
लाइफस्टाइल डेस्क। अच्छी नींद के लिए लोग कई तरह के तरीके अपनाते हैं। कोई सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाता है, तो कोई खास स्लीपिंग मास्क और स्किनकेयर रूटीन का इस्तेमाल करता है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड़ तेजी से चर्चा में है, जिसे Mouth Taping कहा जाता है। इसमें लोग रात को सोते समय अपने होंठों पर टेप लगाकर सोते हैं, ताकि नींद के दौरान मुंह बंद रहे और सांस नाक से ली जाए।
इस ट्रेंड को बढावा देने वाले लोगों का दावा है कि इससे खर्राटे कम होते हैं, मुंह सूखने की समस्या दूर होती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। कुछ लोग तो इसे चेहरे की बनावट और जॉलाइन सुधारने से भी जोड़ते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या मुंह पर टेप लगाकर सोना वाकई सेहत के लिए फायदेमंद है या यह एक ऐसा सोशल मीड़िया ट्रेंड है, जिसे अपनाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है?
Mouth Taping में सोने से पहले होंठों पर एक खास तरह की टेप लगाई जाती है, ताकि व्यक्ति नींद के दौरान मुंह खोलकर सांस न ले और नाक से सांस लेने की आदत विकसित करे।
दरअसल, नाक से सांस लेने के कई फायदे हैं। नाक हवा को फिल्टर, गर्म और नम करने में मदद करती है। वहीं, मुंह से सांस लेने पर सुबह मुंह सूखने और गले में परेशानी महसूस हो सकती है। इसी वजह से कुछ लोग Mouth Taping को बेहतर नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल का आसान तरीका मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को खासतौर पर उन लोगों के बीच लोकप्रियता मिली है, जो अपनी नींद, स्किनकेयर और फिटनेस रूटीन को बेहतर बनाने के लिए नए तरीके आजमाते हैं। हालांकि, इसके प्रचार में किए जाने वाले सभी दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
Mouth Taping को लेकर सबसे आम दावा यह है कि इससे खर्राटे कम हो सकते हैं। कुछ सीमित अध्ययनों में हल्के ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से जूझ रहे लोगों में इसके संभावित फायदे देखे गए हैं। लेकिन इन अध्ययनों में प्रतिभागियों की संख्या कम रही है और लंबे समय तक इसके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है।
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है या उसका प्रवाह कम हो जाता है। यह समस्या केवल मुंह खोलकर सोने की वजह से नहीं होती, बल्कि गले के ऊपरी हिस्से में वायुमार्ग संकरा होने या बंद होने से भी जुड़ी होती है। ऐसे में सिर्फ मुंह पर टेप लगाने से इस समस्या का इलाज नहीं किया जा सकता।
अस्थमा और एलर्जी फाउंड़ेशन ऑफ अमेरिका के अनुसार, Mouth Taping हर व्यक्ति के लिए जरूरी या उपयुक्त नहीं है। इसका असर व्यक्ति की सांस लेने की आदत और वायुमार्ग की स्थिति पर निर्भर करता है।
मुंह पर टेप लगाकर सोना कुछ लोगों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। खासकर जिनकी नाक बंद रहती है, उन्हें सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस की समस्या है, उनके लिए ऐसा करना सांस लेने में परेशानी बढा सकता है।
इसके अलावा, जिन लोगों को स्लीप एपनिया, अस्थमा या सांस से जुड़ी दूसरी समस्याएं हैं, उन्हें बिना ड़ॉक्टर की सलाह के इस तरीके को नहीं अपनाना चाहिए। रात में सांस लेने में रुकावट होने पर मुंह को टेप से बंद रखना परेशानी बढा सकता है। टेप के इस्तेमाल से त्वचा में जलन या एलर्जी भी हो सकती है।
अगर आपको सोते समय खर्राटे आते हैं, सुबह मुंह सूखा रहता है या दिनभर थकान महसूस होती है, तो सबसे पहले इसकी वजह समझना जरूरी है। लगातार खर्राटे, नींद में सांस रुकना या सुबह सिरदर्द जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर या स्लीप स्पेशलिस्ट से सलाह लें।
बेहतर नींद के लिए सोने और जागने का समय नियमित रखें, सोने से पहले कैफीन और स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करें और कमरे में आरामदायक माहौल बनाएं। अगर नाक बंद रहती है, तो उसके कारण का इलाज कराएं।
Mouth Taping को बेहतर नींद का आसान शॉर्टकट समझना सही नहीं है। नाक से सांस लेना सामान्य रूप से फायदेमंद है, लेकिन इसके लिए मुंह को जबरन बंद करना जरूरी नहीं। सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर हेल्थ ट्रेंड को अपनाने से पहले उसके पीछे मौजूद वैज्ञानिक प्रमाण और अपनी सेहत की स्थिति को समझना ज्यादा जरूरी है।
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