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History of Bhopal: गली नूर महल जहां आज भी नवाबी दौर की हवेलियों और दरवाजों के निशां मौजूद

पुरानी इमारत को देखने अक्सर वास्तुकला के विद्यार्थी और हेरिटेज वॉक करने वाले लोग यहां आते हैं। दीवारों की बनावट, मेहराबें और पुराने दरवाजे उनके लिए बी...और पढ़ें

By Abrar KhanEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 12:55:29 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 01:17:09 PM (IST)
History of Bhopal: गली नूर महल जहां आज भी नवाबी दौर की हवेलियों और दरवाजों के निशां मौजूद
गली नूर महल, भोपाल।

HighLights

  1. यह पूरा इलाका नूर महल के नाम से ही जाना जाता है।
  2. पास ही कभी नवाब सिद्दीक हसन खान रहा करते थे।
  3. इस जगह को बालाखाना के नाम से भी जाना जाता रहा है।

मोहम्मद अबरार खान, नवदुनिया, भोपाल। आलीशान इमारतों के बीच से निकलती तंग गलियों में जब पुराने दरवाजों की मेहराबों से होकर गुजरते हैं तो ऐसा महसूस होता है, जैसे वक्त अचानक पीछे लौट गया हो। कहीं हवेली की झलक दिखाई देती है तो कहीं किसी पुराने दरवाजे की नक्काशी नवाबी दौर की शान-ओ-शौकत की याद दिलाती है। पुराने भोपाल की फिजा में आज भी ऐसे कई निशां मौजूद हैं, जो शहर की तहज़ीब, वास्तुकला और तारीख को अपने में समेटे हुए हैं।

ऐसी ही एक गली है नूर महल। रॉयल मार्केट रोड से नूर महल की तरफ दाखिल होते ही छोटी-छोटी मेहराबों के बीच से गुजरते हुए आगे बढ़ते ही कुछ पुराने हवेलीनुमा दरवाजे पार करने के बाद एक पुरानी इमारत के अवशेष नजर आते हैं।


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यहां रहने वाले रिजवान उल्लाह बताते हैं कि यह हवेली किसी महल का हिस्सा नहीं, लेकिन पूरा इलाका नूर महल के नाम से ही जाना जाता है। पास ही कभी नवाब सिद्दीक हसन खान रहा करते थे। इस जगह को बालाखाना के नाम से भी जाना जाता रहा है।

वक्त के गुजरा तो यहां एक मेंहदी का कारखाना बनने के बाद इस गली को कुछ लोग मेंहदी वाली गली भी कहने लगे। पुराने दरवाजों और इमारत के बचे हुए हिस्सों में आज भी बीते दौर की वास्तुकला की झलक दिखाई देती है।

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रिजवान उल्लाह बताते हैं कि पुरानी इमारत को देखने अक्सर वास्तुकला के विद्यार्थी और हेरिटेज वॉक करने वाले लोग यहां आते हैं। दीवारों की बनावट, मेहराबें और पुराने दरवाजे उनके लिए बीते जमाने की एक खुली किताब जैसे हैं।

उनका कहना है कि यह इमारत अब सिर्फ एक पुराना ढांचा नहीं, बल्कि पुराने भोपाल की यादों और विरासत की निशानी है। इसे इसी हालत में संभालकर रखने की कोशिश है, ताकि आने वाली नस्लें भी अपने शहर के इस बीते दौर की खुशबू महसूस कर सकें।