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सीने में दर्द को गैस या एसिडिटी समझकर इग्‍नोर करना पड़ सकता है भारी, दिल का दौरा किसी भी समय संभव

विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल के दौरे में सीने में दर्द, दबाव या भारीपन के साथ सांस फूलना, पसीना आना, जी मिचलाना और बांह, पीठ या जबड़े में तकलीफ जैसे लक्षण...और पढ़ें

By Pooja GiteEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 03 Oct 2026 10:58:07 AM (IST)Updated Date: Sat, 03 Oct 2026 11:26:32 AM (IST)
सीने में दर्द को गैस या एसिडिटी समझकर इग्‍नोर करना पड़ सकता है भारी, दिल का दौरा किसी भी समय संभव
हार्ट अटैक के लक्षण।

HighLights

  1. रोजमर्रा की आदतों में बदलाव भी दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
  2. तंबाकू से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित भोजन जरूरी है।
  3. भोजन में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को शामिल करना चाहिए।

लाइफस्‍टाइल डेस्‍क। दिल की तकलीफ के संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है। कई बार लोग सीने में दर्द या भारीपन को गैस और एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल का दौरा किसी भी समय आ सकता है और ऐसे में इलाज में देरी गंभीर हो सकती है।

इस पर विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल के दौरे में सीने में दर्द, दबाव या भारीपन के साथ सांस फूलना, पसीना आना, जी मिचलाना और बांह, पीठ या जबड़े में तकलीफ जैसे लक्षण हो सकते हैं। हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते। यदि ऐसी तकलीफ नई है, लगातार बनी हुई है या चिंता पैदा कर रही है तो घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।


इंटरवेंशनल कार्डियोलाजिस्ट डाॅ. वत्सल कयाल का कहना है कि दिल की सेहत का ध्यान किसी आपात स्थिति से पहले ही रखना जरूरी है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्राल लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के दिल की बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और डाक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना जरूरी है।

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रोजमर्रा की आदतों में बदलाव भी दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। तंबाकू से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित भोजन जरूरी है। भोजन में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें तथा अधिक नमक और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। परिवार के सदस्यों को भी रक्तचाप और अन्य जरूरी जांच के लिए प्रेरित करना चाहिए।

विशेषज्ञ के अनुसार दिल की सेहत रोज लिए जाने वाले छोटे-छोटे फैसलों से बेहतर बनाई जा सकती है। वहीं, खतरे के संकेत सामने आने पर समय पर लिया गया फैसला जीवन बचाने में अहम हो सकता है।