
लाइफस्टाइल डेस्क। गर्मियों की दस्तक के साथ ही बाजारों में पानी से लबरेज, लाल और रसीले तरबूजों की बहार आ जाती है। तपती धूप में राहत देने वाला यह फल इन दिनों खुद एक बड़ी 'आंच' का सामना कर रहा है। दरअसल, सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी तक एक खौफनाक संदेश तेजी से तैर रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के कई राज्यों में केमिकल युक्त ‘जहरीले तरबूज’ खाने से लोगों की जान जा रही है।
इस अफवाह का असर यह हुआ कि मंडियों से खरीदार ही गायब हो गए और किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। लेकिन जब इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ा गया और फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट सामने आई, तो सच कुछ और ही निकला। आइए, देश के अलग-अलग राज्यों से उड़ी इन अफवाहों और उनकी असलियत का एक 'पोस्टमार्टम' करते हैं।
एमपी के श्योपुर में एक दुखद घटना घटी, जहां शाजापुर निवासी ड्राइवर इंद्र कुमार परिहार (43 वर्ष) और उनके बेटे विनोद (21 वर्ष) ने शुक्रवार की सुबह तरबूज खाया। इसके कुछ ही देर बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। अस्पताल ले जाते समय पिता ने दम तोड़ दिया, जबकि बेटे का इलाज जारी है।

स्थानीय स्तर पर इसे 'जहरीले तरबूज' से जोड़कर देखा जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद है। हालांकि, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तरबूज खाने से किसी की तत्काल मौत नहीं हो सकती। असली वजह का पता लगाने के लिए विसरा को सुरक्षित रख पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, ताकि मौत के वास्तविक टॉक्सिकॉलोजी कारणों का पता चल सके।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से भी एक दर्दनाक खबर आई, जहां तरबूज खाने के बाद 15 वर्षीय अखिलेश की मौत हो गई और परिवार के तीन अन्य बच्चे बीमार पड़ गए।

स्वास्थ्य विभाग की टीम इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है। डॉक्टरों के अनुसार, यह सीधे तौर पर फल का जहर नहीं, बल्कि दूषित रख-रखाव के कारण होने वाला गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसे E. coli (ई-कोलाई) या फूड बॉर्न पैथोजन का मामला हो सकता है, जो अक्सर कटे हुए फलों को लंबे समय तक असुरक्षित रखने से पनपते हैं।
यूपी के बिजनौर जिले के शेर नगर नरैनी गांव से भी एक ऐसी ही डरावनी खबर आई। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि २१ साल की युवती मुस्कान की तरबूज खाते ही मौत हो गई। इस अफवाह से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों ने तरबूज खरीदना बंद कर दिया।
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जब प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम ने मामले की जांच की, तो परतें खुलती चली गईं। मृतका के पिता जिया उल हसन ने खुद सामने आकर इस प्रोपेगैंडा का खंडन किया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी लंबे समय से बीमार थी और उसकी मौत 'हार्ट अटैक' से हुई थी, न कि तरबूज खाने से। दुखी पिता ने अफवाहबाजों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
पिछले दिनों मुंबई के पायधुनी (जे.जे. मार्ग) इलाके में एक ही परिवार के चार सदस्यों (अब्दुल्ला डोकडिया, उनकी पत्नी नसरीन और दो बेटियां) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। देखते ही देखते खबर आग की तरह फैली कि परिवार ने रात में चिकन बिरयानी खाने के बाद तरबूज खाया था, जिससे 'फूड पॉइजनिंग' हो गई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फूड एंड ड्रग्स विभाग (FDA) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) ने घर में बचे तरबूज की जांच की। रिपोर्ट ने इस 'तरबूज थ्योरी' के परखच्चे उड़ा दिए। तरबूज पूरी तरह शुद्ध था। असली और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब मृतकों के विसरा में ‘जिंक फॉस्फाइड’ (चूहे मारने की दवा) पाया गया। साफ है कि यह मामला तरबूज का नहीं, बल्कि हत्या या आत्महत्या का एक पेचीदा क्रिमिनल केस है, जिसकी गुत्थी अब मुंबई पुलिस सुलझा रही है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डाक्टरों की समझाइश बेहद साफ है तरबूज कुदरत का एक अनमोल तोहफा है, यह अपने आप में जहरीला नहीं होता। सोशल मीडिया पर चल रही 90% खबरें केवल सनसनी फैलाने का जरिया हैं। हां, खान-पान में लापरवाही भारी पड़ सकती है। तरबूज खाते समय बस इन बातों का ख्याल रखें:
