डायरिया, टाइफाइड या हेपेटाइटिस-A? जानिए पीने के पानी में छिपे वो खतरे जो परिवार को कर सकते हैं बीमार
गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशुली त्रिवेदी के अनुसार, व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से डायरिया, टाइफाइड, कॉलरा और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर जल-जनित बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 06:47:21 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 06:47:21 PM (IST)

हेल्थ डेस्क। व्यक्तिगत स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता अनेक गंभीर संक्रामक रोगों से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंशुली त्रिवेदी ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जारी करते हुए बताया कि थोड़ी सी लापरवाही और दूषित जल या अस्वच्छ खान-पान से डायरिया (दस्त), टाइफाइड, हैजा (कॉलरा) और हेपेटाइटिस-ए (पीलिया) जैसी जल-जनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
डॉ. त्रिवेदी के अनुसार, इन बीमारियों से खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ घर और आसपास के वातावरण की शुचिता बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
सुरक्षित पेयजल के लिए जरूरी सावधानियां
- उबालकर पिएं पानी: यदि पानी की गुणवत्ता संदिग्ध लगे या शुद्धता पर संदेह हो, तो पानी को अच्छी तरह उबालकर और ठंडा करके ही उपयोग में लाएं।
- भंडारण और रखरखाव: पीने के पानी को हमेशा साफ और अच्छी तरह ढके हुए बर्तनों में रखें। पानी निकालने के लिए लंबे हैंडल वाले साफ बर्तन का उपयोग करें, ताकि उंगलियां पानी को दूषित न करें
- पानी की टंकियों की सफाई: घरों में छत पर रखी पानी की टंकियों और स्टोरेज टैंकों की नियमित अंतराल पर सफाई सुनिश्चित करें।
खान-पान और स्वच्छता से जुड़ी आदतें
- हाथ धोने की आदत: भोजन पकाने से पहले, खाना खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद नियमित रूप से साबुन और साफ पानी से हाथ धोएं।
- खुले खाद्य पदार्थों से परहेज: बाजार में खुले में बिकने वाले कटे फल, बिना ढका भोजन और सड़क किनारे मिलने वाले दूषित पानी या बर्फ से पूरी तरह बचें।
- भोजन का भंडारण: घर में भी पका हुआ भोजन हमेशा ढककर रखें। कच्चे खाद्य पदार्थों (कच्ची सब्जियां आदि) और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें ताकि क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचा जा सके।
संवेदनशील वर्ग बरतें विशेष सतर्कता
छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता (कमजोर इम्यूनिटी) वाले व्यक्तियों पर संक्रमण का असर बहुत जल्दी और गंभीर होता है। ऐसे लोगों के खान-पान और पानी की शुद्धता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
चेतावनी और सलाह
यदि परिवार में किसी भी सदस्य को लगातार उल्टी, दस्त, तेज बुखार या पेट में तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें और खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लें। डॉ. त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि स्वच्छता की छोटी-छोटी दैनिक आदतें अपनाकर हम बड़े स्वास्थ्य संकटों से आसानी से बच सकते हैं।