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गर्मी से चाहिए राहत तो जन्नत जैसी है मध्य प्रदेश की ये वादी, चंबल के बीहड़ों के बीच छिपा है 'एमपी का मिनी स्विट्जरलैंड'

भीषण गर्मी, उमस और रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से दूर सुकोन के कुछ पल बिताने के लिए यह जगह किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं है।

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 04:34:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 04:34:44 PM (IST)
गर्मी से चाहिए राहत तो जन्नत जैसी है मध्य प्रदेश की ये वादी, चंबल के बीहड़ों के बीच छिपा है 'एमपी का मिनी स्विट्जरलैंड'
विदेशी लोकेशन जैसा अहसास कराता है पगारा का यह बांध।

HighLights

  1. ग्वालियर से मात्र 75 किलोमीटर दूर है यह छिपी हुई जन्नत
  2. विदेशी लोकेशन जैसा अहसास कराता है पगारा का यह बांध
  3. पानी का स्तर बढ़ते ही अपने आप खुल जाते हैं बांध के 7 गेट

लाइफस्टाइल डेस्क। चंबल का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के जेहन में सूखे बीहड़ और पथरीली घाटियों की तस्वीर उभरती है, लेकिन मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक ऐसी छिपी हुई जन्नत मौजूद है जो इस धारणा को पूरी तरह बदल देती है। भीषण गर्मी, उमस और रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से दूर सुकोन के कुछ पल बिताने के लिए यह जगह किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं है। चंबल के इसी अंचल में स्थित एक खूबसूरत जलाशय को अपनी अद्भुत प्राकृतिक बनावट के कारण अब 'मध्य प्रदेश का मिनी स्विट्जरलैंड' कहा जाने लगा है।

नीले पानी के बीच तैरते मिट्टी के आइलैंड

इस शांत और ठंडे पर्यटन स्थल की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ का 'पगारा डैम' है। इस बांध की भौगोलिक बनावट इतनी आकर्षक है कि जब गर्मी के दिनों में जलाशय का जलस्तर थोड़ा कम होता है, तो पानी के बीच से मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे टीले उभर आते हैं। नीले शांत जल के बीच खड़े ये टीले दूर से देखने पर किसी खूबसूरत और अनछुए समुद्री आइलैंड (द्वीप) की तरह दिखाई देते हैं। इस हैरतअंगेज नजारे को कैमरे में कैद करने के लिए दूर-दूर से प्रकृति प्रेमी यहाँ खिंचे चले आते हैं।


ब्रिटिश काल की अनूठी इंजीनियरिंग और 'सतमोरा'

ऐतिहासिक और तकनीकी दृष्टि से भी यह बांध बेहद खास है। पगारा बांध का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल के दौरान किया गया था। आज के आधुनिक दौर में भी इसकी पुरानी इंजीनियरिंग हैरान करने वाली है। इस बांध में कुल सात विशाल जलद्वार (गेट्स) बनाए गए हैं, जिन्हें क्षेत्रीय लोग आदर से 'सतमोरा' कहकर पुकारते हैं। इस बांध का ऑटोमैटिक सिस्टम इतना सटीक है कि जलाशय में पानी का स्तर तय सीमा से ऊपर पहुंचते ही इसके भारी-भरकम गेट बिना किसी मानवीय प्रयास के अपने आप खुल जाते हैं।

हरी-भरी पहाड़ियों की प्राकृतिक सुरक्षा

पगारा बांध एक विशाल घाटी के बीचोबीच स्थित है, जो चारों तरफ से ऊंची, हरी-भरी और खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ है। पहाड़ों की इस प्राकृतिक चहारदीवारी के एक हिस्से पर मजबूत कंक्रीट की दीवार और गेट्स बनाकर इस विशाल जलस्रोत को सहेजा गया है। पहाड़ियों से घिरे होने की वजह से मैदानी इलाकों की तुलना में यहाँ का तापमान काफी कम और हवा बेहद ठंडी व सुकून देने वाली होती है।

आसन नदी: मुरैना की जीवनदायिनी

इस विशाल जलाशय से 'आसन नदी' का उद्गम होता है। पगारा डैम सिर्फ सैलानियों के घूमने-फिरने का जरिया नहीं है, बल्कि यह मुरैना और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस नदी का पानी चंबल अंचल के हजारों किसानों के खेतों तक पहुंचता है और फसलों को सींचकर इलाके में खुशहाली लाता है।

कैंपिंग और सूर्यास्त का अलौकिक नजारा

ग्वालियर शहर से महज 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह शांत वादी वीकेंड मनाने के लिए एक मुफीद जगह है। यहाँ फैली हरी-घास की ढलानें, छोटे जलभराव और फैले हुए मैदान एडवेंचर के शौकीनों को टेंट लगाकर कैंपिंग करने के लिए आमंत्रित करते हैं। शाम के समय यहाँ ढलते हुए सूरज की लालिमा जब पानी पर बिखरती है, तो वह नजारा किसी जादू की तरह मुसाफिरों की सारी थकान मिटा देता है।

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सफर और ठहरने का सुगम मार्ग

मुरैना जिले की जौरा तहसील से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित इस बांध तक का सफर बेहद आसान है। देश के किसी भी हिस्से से ट्रेन या बस के जरिए आसानी से मुरैना जिला मुख्यालय पहुंचा जा सकता है। वहां से स्थानीय टैक्सियों, निजी वाहनों या जौरा से मिलने वाले साधनों की मदद से इस छिपे हुए प्राकृतिक खजाने तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।