
लाइफस्टाइल डेस्क। दांतों में सड़न, मसूड़ों से खून आना, बदबू, संवेदनशीलता और दर्द जैसी परेशानियां शुरुआती दौर में सामान्य लग सकती हैं, लेकिन समय पर ध्यान नहीं देने पर समस्या गंभीर हो सकती है।
बुधवार को नईदुनिया हेलो डाॅक्टर कार्यक्रम में ओरल एंड डेंटल सर्जन डाॅ. ऋषभ जैन ने पाठकों के सवालों के जवाब देते हुए दांतों की सफाई, ब्रश करने का सही तरीका, मसूड़ों की देखभाल और बच्चों की ओरल हेल्थ से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उन्होंने बताया कि केवल दांतों को चमकाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मसूड़ों और मुंह की संपूर्ण स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर मीठी चीजों के अधिक सेवन के बाद सफाई नहीं करने से दांतों में कैविटी का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने नियमित डेंटल चेकअप की जरूरत भी बताई।
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सवाल: दांतों में अक्सर दर्द रहता है। क्या दर्द होने पर ही डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए?-अनिल कुमार, रिंगनोद
जवाब: दांत में दर्द होना समस्या का संकेत है, लेकिन डेंटिस्ट के पास जाने के लिए दर्द का इंतजार नहीं करना चाहिए। दांतों में शुरुआती सड़न या मसूड़ों की बीमारी कई बार बिना दर्द के भी बढ़ती रहती है। नियमित जांच से ऐसी समस्या शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ सकती है और उपचार भी आसान रहता है। दर्द की दवा लेकर समस्या को लंबे समय तक टालना उचित नहीं है, क्योंकि इससे बीमारी बढ़ सकती है।
सवाल: सही तरीके से ब्रश करने का तरीका क्या है और दिन में कितनी बार ब्रश करना चाहिए? - यश देवड़ा, अलकापुरी
जवाब: सामान्य तौर पर दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए। ब्रश करते समय बहुत ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे मसूड़ों और दांतों की बाहरी सतह को नुकसान पहुंच सकता है। ब्रश को मसूड़ों की लाइन के पास हल्के हाथ से चलाएं और दांतों की सभी सतहों की सफाई करें। केवल आगे के दिखाई देने वाले दांतों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। जीभ की सफाई भी जरूरी है।
सवाल: बच्चों के दांतों की देखभाल में अभिभावकों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? -वरुण मित्थनखेड़ी वाले, रतलाम
जवाब: बच्चों में दांतों की देखभाल बचपन से शुरू करना जरूरी है। बच्चों को नियमित ब्रश करने की आदत डालें और शुरुआत में अभिभावक स्वयं ब्रश करवाकर सही तरीका समझाएं। टाॅफी, चाकलेट, मीठे पेय और बार-बार स्नैकिंग की आदत को सीमित रखना चाहिए। रात में कुछ मीठा खाने के बाद बिना ब्रश किए सोने से दांतों में सड़न का खतरा बढ़ सकता है। बच्चे के दांतों में काला निशान, दर्द, संवेदनशीलता या मसूड़ों में सूजन दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें। जांच और उपचार से आगे की परेशानी से बचा जा सकता है।