
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। लगातार थकान को अक्सर उम्र बढ़ने, तनाव या महिलाओं में मेनोपॉज से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर थकान लंबे समय तक बनी रहे और इसके साथ बार-बार इन्फेक्शन, रात में पसीना आना, घाव का देर से भरना या खून की जांच में असामान्य बदलाव नजर आएं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्रिटेन की रहने वाली सारा चैपमैन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह पहले काफी एक्टिव थीं, हॉकी खेलती थीं और नियमित रूप से ब्लडदान करती थीं। लेकिन 2011 में उन्हें अचानक पहले से कहीं ज्यादा थकान महसूस होने लगी। वह बार-बार बीमार पड़ने लगीं, उन्हें सीने में इन्फेक्शन होने लगा और घाव भी सामान्य से ज्यादा समय लेने लगे।
सारा के मुताबिक, उन्होंने कई डॉक्टर्स से सलाह ली, लेकिन उनके लक्षणों को उम्र बढ़ने और मेनोपॉज से जोड़कर देखा गया।
समय के साथ उनकी हालत बिगड़ती गई। उनका हीमोग्लोबिन इतना कम हो गया कि वह ब्लड डोनेट तक नहीं कर सकीं। इसके अलावा रात में पसीना आने और त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ने लगीं। एक वॉकिंग हॉलिडे के दौरान उनकी परेशानी इतनी बढ़ गई कि कुछ कदम चलना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद हुई जांच में खून की एक असामान्यता सामने आई।
2013 में सारा को मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (MDS) का पता चला। यह ऐसी स्थिति है जिसमें बोन मैरो यानी अस्थिमज्जा सामान्य तरीके से स्वस्थ ब्लड सेल्स नहीं बना पाती। उन्हें बताया गया कि यह बीमारी आगे चलकर ल्यूकेमिया में बदल सकती है।
इसके बाद उनकी नियमित ब्लड टेस्ट और बोन मैरो बायोप्सी होती रही। जून 2016 में उन्हें एक्यूट मायलॉयड ल्यूकेमिया (AML) का पता चला।
ल्यूकेमिया एक प्रकार का ब्लड कैंसर है, जो मुख्य रूप से खून बनाने वाले टीशूज और बोन मैरो को प्रभावित करता है। इस बीमारी में असामान्य ब्लड सेल्स तेजी से बढ़ने लगती हैं और शरीर में स्वस्थ लाल ब्लड सेल्स, सफेद ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स के सामान्य निर्माण में बाधा डाल सकती हैं। इसी वजह से व्यक्ति को थकान, बार-बार इन्फेक्शन और खून बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ल्यूकेमिया को मुख्य रूप से इस आधार पर बांटा जाता है कि बीमारी कितनी तेजी से बढ़ती है और कौन-सी ब्लड सेल्स प्रभावित होती हैं। एक्यूट ल्यूकेमिया तेजी से बढ़ता है और इसमें जल्द इलाज की जरूरत होती है। इसके प्रमुख प्रकार हैं-
वहीं क्रॉनिक ल्यूकेमिया आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके प्रमुख प्रकार हैं-
ल्यूकेमिया के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ मामलों में ये धीरे-धीरे सामने आते हैं, जबकि कुछ लोगों में तेजी से दिखाई दे सकते हैं।
इन लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है-
हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को ल्यूकेमिया ही है। कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं।
सारा के मामले में पहले MDS का पता चला और बाद में यह AML में बदल गया। Myelodysplastic Syndromes (MDS) ऐसी बीमारियों का समूह है जिसमें बोन मैरो सामान्य ब्लड सेल्स बनाने में ठीक से काम नहीं करता। कुछ मामलों में MDS आगे चलकर AML में बदल सकता है।
इसी वजह से खून की जांच में लगातार असामान्य बदलाव मिलने पर डॉक्टर नियमित निगरानी, ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर बोन मैरो जांच की सलाह दे सकते हैं।
ज्यादातर मामलों में ल्यूकेमिया का कोई एक स्पष्ट कारण नहीं होता। यह तब विकसित हो सकता है जब ब्लड बनाने वाली कोशिकाओं में ऐसे आनुवंशिक बदलाव हो जाएं, जिससे वे असामान्य तरीके से बढ़ने और विभाजित होने लगें।
कुछ चीजें इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं, जैसे-
हालांकि, किसी जोखिम कारक का होना यह तय नहीं करता कि व्यक्ति को ल्यूकेमिया जरूर होगा। कई लोगों में बीमारी के पीछे कोई स्पष्ट जोखिम कारक नहीं मिलता।
ल्यूकेमिया में स्वस्थ ब्लड सेल्स की कमी होने से कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। लाल ब्लड सेल्स कम होने पर गंभीर एनीमिया हो सकता है, जिससे बहुत ज्यादा थकान और सांस फूलने की समस्या हो सकती है। सफेद ब्लड सेल्स की कमी शरीर की इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
वहीं प्लेटलेट्स कम होने पर आसानी से चोट लग सकती है और गंभीर मामलों में खून बहने का खतरा बढ़ सकता है।
बीमारी बढ़ने पर असामान्य कोशिकाएं बोन मैरो के बाहर दूसरे अंगों और ऊतकों को भी प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, इलाज के दौरान दी जाने वाली कीमोथेरेपी से कमजोरी, मतली, बाल झड़ना, कम ब्लड काउंट और इन्फेक्शन का खतरा बढ़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लगातार रहने वाली असामान्य थकान या बार-बार होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को केवल उम्र, तनाव या मेनोपॉज मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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