
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और मौसम में बदलाव के कारण खांसी, सर्दी, पाचन संबंधी परेशानी, वजन बढ़ना और पुरानी बीमारियों से जुड़ी समस्याएं आम हो रही हैं। बुधवार को नवदुनिया के लोकप्रिय कार्यक्रम हेलो डाक्टर में शहर के वरिष्ठ वरिष्ठ जनरल सर्जन और जनरल फिजीशियन Dr. जेपी पालीवाल ने पाठकों के सवालों के जवाब दिए।
Dr. पालीवाल कहा कि भोजन और सोने के बीच रखें दो से 2.5 घंटे का अंतर रखें। बढ़ते वजन को नियंत्रित करने के लिए नियमित व्यायाम करें। बच्चों में बार-बार संक्रमण होने पर खान-पान और दिनचर्या पर ध्यान दें। लंबे समय से खांसी, पेट दर्द या रक्तस्राव को नजरअंदाज न करें।
उन्होंने बताया कि मधुमेह की दवा बिना डाॅक्टर की सलाह के बंद न करें। पेट में गांठ या लगातार दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच कराएं। उन्होंने बताया कि छाती हमेशा पेट से 10% चौड़ी होनी चाहिए। यदि छाती 42 है तो पेट 38 होना चाहिए, यही फिटनेस का सिद्धांत है।
शशि कपूर, लखनऊ : उम्र 65 वर्ष है। करीब एक सप्ताह से खांसी और कफ की समस्या है।
जवाब : इस उम्र में लगातार खांसी और कफ की समस्या होने पर मधुमेह समेत अन्य बीमारियों की जानकारी रखना जरूरी है। पर्याप्त आराम और पानी लें। सामान्य भाप से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। अजवाइन-अदरक जैसे घरेलू उपाय लेने से पहले अपनी अन्य बीमारियों और दवाओं को ध्यान में रखना चाहिए। खांसी लंबे समय तक रहे, सांस लेने में परेशानी या तेज बुखार हो तो चिकित्सक से जांच कराएं।
रीना प्रजापति, भेल : मेरे दोनों बच्चों को बार-बार सर्दी-खांसी होती है।
जवाब : बच्चों का वजन, खान-पान, शारीरिक गतिविधि और आसपास का वातावरण देखना जरूरी है। मौसम बदलने के समय दिनचर्या और कपड़ों का विशेष ध्यान रखें। नाक बंद रहने या एलर्जी जैसे लक्षणों में चिकित्सक की सलाह से उपचार लिया जा सकता है। बच्चों को नियमित खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के नेजल ड्राप या एलर्जी की दवा लंबे समय तक न दें।
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रवि पटेल, रातीबड़ : घर में किसी को बुखार होता है तो बच्चे को भी बुखार हो जाता है। बच्चे की उम्र चार साल है।
जवाब : परिवार में वायरल संक्रमण फैलने की स्थिति में बच्चों को भी संक्रमण हो सकता है। घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें और बीमार व्यक्ति से बच्चे का संपर्क सीमित करें। पर्याप्त पानी और हल्का भोजन दें। लगातार तेज बुखार, कंपकंपी, पेशाब कम होना, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या अन्य गंभीर लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
अशोक मेहता, अयोध्या नगर : उम्र 31 वर्ष है। मधुमेह की दवा चल रही है। वजन 115 किलो है। क्या दूसरी बीमारी का उपचार भी करा सकते हैं?
जवाब : मधुमेह के साथ अधिक वजन होने पर वजन नियंत्रित करें। शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार अपनाएं। वजन कम करने का लक्ष्य धीरे-धीरे रखें। बिना चिकित्सकीय सलाह के वजन घटाने की दवाएं न लें। यदि दांतों से संबंधित समस्या या विटामिन-डी की कमी का संदेह है तो जांच के बाद ही उपचार लें।
हीरालाल चिढ़ार, बागरोद, विदिशा : उम्र 49 वर्ष है। चार साल से मधुमेह है। दवा लेने के बावजूद फास्टिंग शुगर 150 और खाने के बाद करीब 200 रहती है। वजन 73 किलो है। मां को भी मधुमेह था।
जवाब : पारिवारिक इतिहास मधुमेह के जोखिम को बढ़ा सकता है। फास्टिंग और भोजन के बाद लगातार शुगर अधिक आ रही है तो दवा और खान-पान की समीक्षा कराना जरूरी है। भोजन में साबुत अनाज, सब्जियां और नियंत्रित मात्रा में फल शामिल करें। मीठे खाद्य पदार्थ और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन सीमित करें। नियमित व्यायाम करें। मधुमेह को केवल घरेलू उपायों से नियंत्रित करने की कोशिश न करें और चल रही दवा बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद न करें।
हरीश मालवीय, हर्षवर्धन नगर : खाना खाने के बाद रात में खांसी चलने लगती है। उम्र 52 वर्ष है।
जवाब : खाना खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें। भोजन और सोने के बीच करीब दो से ढाई घंटे का अंतर रखें। इस तरह की खांसी का एक कारण एसिड रिफ्लक्स भी हो सकता है। बहुत मसालेदार और अधिक तला-भुना भोजन सीमित करें। शराब और तंबाकू का सेवन करते हैं तो उसे छोड़ना जरूरी है। समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सक से जांच कराएं।
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गिरराज लावंशी, ब्यावरा, राजगढ़ : पेट में घबराहट रहती है, खाना ठीक से नहीं पचता और पेट में दर्द होता है। उम्र 30 वर्ष है। साथ ही एक दांत में कालापन और कीड़ा लगा है।
जवाब : भोजन का समय नियमित रखें और बहुत देर तक खाली पेट न रहें। पेट दर्द बार-बार हो रहा है तो केवल दर्द की दवा लेकर इसे नजरअंदाज न करें। पेट की जांच कराएं। दांत में कीड़ा लगने पर डेंटिस्ट से जांच कराएं। दांत की स्थिति के अनुसार रूट कैनाल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है।
ताराचंद यादव, कोटरा सुल्तानाबाद : उम्र 46 वर्ष है। एक महीने से पाइल्स की समस्या है और शौच से पहले खून आता है। पेशे से टेलर हूं।
जवाब : मल त्याग के दौरान खून आना केवल पाइल्स के कारण ही हो, यह जरूरी नहीं है। कब्ज से बचने के लिए पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन, फल और सब्जियां लें। भोजन अच्छी तरह चबाकर खाएं और लंबे समय तक बैठे रहने से बचें। लगातार रक्तस्राव, अधिक खून आना या कमजोरी महसूस होना हो तो तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं।
सौरभ दास, सागर : पेट के पास हल्की-सी गांठ महसूस होती है। उम्र 41 वर्ष है और जिम करता हूं।
जवाब : पेट में गांठ महसूस होने पर उसका स्थान, आकार और दबाने पर होने वाले बदलाव की जांच जरूरी है। जिम या भारी वजन उठाने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है और कुछ मामलों में हर्निया जैसी समस्या भी हो सकती है। अल्ट्रासाउंड कराएं।
हुकम सिंह, राजगढ़ : हाथ-पैरों में दर्द और भारीपन रहता है। वेटरनरी विभाग में काम करता हूं।
जवाब : हाथ-पैरों में दर्द और भारीपन के कई कारण हो सकते हैं। केवल लक्षण के आधार पर विटामिन-ई की कमी मानना उचित नहीं है। विटामिन-डी, बी12, हीमोग्लोबिन आदि की जांच चिकित्सक की सलाह से कराएं। पर्याप्त नींद लें, शारीरिक गतिविधि करें । नमक की मात्रा भी नियंत्रित रखें।
पवन श्रीवास्तव, कोलार : रात में ज्यादातर खर्राटे आते हैं। यह समस्या करीब 10 साल से है।
जवाब : लंबे समय से खर्राटे आना सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर यदि सोते समय सांस रुकने, घुटन, बार-बार नींद खुलने या दिन में अत्यधिक नींद आने की समस्या भी हो तो जांच जरूरी है।
