लाइफस्टाइल डेस्क। कैंसर को आज भी दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक माना जाता है, जिसका मुख्य कारण अक्सर इसकी पहचान में होने वाली देरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था (Early Stage) में कर ली जाए, तो मेडिकल साइंस की आधुनिक तकनीकों की मदद से मरीज की जान बचाना पूरी तरह संभव है।
स्टेज-1 - जब शरीर के भीतर सुलगती है बीमारी
कैंसर का प्रथम चरण, जिसे 'प्रारंभिक अवस्था' कहा जाता है, बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसे डॉक्टरों ने दो उप-चरणों में बांटा है-
स्टेज 1A - इसमें कैंसर के ऊतक (Tissues) केवल 2 से 3 सेमी के होते हैं और अपने मूल अंग तक ही सीमित रहते हैं।
स्टेज 1B - इस चरण में कोशिकाओं का आकार बढ़ने लगता है। हालांकि यह मुख्य अंग में ही रहता है, लेकिन कुछ मामलों में इसके दूसरे अंगों तक फैलने (Metastasis) की संभावना शुरू हो जाती है।
इलाज - इस स्थिति में 'रिसेक्स्न' सर्जरी के जरिए प्रभावित हिस्से को निकालना सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा (Radiation) का भी सहारा लिया जाता है।
स्टेज-2 - आसपास के अंगों पर पड़ता है प्रभाव
कैंसर का दूसरा चरण ज्यादा गंभीर होता है क्योंकि इसमें संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगता है-
स्टेज 2A और 2B - इस अवस्था में कैंसर कोशिकाएं 'लिम्फ नोड्स' (Lymph Nodes) और आसपास के अंगों तक पहुँच जाती हैं।
इलाज की प्रक्रिया - विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरे चरण में आमतौर पर पहले सर्जरी की जाती है और फिर बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए कीमोथेरेपी या रेडिएशन का उपयोग होता है।
कैसे होती है पहचान? आधुनिक जांच तकनीकें
कैंसर के 100 से भी ज्यादा प्रकार हैं, इसलिए इसकी पहचान के लिए अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं-
बायोप्सी - प्रभावित हिस्से से छोटा ऊतक लेकर उसकी जांच करना।
मेमोग्राम - स्तन कैंसर की पहचान के लिए।
MRI - ब्रेन ट्यूमर और अन्य आंतरिक गांठों का पता लगाने के लिए।
विशेषज्ञ की सलाह
कैंसर अब लाइलाज नहीं है। घबराने के बजाय शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति जागरूक रहें। यदि उपचार के सामान्य तरीके काम न करें, तो 'नैदानिक परीक्षण' (Clinical Trials) एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।