घुटनों से जुड़ी समस्या में जोड़ की कार्टिलेज घिसने लगती है, आराम दिला सकती है फिजियोथेरेपी
फिजियोथेरेपी में घुटने को मोड़ने और सीधा करने, संतुलन बनाने तथा चलने के तरीके में सुधार पर भी ध्यान दिया जाता है। इससे मरीज की दैनिक गतिविधियों में आत...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 11:35:16 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 11:48:43 AM (IST)
घुटने के दर्द से बचाव।HighLights
- मजबूत मांसपेशियां घुटने के जोड़ पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में मदद करती हैं।
- इससे चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने-उठने जैसी गतिविधियां आसान हो सकती हैं।
- जरूरत के अनुसार अन्य उपचारों से दर्द एवं अकड़न कम करने में भी मदद मिलती है।
लाइफस्टाइल डेस्क। घुटनों में दर्द, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में परेशानी और कुर्सी से उठने-बैठने में तकलीफ को अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मान लिया जाता है। कई बार ये लक्षण आस्टियोआर्थराइटिस के कारण होते हैं। इस स्थिति में घुटने के जोड़ की कार्टिलेज धीरे-धीरे घिसने लगती है, जिससे दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है।
ऐसे में मरीजों के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या इस समस्या का अंतिम उपचार सर्जरी ही है? वास्तव में हर मरीज को सर्जरी की जरूरत नहीं होती। बीमारी की गंभीरता के अनुसार फिजियोथेरेपी से भी काफी राहत मिल सकती है।
फिजियोथेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि घुटने की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना भी है। इसके तहत जांघ और कूल्हे की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम कराए जाते हैं। मजबूत मांसपेशियां घुटने के जोड़ पर पड़ने वाले दबाव को संभालने में मदद करती हैं।
इससे चलने, सीढ़ियां चढ़ने और बैठने-उठने जैसी गतिविधियां आसान हो सकती हैं। उचित व्यायाम, मैनुअल थेरेपी और जरूरत के अनुसार अन्य उपचारों से दर्द एवं अकड़न कम करने में भी मदद मिलती है।
घुटने के दर्द को अनदेखा ना करें, 3 से 5 दिनों तक बना रहे तो अगला कदम यह होना चाहिए
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- फिजियोथेरेपी में घुटने को मोड़ने और सीधा करने, संतुलन बनाने तथा चलने के तरीके में सुधार पर भी ध्यान दिया जाता है।
- इससे मरीज की दैनिक गतिविधियों में आत्मनिर्भरता बढ़ सकती है।
- हालांकि, व्यायाम का चयन मरीज की स्थिति के अनुसार होना चाहिए।
- बिना विशेषज्ञ की सलाह के अत्यधिक व्यायाम करने से परेशानी बढ़ सकती है।
- डाॅ. प्रीति मानधन्या सोमानी, फिजियोथेरेपिस्ट का कहना है कि समय पर जांच कराएं।
- नियमित फिजियोथेरेपी से कई मरीजों में दर्द और कार्यक्षमता में सुधार होता है तथा सर्जरी को टालना संभव हो सकता है।
- लेकिन जब जोड़ को गंभीर नुकसान पहुंच चुका हो और अन्य उपचारों से पर्याप्त राहत न मिले।
- तब अस्थि रोग विशेषज्ञ सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इसलिए घुटनों के दर्द को नजरअंदाज न करें।
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