
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर में मानसूनी वर्षा के थमते ही मौसम का मिजाज एक बार फिर बदल गया है। सूरज की तल्ख किरणों और हवा में बढ़ी नमी ने शहरवासियों को बेहाल कर दिया है। तापमान में बढ़ोतरी के साथ-साथ उमस इतनी अधिक हो गई है कि घर से बाहर निकलते ही लोग पसीने से तर-बतर हो रहे हैं। इस चिपचिपी गर्मी और पसीने की समस्या से निजात पाने के लिए शहर के लोग अब अपने पहनावे में बड़ा बदलाव कर रहे हैं। बाजार में इन दिनों पतले काटन यानी सूती कपड़ों और होजयरी टी-शर्ट की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है।
भीषण उमस के इस दौर में काॅटन फैब्रिक लोगों की पहली पसंद बन चुका है। कपड़ा विशेषज्ञों और डाॅक्टरों का भी मानना है कि अत्यधिक नमी और पसीने वाले मौसम में हल्के व सांस लेने योग्य यानि ब्रीथेबल कपड़े पहनना सेहत और त्वचा दोनों के लिए फायदेमंद होता है। काटन के कपड़े न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पसीने को तेजी से सोखकर त्वचा को सूखा रखते हैं। इससे घमौरियों और त्वचा संबंधी संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।
काटन के साथ-साथ युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच होजरी से बनी टी-शर्ट्स का क्रेज भी तेजी से बढ़ा है। आरामदायक, लचीली और हल्की होने के कारण होजरी टी-शर्ट्स दैनिक दिनचर्या और दफ्तरी काम के दौरान काफी राहत पहुंचा रही हैं। महिलाएं और युवतियां जहां काटन के ढीले-ढाले कुर्ते, प्लाजो और काटन साड़ियों को प्राथमिकता दे रही हैं, वहीं पुरुष काटन शर्ट्स, होजरी टी-शर्ट और हल्के लिनन-काटन लोअर्स की खरीदारी में रुचि दिखा रहे हैं।
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कपड़ा बाजार पर युद्ध की मार... सिंथेटिक कपड़ों के दाम 15% तक उछले, सूरत की मिलों में उत्पादन ठप
मौसम के इस मिजाज को देखते हुए शहर के प्रमुख कपड़ा बाजारों जैसे बाड़ा, मुरार और सिटी सेंटर में काटन कलेक्शन की बहार आ गई है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक इन दिनों भड़कीले रंगों की बजाय हल्के और शांत रंगों जैसे सफेद, स्काई ब्लू, क्रीम, मिंट ग्रीन और पेस्टल शेड्स वाले कपड़े अधिक पसंद कर रहे हैं। ये रंग न केवल आंखों को सुहाते हैं, बल्कि धूप और गर्मी को भी कम अवशोषित करते हैं।

इस मौसम में फैशनेबल दिखने से ज्यादा जरूरी आरामदायक महसूस करना है। काटन और होजरी फैब्रिक शरीर को हल्कापन प्रदान करते हैं, जिससे दिनभर की भागदौड़ के दौरान चिपचिपी गर्मी से राहत मिलती है। यही वजह है कि त्योहारों और शादियों के इस सीजन की शुरुआती सुगबुगाहट के बीच भी लोग भारी और सिंथेटिक कपड़ों को दरकिनार कर हल्के काटन वियर को ही अपनी अलमारी में जगह दे रहे हैं।