करके खोला जाता है।
- अखंड सौभाग्य का वरदान: यह सुहागिनों का सबसे बड़ा व्रत है, जिसे सच्चे मन से करने पर पति को दीर्घायु प्राप्त होती है और दांपत्य जीवन में सदैव खुशहाली बनी रहती है।
(नोट: यह जानकारी सनातन परंपराओं, धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं पर आधारित है।)
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