
लाइफस्टाइल डेस्क। बाजार में कोई भी पैकेट बंद चीज खरीदते समय हम अक्सर उसका स्वाद, कीमत और ब्रांड देखते हैं। कई लोग पैकेट पर ‘हेल्दी’, ‘मल्टीग्रेन’, ‘शुगर फ्री’ या ‘लो फैट’ लिखा देखकर भी उसे सेहत के लिए अच्छा मान लेते हैं। लेकिन क्या पैकेट पर लिखे इन दावों का मतलब हमेशा यह होता है कि वह चीज सेहतमंद है? जरूरी नहीं। किसी खाद्य पदार्थ की असली जानकारी उसके फूड लेबल पर मिलती है। इसमें कैलोरी, चीनी, नमक, फैट, प्रोटीन और दूसरी जरूरी चीजों की मात्रा दी होती है। अगर इसे सही तरीके से पढ़ना आ जाए, तो खरीदारी के समय बेहतर विकल्प चुनना आसान हो सकता है।
फूड लेबल पढ़ते समय सबसे पहले यह देखें कि पोषण संबंधी जानकारी कितनी मात्रा के लिए दी गई है। इसे सर्विंग साइज कहा जाता है। कई बार पैकेट में दो या तीन सर्विंग होती हैं, लेकिन हम पूरा पैकेट एक बार में खा लेते हैं।
उदाहरण के लिए, अगर किसी चिप्स के पैकेट पर 100 ग्राम में 500 कैलोरी लिखी हैं, लेकिन पूरा पैकेट 200 ग्राम का है, तो पूरा पैकेट खाने पर लगभग 1,000 कैलोरी मिलेंगी। इसलिए सिर्फ पैकेट पर लिखी कैलोरी देखकर फैसला न करें, बल्कि यह भी देखें कि आप वास्तव में कितनी मात्रा खा रहे हैं।
कई पैकेट बंद खाद्य पदार्थों में चीनी अलग-अलग नामों से मौजूद हो सकती है। फूड लेबल पर Sugar, Glucose Syrup, Fructose, Dextrose और Maltose जैसे शब्द दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सिर्फ यह देखकर किसी चीज को हेल्दी न मानें कि उसमें सामान्य चीनी का नाम नहीं लिखा है।
उदाहरण के लिए, फ्लेवर्ड दही, ब्रेकफास्ट सीरियल और पैकेट बंद ड्रिंक्स में भी चीनी हो सकती है। लेबल पर कुल चीनी और जहां जानकारी उपलब्ध हो, वहां अतिरिक्त चीनी की मात्रा जरूर देखें। ध्यान रखें कि कुल चीनी में प्राकृतिक रूप से मौजूद चीनी भी शामिल हो सकती है।
पैकेट पर सोडियम या नमक की मात्रा देखना जरूरी है। सोडियम का ज्यादा सेवन हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को बढ़ा सकता है। चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, नमकीन और कई रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है।
इसी तरह, फैट की कुल मात्रा के साथ सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट पर भी ध्यान दें। सैचुरेटेड फैट का ज्यादा सेवन LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में योगदान दे सकता है। ट्रांस फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों से बचना बेहतर है। सिर्फ ‘लो फैट’ लिखा देखकर किसी उत्पाद को बेहतर न मानें, क्योंकि उसमें चीनी या नमक की मात्रा ज्यादा हो सकती है।
फूड लेबल पर Ingredients यानी सामग्री की सूची भी दी होती है। आमतौर पर इसमें सामग्री को वजन के हिसाब से ज्यादा से कम मात्रा के क्रम में लिखा जाता है। अगर चीनी, सिरप या रिफाइंड अनाज सूची में शुरुआत में हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि उत्पाद में उनकी मात्रा ज्यादा है।
उदाहरण के लिए, किसी मल्टीग्रेन ब्रेड में कई तरह के अनाज होने का दावा किया जा सकता है, लेकिन अगर मुख्य सामग्री रिफाइंड आटा है, तो उसे पूरी तरह साबुत अनाज से बनी ब्रेड के बराबर नहीं माना जा सकता। इसलिए पैकेट के सामने लिखे दावों के साथ सामग्री की सूची भी पढ़ें।
खरीदारी करते समय एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और पैकेट की स्थिति देखना भी जरूरी है। इसके साथ ‘शुगर फ्री’, ‘ऑर्गेनिक’, ‘नेचुरल’ और ‘हाई प्रोटीन’ जैसे दावों को समझें। ये शब्द अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं हैं कि उत्पाद हर व्यक्ति के लिए सेहतमंद है।
फूड लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी, सामग्री की सूची और उत्पाद से जुड़े दावों को एक साथ देखकर ही फैसला करना चाहिए। इससे आप सिर्फ विज्ञापन या आकर्षक पैकेजिंग के आधार पर खरीदारी करने के बजाय अपने लिए बेहतर खाद्य विकल्प चुन सकते हैं।