• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • लाइफस्टाइल

एमपी का 'देसी फ्रिज', मालवा-निमाड़ के मटकों की देश भर में मची धूम, जानें क्यों है इतनी डिमांड?

भीषण गर्मी की आहट होते ही घरों में फ्रिज से ज्यादा देसी फ्रिज यानी मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। अपनी खास बनावट और प्राकृतिक शीतलता के कारण ये मट...और पढ़ें

By Dheeraj BelwalEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 28 Mar 2026 05:19:51 PM (IST)Updated Date: Sat, 28 Mar 2026 05:19:51 PM (IST)
एमपी का 'देसी फ्रिज', मालवा-निमाड़ के मटकों की देश भर में मची धूम, जानें क्यों है इतनी डिमांड?
गर्मियों की शुरुआत के साथ बढ़ा मिट्टी के शिल्प का कारोबार। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. गर्मियों की शुरुआत के साथ बढ़ा मिट्टी के शिल्प का कारोबार
  2. उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी है मध्य प्रदेश के मटकों की मांग
  3. 3 दिन की कड़ी मेहनत-तपन से तैयार होते हैं मालवा के मटके

लाइफस्टाइल डेस्क। भीषण गर्मी की आहट होते ही घरों में फ्रिज से ज्यादा 'देसी फ्रिज' यानी मिट्टी के मटकों की मांग बढ़ गई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश, खासकर मालवा और निमाड़ क्षेत्र में बने मटके आज सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी गूंज दक्षिण भारत तक पहुंच चुकी है। अपनी खास बनावट और प्राकृतिक शीतलता के कारण एमपी के ये मटके राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की पहली पसंद बन गए हैं।

क्यों खास हैं मालवा-निमाड़ के मटके?

मध्य प्रदेश के इन मटकों को 'देसी फ्रिज' की संज्ञा दी जाती है। इनकी लोकप्रियता के पीछे छिपे हैं ये चार मुख्य कारण:

विशेषता विवरण
विशेष काली मिट्टी प्राकृतिक खनिजों से भरपूर काली मिट्टी का उपयोग किया जाता है, जो पानी को शुद्ध रखती है।
कठोर तपस्या इन्हें बनाने में तीन दिन की कड़ी मेहनत लगती है और भट्टी में तब तक तपाया जाता है जब तक ये पूरी तरह लाल और मजबूत न हो जाएं।
बैक्टीरिया मुक्त मिट्टी की प्राकृतिक संरचना के कारण इसमें हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते, जिससे पानी स्वास्थ्य के लिए अमृत समान होता है।
कुदरती कूलिंग ये मटके भीषण गर्मी में भी पानी को फ्रिज जैसा ठंडा रखने की क्षमता रखते हैं।

सात समंदर तो नहीं, पर सात राज्यों पार है डिमांड


मालवा के कारीगरों की बेहतरीन नक्काशी और गुणवत्ता का ही परिणाम है कि यहां के मटके अब दक्षिण भारत के राज्यों में भी सप्लाई हो रहे हैं। गुजरात की विशेष मिट्टी से बने आकर्षक बर्तन भी अब बाजार में कड़ी टक्कर दे रहे हैं, लेकिन पारंपरिक काली मिट्टी के मटकों का दबदबा आज भी बरकरार है।

naidunia_image

(Image Source: AI-Generated)

तीन दिन की मेहनत से तैयार होता है एक 'फ्रिज'

एक मटके को आकार देने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया बेहद जटिल है। कारीगरों के अनुसार, मिट्टी को गूंथने, चाक पर चढ़ाने और फिर सुखाने के बाद आग में तपाने की प्रक्रिया में लगभग 72 घंटे का समय लगता है। यही 'तपस्या' मटके को इतनी मजबूती देती है कि वह सालों-साल चलता है।

यह भी पढ़ें- बच्चा नहीं सुनता आपकी बात? चिल्लाने के बजाय अपनाएं ये 6 जादुई तरीके, जिद्दी स्वभाव भी हो जाएगा शांत

स्वास्थ्य और स्वाद का संगम

डॉक्टरों का भी मानना है कि मिट्टी के घड़े का पानी पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म सुधरता है और गले से जुड़ी बीमारियां नहीं होतीं। फ्रिज के प्लास्टिक और गैस के विपरीत, मिट्टी के मटके पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) होते हैं।

इंदौर, उज्जैन, खरगोन और खंडवा के बाजारों में मटकों की दुकानें सज चुकी हैं। इस साल डिजाइनदार और स्टैंड वाले मटकों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है।