
लाइफस्टाइल डेस्क। स्वस्थ व्यक्तियों को भी हृदय संबंधी नियमित जांच कराते रहना चाहिए ताकि किसी भी छिपे हुए जोखिम या शुरुआती समस्या का समय पर पता लगाया जा सके। 20 से 30 साल के आयु वर्ग के लिए यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो हर 4 से 6 साल में रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की सामान्य जांच पर्याप्त है।
यही नहीं 30 से 40 वर्ष की आयु वालों को हर 2 से 4 साल में जांच करवाएं। यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, तो डाॅक्टर की सलाह पर जांच जल्दी और अधिक बार की जानी चाहिए।
40 वर्ष और उससे अधिक के लिए इस उम्र के बाद सालाना (हर साल) नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराना बेहद फायदेमंद होता है।
मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल, रक्त शर्करा व ईसीजी जांचें ह्दय संबंधी होती हैं। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए, जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह या थायरॉइड की समस्या है।

जिनके परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को कम उम्र में दिल की बीमारी हुई हो। जो धूम्रपान करते हैं या अत्यधिक तनावपूर्ण जीवन जीते हैं।
नियमित ह्दय संबंधी जोखिम को कम करने में सहायक होता है। इससे समस्या का पता शुरूआती स्टेज में चल जाता है।
(भाविक धीरावाणी, ह्दय रोग विशेषज्ञ)
खाली पेट (Fasting): जो लोग कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाएं (स्टेटिंस) नहीं लेते हैं, वे बिना कुछ खाए-पिए (खाली पेट) रहे बिना भी सामान्य जांच करवा सकते हैं। डॉक्टर के कहने पर ही 9 से 12 घंटे की फास्टिंग करें।
लिपिड प्रोफाइल टेस्ट: इस रक्त परीक्षण से शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल, 'अच्छा' एचडीएल (HDL), 'बुरा' एलडीएल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर मापा जाता है।
सामान्य स्तर: वयस्क के लिए कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 200 mg/dL से कम होना चाहिए और एलडीएल (LDL) 100 mg/dL से कम होना सबसे अच्छा माना जाता है।
बढ़ने के संकेत: हाथ-पैरों की उंगलियों में झनझनाहट, सीने में दर्द या अत्यधिक कमजोरी हाई कोलेस्ट्रॉल के संकेत हो सकते हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश की एक बड़ी शहरी आबादी हाई कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित है।